सखी


Image may contain: Snehlata Dwivedi, standing

नयनन में है प्यार सखी इस सावन में,
कैसे करूँ श्रृंगार सखी इस सावन में।
मधुवन नाचे मोर सखी इस सावन में,
मोर पंख चित चोर सखी इस सावन में।

हरियाली चहुँ ओर सखी इस सावन में,
कंगना साड़ी ओढ़ सखी इस सावन में।
चमके बिंदी जोर सखी इस सावन में,
कजरा बहके रोज सखी इस सावन में।

पवन बहे बड़ी जोर सखी इस सावन में,
भींगे आँचल मोर सखी इस सावन में।
कहाँ गए मीत मोर सखी इस सावन में,
झुमका करता शोर सखी इस सावन में।

तन लगे अग्नि जोर सखी इस सावन में,
कमर करघनी तोड़ सखी इस सावन में।
पायल घायल रोज सखी इस सावन में,
मानत ना मन मोर सखी इस सावन में।

- स्नेहलता द्विवेदी'आर्या'




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