लो ग्रीन जोन छतरपुर जिले में भी कोरोना वायरस का रायता फैल गया


छतरपुर: लॉकडाउन में छूट का मंजर ...

पूर्व अनुमान के मुताबिक मई के तीसरे सप्ताह से कोरोना वायरस के अधिक फैलने की सम्भावना थी. स्वास्थ्य विभाग के अलर्ट के बाद भी प्रशासनिक उदासीनता के चौकाने वाले परिणाम सामने आना शुरू हो गए है. नौगांव के मरीज का दुबारा लिया सेम्पल फिर पॉजिटिव आया है तो ग्राम कैथोकर में पॉजिटिव युवक की पत्नी सहित दो अन्य हम साथी भी पॉजिटिव निकल गए है. 


छतरपुर / धीरज चतुर्वेदी   

इस प्रकार अब ग्रीन जोन छतरपुर में कोरोना पॉजिटिव का आंकड़ा दो से बढ़ पांच पहुंच गया है. दुगनी चाल से बढ़ते मरीजों के पीछे प्रशासनिक घोर लापरवाही को सीधा दोषी माना जा रहा है. सबसे बड़ी गलती है कि जब बढ़ी संख्या में मजदूरों की अपने गांव में वापसी हो रही थी तब गांव में प्रवेश के पूर्व उनकी जाँच करने वाले कहाँ सो रहे थे. निर्देशों के अनुसार बाहर से आने वाले हर व्यक्ति को गांव के बाहर क्वारंटाइन सेंटर में रखा जायेगा तो स्थापित यह सेंटर क्या मात्र कागजो में शोभामय है ओर जमीन पर इन्हे ढूंढना पढ़ेगा. सबसे बढा सवाल है कि हर गांव में सरकारी अमले के रूप में स्वास्थ्य अमले, आंगनवाड़ी, हल्का पटवारी, पुलिस अमले का बीड इंचार्ज सहित ग्राम का मुखिया यानि सरपंच होता है. तो इस भारी भरकम टीम ने बाहर से आने वाले लोगो कि सूची क्यों तैयार नहीं की. जिससे शुरुआत में ही ऐसे लोगो की जाँच संभव हो जाती. 


देखा जाये तो जब जिम्मेदार कोरोना वायरस फैलने की सम्भावना को चुटकी का खेल समझ रहे थे तो निचला अमला भी महज खानापूर्ति में जुटा था. इसे शर्म से डूबने वाला कहेगे कि कथोकर में जो युवक सबसे पहले पॉजिटिव आया. उसने गांव आने के बाद खुलकर कोरोना जश्न मनाया. खबरे आई कि सूरा पार्टी हुई ओर जुआ के फड़ पर बाजीगिरी भी दिखाई. अब इस युवक की पत्नी और हम प्याला के भी वायरस पॉजिटिव होने की खबरे हैं. 

तमाशा जिला अस्पताल का / बिना सिफारिश नहीं लिया जायेगा खून का सेम्पल 
कोरोना के दौर में सरकारी अस्पताल के डॉक्टर्स का अजीब तमाशा प्रकाश में आया है. डॉक्टर उन पीड़ितों को नचा रहे है जो हॉट स्पॉट इंदौर जैसे शहर से अपने गांव लौटने पर बीमार हो गये ओर जागरूकता दिखाते हुए अपना सेम्पल जाँच कराना चाहते है. हाँ अगर आपके पास तगडी सिफारिश हो तो छटपट खून का सेम्पल ले लिया जायेगा. हम नहीं सुधरेंगे कि तर्ज पर इस सनसनीखेज खुलासे में मिली जानकारी अनुसार एक व्यक्ति इंदौर से आकर चार दिन से जिला अस्पताल के चक्कर लगता रहा. जब बिजावर क्षेत्र के विधायक राजेश शुक्ला ने मोबाइल किया तब उसका सेम्पल लिया गया.  


बाहर से आने वाले जो जागरूक है उन्हें डॉक्टर्स ही पॉजिटिव बनाने कि फिराक में है. ऐसा ही गंभीर मामला ग्राम मामोन का है. इंदौर के हॉट स्पॉट एरिया में कार्यरत एक व्यक्ति 16 मई को अपने गांव मामोंन आये. हालांकि इंदौर में बाकायदा उनकी स्क्रीनिंग हुई,  पर गांव आते ही 19 मई को उनकी तबियत ख़राब होना शुरू हुई. 21 मई को जिला अस्पताल में चेकअप कराया तो डॉक्टर ने गोलिया लिख उनसे पीछा छुड़ाने के दो दिन बाद दिखाने को कहा.  

बुखार सर्दी खांसी में आराम नहीं मिलने पर आज 23 मई को यह व्यक्ति फिर जिला अस्पताल पहुचे तो डॉक्टर ने फिर गोलिया लिख दो दिन बाद आने को कह दिया. एक डॉक्टर किस तरह शर्मनाक हरकत कर सकता है कि इस व्यक्ति को डॉक्टर कि सलाह थी कि दो दिन बाद आना फिर जैसा कहोगे वैसा करवा देंगे. अब ये व्यक्ति तो वायरस के प्रति सजग होकर खून जाँच के लिये अस्पताल के चक्कर लगा रहे हैं और डॉक्टर है कि लिफ्ट मारता ही नहीं. 

इस मामले में बिजावर क्षेत्र से विधायक राजेश शुक्ला कि पहल पर इस व्यक्ति का सेम्पल लिया गया है जिसे जाँच हेतु भेजा जायेगा. फैलता वायरस ओर पीड़ितों कि बढ़ती संख्या में इस तरह कि जानबूझकर लापरवाहियां कि जा रही है. अब इसके पीछे क्या मकसद है यह तो गुप्त रोग कि तरह है लेकिन अगर यही ढर्रा चलता रहा तो हालात बेकाबू होने में समय की देर नहीं है.




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