भोपाल शहर का पुराना इलाका क्यों बन रहा हॉटस्पॉट?



भोपाल में कोरोना वायरस के सबसे ज्यादा मामले पुराने शहर में निकल कर सामने आए हैं. जो मौतें हुई हैं वो भी पुराने शहर से जुड़ी हुई हैं. जहांगीराबाद और इब्राहिमगंज के इलाके में कोरोना पॉजिटिव मरीज की मौत हो चुकी हैं. बाबजूद इसके पुराने शहर में ही लोग सड़कों पर उतर कर लॉकडाउन का उल्लंघन कर रहे हैं. 


वैश्विक महामारी कोरोना के चलते चल रही तालाबन्दी(लॉक डाउन) के तीसरे चरण के अंतिम दौर में भोपाल की सड़कों पर यह नजारा आम हो गया है. दो पहिया, चार पहिया वाहन अनवरत दौड़ रहे हैं. तालाबंदी के दूसरे चरण में जहां एक घण्टे में कोई एक वाहन सड़क पर दिखाई देता था, वहीं अब एक मिनिट में पांच वाहन दौड़ रहे है. भारवाहक ऑटो, मिनी ट्रक फर्राटा भर रहे हैं. चौराहों पर पुलिस की संख्या कम दिखाई दे रही है. पुराने शहर में चौराहों, तंग गलियों में रौनक है. बच्चे क्रिकेट, छुपम-छुपाई खेल रहे हैं. उम्र दराज गप्पो में मशगूल है. शतरंज की बाजी हो रही है. लग ही नहीं रहा है, तालाबंदी है. लोग सरकार पर एहसान जताते हुए या दहशत में घरों के अंदर हैं. 



राम मोहन चौकसे     

तालाबंदी को अब डेढ़ माह से ज्यादा समय हो गया है. भारत का कोई ऐसा राज्य नहीं है, जो इस महामारी से मुक्त हो. गोवा, असम अपवाद हो सकते है. मप्र में इस महामारी से बचाव को लेकर जो सक्रियता मार्च-अप्रैल में दिखाई दी थी, वह अब शिथिल होती जा रही है. इस ढील का परिणाम है कि इंदौर, भोपाल और उज्जैन में महामारी काबू से बाहर होती जा रही है. कम्युनिटी संक्रमण फैलने की आशंका बलवती होती जा रही है. कोरोना के मरीजों की संख्या बढ़ी है. लोगो का कहना कि सरकारी आंकड़ों में मरीजों की संख्या में गड़बड़ी है. सच छुपाया जा रहा है. यही हालात रहे तो ताला बन्दी का सख्ती से पालन कराने के लिए सेना को सड़क पर उतरना होगा. 


लगभग सौ साल बाद आई अलग प्रकार की महामारी ने पूरी दुनिया में मौत का तांडव मचाया है. मौत का सिलसिला थमने का नाम ही नहीं ले रहा है. आंकड़े इतने भयावह है कि अगली सदी तक ख़ौफ़ खत्म नहीं होगा. दुनियां में मौत का आंकड़ा 3 लाख को छूने को बेताब है. 42 लाख लोग संक्रमित हैं. दुनियां में सबसे ज्यादा ताकत वाला देश अमरीका भी इस महामारी के आगे लाचार है. अमरीका में अभी तक 80 हजार लोगों की मौत हो चुकी है. 14 लाख संक्रमित हैं.  भारत मे मौत का आंकड़ा 2030 तक पहुंच चुका है.  70 हजार संक्रमित हैं. मप्र में 226 मौत और 4 हजार लोग संक्रमित हैं. भोपाल में 810 संक्रमित और 34 मौत हो चुकी हैं. भोपाल में संक्रमितों की संख्या बढ़ती ही जा रही है. 

मप्र में 22 मार्च को लागू हए जनता कर्फ्यू तक इस महामारी की भयावहता का अंदाज ही नहीं था. कांग्रेस की 15 माह पुरानी सरकार गिरने के बाद 24 मार्च को शिवराज सिंह चौहान फिर से मुख्यमंत्री बने. 24 मार्च से ही ताला बन्दी का पहला चरण शुरू हुआ. योजना बनाई गई.  अस्पतालों को चाक चौबंद करने की पहल की गई. पहले चरण तक सब ठीक था. दूसरा चरण शुरू होते ही सरकारी स्तर पर लापरवाही शुरू हो गई.  महामारी से बचाव के लिए शोरशराबा ज्यादा काम कम हुआ. स्वास्थ्य विभाग की जिम्मेदार महिला आईएएस अफसर पल्लवी गोहिल ने विदेश आए परिचित की जानकारी छुपाई. खुद कोरोना पॉजिटिव होने के बाद जरूरी बैठकों में शामिल होती रहीं. उनके सम्पर्क में आने से चार आई ए एस अफसर और एक दर्जन कर्मचारी, डॉक्टर पॉजिटिव हो गए. आनन फानन में स्वास्थ्य विभाग की टीम बदली गई. 


मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने युद्ध स्तर पर मोर्चा संभाला. ताबड़तोड़ फैसले लिए. हर तीसरे दिन आदेश में फेर बदल हुए. मृत प्रायः हो चुके सरकारी तंत्र ने अपना कमाल दिखाया. अधिकांश आदेश कागजों तक सिमट कर रह गए. स्वास्थ्य विभाग के दो दर्जन अफसर बदले गए. इंदौर सहित कई जिलों के कलेक्टर बदले गए. आनन फानन में प्रदेश भर के सरकारी अस्पतालों सहित निजी अस्पतालों को महामारी की जांच और इलाज के लिए अधिकृत किया गया. उज्जैन में गार्डी मेडिकल कालेज,  इंदौर में अरविंदो मेडिकल कालेज, भोपाल में एम्स,  जी एम सी, जयप्रकाश अस्पताल, एक विवादित निजी मेडिकल कालेज और अस्पताल कोजांच और उपचार का केंद्र बनाया गया. भोपाल के जय प्रकाश अस्पताल, हमीदिया अस्पताल में जांच और उपचार केआदेश तीन बार बदले गए. हर बार लोग भ्रम में रहे. एम्स में मरीजों के इलाज और जांच में भेदभाव किया गया. 

प्रशासनिक ढील का अंदाज इस बात से लगाया जा सकता है कि उज्जैन में जांच और उपकार के केंद्र गार्डी मेडिकल कालेज में आम बीमारियों के उपचार की सुविधा नहीं थी. कोरोना की जांच और उपचार मे घनघोर लापरवाही बरती गई. सेनेटाइजेसन की व्यवस्था नहीं थी. सरकार जब तक जागी तब तक 25 मौत हो चुकी थी. मरने वालों में भाजपा का पार्षद भी शामिल था. मप्र में पुलिस के तीन अफसर कोरोना की बलि चढ़ गए. प्रदेश में डॉक्टर, नर्स, चैनल का पत्रकार, चार दर्जन पुलिस कर्मी, कर्मचारी, अधिकारी, किन्नर लगातार संक्रमित होते गए. अधिकांश ठीक हुए. कुछ मौत का शिकार हुए. 


भोपाल में तालाबंदी को हल्के में लेने का नतीजा यह हुआ कि पुराने शहर की घनी आबादी वाले जहांगीराबाद, मंगलवारा, कुम्हारपुरा, कोहेफिजा, ऐशबाग, तलैया, ईंटखेड़ी,  बाबड़िया कला सहित अन्य क्षेत्रों में कोरोना के मरीज दोगुने बढ़ गए. भोपाल में जहांगीराबाद सबसे बड़ा हाट स्पॉट बना हुआ है. प्रशासनिक ढील की बानगी यह है निजी मेडिकल कालेज में भर्ती किये गए मरीज बिल्कुल ठीक होने का न सिर्फ दावा किया गया बल्कि ढिढोरा पीटा गया. इसके ठीक विपरीत एम्स,  हमीदिया अस्पताल में ठीक होने की खबरे न के बराबर हैं. आम राय है कि जब इस महामारी का कोई इलाज नहीं है. कोई टीका नहीं बना है. तब भोपाल के निजी मेडिकल कालेज में ऐसा कौन सा चमत्कार हो रहा है कि वहां सब ठीक हो रहे हैं. इंदौर के निजी मेडीकल की भी कमोवेश यही स्थिति है. सब सरकारी तंत्र के आंकड़ों की बाजीगिरी है. इसका दावा इस बात से पुख्ता होता है कि जिन मरीजों के ठीक होने का दावा किया गया, उनकी इलाज के बाद कि कोई जानकारी नहीं दी गई. 

प्रशासनिक ढील की एक बानगी यह है कि ड्रोन से निरीक्षण करने, तीन दर्जन टैंकरों से गली,  मोहल्ले को सेनेटाइज्ड करने, घर तक जरूरत का सामान पहुंचाने, फोन करने पर 108 की सुविधा उपलब्ध होने जैसे दावे खोखले साबित हुए. पुलिस महकमे में कोरोना के पॉजिटिव मिलने के बाद भय के वशीभूत होकर पुलिस ने एक दूरी बनाना शुरू कर दी. भोपाल के सभी हॉट स्पॉट की गलियां बेरिकेटिंग कर मान लिया गया, सब ठीक है. 

भोपाल में जहांगीराबाद सहित सभी क्षेत्र हॉट स्पॉट में इसलिए तब्दील हुए, क्योंकि अधिकांश मुस्लिम बाहुल्य बस्तियों में लोग तालाबंदी के बाद घूमते रहे. गलियों में झुंड में बैठकर आम दिनों की तरह महफ़िल सजाते रहे. सोशल डिस्टेंसिग की धज्जियां उड़ाई गई. पुलिस की गश्त गलियों में बंद है. यही कारण चार फुट की गलियों में रिश्तेदारियां निभाई जा रही है. चहल पहल से संक्रमण फैलता गया. लॉकडाउन के तीसरे चरण के अंतिम दौर में यह महामारी दुगनी गति से बढ़ रही है. स्थिति विस्फोटक होती जा रही है. यह खतरे के संकेत हैं. यही हालत रहे तो लॉकडाउन का पालन कराने के लिए सेना को सड़क पर उतरना होगा.



Share on Google Plus

News Digital India 18

पाठकों के सुझाव सदा हमारे लिए महत्वपूर्ण है ..

0 comments:

Post a Comment

abc abc