संडे पोस्ट के पत्रकार आकाश नागर की हुई जीत, हाईकोर्ट ने सांसद, गृहसचिव और पुलिस को किया तलब


कलम को तलवार से अधिक तेज यू ही नहीं कहा जाता है। यह बिना घाव के ही अपना असर कर देती है। यही कलम जब सच के लिए उठती है तो बडे से बडा पद वाला भी इसके आगें झुकता हुआ दिखाई देने लगता है। इसी के साथ सच यह भी है कि कलम जब निष्पक्ष चलती है तो न्यायालय भी उस के पक्ष में न्याय सुनाता है। 

- चित्रांश 

कुछ ऐसा ही हुआ है दि संडे पोस्ट के वरिष्ठ पत्रकार आकाश नागर के मामले में। दि संडे पोस्ट के रोविग एडिटर आकाश नागर को एक सच उजागर करने के बाद मुकदमे का सामना करना पड़ा था। जिसमें उनकी अब जीत हुई है। हाई कोर्ट नैनीताल ने उनके पक्ष में न्याय सुनाया है।

फिलहाल , नैनीताल हाईकोर्ट की तरफ से आकाश नागर के मामले पर रोक लगाते हुए उनके खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराने वाले सांसद अजय भट्ट सहित उत्तराखंड के गृह सचिव और देहरादून स्थित नेहरू कॉलोनी थाना के एसएचओ को नोटिस भेजा गया है । जिसमें तीनों को 14 अक्टूबर तक इस मामले पर अपनी सफाई पेश करनी है।

इस मामले पर हाई कोर्ट नैनीताल के वरिष्ठ अधिवक्ता दुष्यंत में मैनाली ने पूरे मामले को तथ्यों के साथ हाईकोर्ट के समक्ष रखा । मैनाली की  मजबूत पैरवी का ही नतीजा है कि फिलहाल खोजी पत्रकार आकाश नागर को हाई कोर्ट नैनीताल ने इस मामले में रोक लगाते हुए मजबूती प्रदान कर दी है।

गौरतलब है कि कुछ दिन पहले से उत्तराखण्ड में भाजपा के कुछ विधायकों ने त्रिवेंद्र सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल रखा है । जो आजकल उत्तराखंड में चर्चा का विषय बना हुआ है।  इसी सम्बन्ध में पत्रकार आकाश नागर द्वारा दि संडे पोस्ट के वेब पोर्टल पर एक खबर "भट्ट की शह पर CM रावत से असंतुष्ट विधायकों का दिल्ली कूच, चुफाल कर रहे नेतृत्व " नामक शीर्षक से प्रकाशित की गई थी । खबर में आकाश नागर द्वारा लिखा गया था कि पूर्व प्रदेश अध्यक्ष चुफाल असंतुष्ट विधायकों के साथ दिल्ली में भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा से नेतृत्व परिवर्तन की मांग को लेकर मुलाकात कर रहे है। 

साथ ही खबर में ये भी लिखा गया कि नैनीताल के सांसद अजय भट्ट की शह पर भाजपा  के दर्जनों असंतुष्ट  विधायकों की राष्ट्रीय अध्यक्ष से मुलाकात हुई है । इस खबर के प्रकाशित होने से बोखलाए सांसद अजय भट्ट ने खबर प्रकाशित करने के चलते पत्रकार आकाश नागर के विरुद्ध मुकदमा दर्ज कराने में बिल्कुल भी देर नहीं लगाई । यही नहीं बल्कि सांसद ने सत्ता का दुरूपयोग  करते हुए नागर के विरुद्ध आइपीसी की उन धाराओं में मुकदमा दर्ज कराया जो न्यायसंगत नहीं थी।

उत्तराखंड में अपनी खोजी पत्रकारिता के लिए चर्चित रहे पत्रकार आकाश नागर को आरोपी बनाते हुए उनके विरूद्ध देहरादून स्थित नेहरू कालौनी थाने में धारा 469 में मुकदमा दर्ज कराया गया।आकाश के विरुद्ध भाजपा सांसद की तहरीर पर मुकदमा दर्ज होने से देशभर के पत्रकारों में रोष व्याप्त हो गया था। 

जबकि, दूसरी तरफ उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री मुख्यमंत्री हरीश रावत ने आकाश नागर पर मुकदमा दर्ज होने की कडी निंदा की थी। रावत ने ट्विटर पर नागर पर मुकदमें को सत्ता की हनक करार देते हुए कहा कि वह कलम की ताकत से डरकर पत्रकारों पर फर्जी मामले दर्ज करा रही है।

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