लंबी जिंदगी जीते हैं वे लोग, जिनका जीवनसाथी करता हो सहयोग



        मनोविज्ञान     


आपको जानकर हैरानी होगी कि जीवन साथी के रवैये का भी हमारे जीवन पर बहुत अधिक प्रभाव पड़ता है, जो लोग खुद बहुत आशावादी होते हैं और उन्हें जीवन साथी भी ऐसा ही मिल जाए तो इन लोगों का मष्तिष्क इन्हें लंबी और स्वस्थ्य जीवन जीने में मदद करता है. खास बात यह है कि जितना असर हम पर हमारी अपनी सोच और रवैये का पड़ता है, लगभग उतना ही असर अपने साथी के व्यवहार का भी पड़ता है...


डॉक्टर अरविन्द प्रेमचंद जैन भोपाल

मारे शरीर में रोग के दो स्थान होते हैं, पहला शरीर और दूसरा मन, यदि मन दुखी होता है तो उसका प्रभाव शरीर पर पड़ता है और यदि शरीर दुखी होता है तो उसका प्रभाव मन पर पड़ता है. दोनों एक दूसरे के पूरक हैं. आज मानसिक रोगों का भी प्रादुर्भाव बहुत है, उसका कारण मन में उठने वाले संवेगों पर नियंत्रण न होना और दूसरा हर व्यक्ति दूसरे से अपेक्षा रखता है और अपेक्षा दुःख का कारण होता है, आशा पाश महा दुखदानी. 


परिवार में सुख शांति के मूल में यदि हम एक दूसरे के भावों को आदर देना शुरू करें तथा एक दूसरे को सुनना और जो भी स्थिति हैं उसमें प्रसन्नता की अनुभूति रखना, वर्तमान में जीना और या जा विधि राखे साईंया. 
हमारा व्यवहार और सोच का तरीका इस बात को काफी हद तक निर्धारित करता है कि हम कैसा जीवन जिएंगे, लेकिन आपको जानकर हैरानी होगी कि जीवन साथी के रवैये का भी हमारे जीवन पर बहुत अधिक प्रभाव पड़ता है, जो लोग खुद बहुत आशावादी होते हैं और उन्हें जीवन साथी भी ऐसा ही मिल जाए तो इन लोगों का मष्तिष्क इन्हें लंबी और स्वस्थ्य जीवन जीने में मदद करता है. खास बात यह है कि जितना असर हम पर हमारी अपनी सोच और रवैये का पड़ता है, लगभग उतना ही असर अपने साथी के व्यवहार का भी पड़ता है...


लंबा जीना है तो अपना लें यह आदत
जो लोग लम्बी बीमारी से गुजर रहे हों लेकिन फिर भी सुखद जीवन जीने के लिए प्रयासरत हों, ऐसे लोगों की बीमारी के खिलाफ लड़ाई बहुत आसान हो जाती है. इसलिए अगर आप लंबा और स्वस्थ जीवन जीना चाहते हैं तो आशावादी (पॉजिटिव) सोच को अपनाएं. सबसे अच्छी बात तो यह है कि आशावाद एक दृष्टिकोण हैं, जिसे हम अपने अंदर विकसित कर सकते हैं. 

बढ़ती उम्र के साथ शार्पनेस
जिन लोगों के पास प्रसन्न रहने वाला और आशावादी विचार रखने वाला जीवन साथी होता है, वे लोग बढ़ती उम्र के साथ अधिक खुशमिजाज और तेज़ मष्तिष्क के होने लगते हैं. ऐसा इसलिए होता है क्योंकि इन लोगों की चीजें सीखने और समझने की शक्ति बढ़ती उम्र के साथ कम नहीं होती बल्कि कई मामलों में बढ़ने लगती है.  

खास बात यह भी है कि जो लोग खुद भी खुश रहते हैं और उन्हें जीवन साथी भी ऐसा ही मिला हो तो इनमें बढ़ती उम्र के साथ उस तरह के लक्षण देखने को नहीं मिलते हैं, जिन्हें बुढ़ापे से जोड़कर देखा जाता है. जैसे, चीजें भूलना, लोगों को ना पहचान पाना. 
''क़समें खाईं थी साथ जीने की, जीना मुश्किल बना दिया तूने '' फोटो सौजन्य /रामकुमार वर्मा भोपाल 




ये प्रक्रिया भी हैं सहायक
अगर जीवन की परेशानियों या बीमारियों के कारण आप चाहकर भी खुश नहीं रह पा रहे हैं तो अपनी आहार और जीवन शैली पर ध्यान दें. 
ध्यान /योग आपको सकारात्मक रखने में काफी मददगार साबित हो सकता है. इससे आपको मानसिक शांति और हैपी हॉर्मोन्स का सही लेवल प्राप्त करने में सहायता मिलेगी. 

लोग आशावादी होते हैं वे अपने हर काम को बहुत ही रचनात्मक रूप से करते हैं. इससे उन्हें खुशी मिलती है. इस खुशी के कारण ब्रेन में डोपामाइन और सेराटोनिन जैसे हैपी हॉर्मोन्स का लेवल बढ़ता है, जो इन्हें तनावमुक्त रखने में लंबे समय तक मदद करता है. 

इस प्रकार एक चेन बन जाती है. यानी आप खुश रहेंगे तो आपके ब्रेन में हैपी हॉर्मोन बढ़ेंगे. हैपी हॉर्मोन बढ़ेंगे तो आप लंबे समय तक खुश और तनाव मुक्त रह सकेंगे. इससे बॉडी में ऑक्सीडेशन की क्रिया धीमी होती है और हमारी उम्र लंबी होती है. 

दोनों जीवन साथी के बीच में सकारात्मक सोच हो और प्रसन्न रहने का प्रयास करना चाहिए. जीवन बहुत क्षणिक होता हैं, कोई भी वस्तु स्थायी नहीं हैं और न कोई अपने साथ ले जा सकता हैं या पाता हैं. पर भी मानसिक रूप से संग्रह की प्रवत्ति के कारण असंतोष पैदा होता हैं और उस असंतोष का प्रगटीकरण विवाद, तनाव और झगड़े में परिवर्तित होता हैं. एक बार पति पत्नी में मानसिक दुराव की शुरुआत होना ही विवाद को जन्म देना हैं. जहाँ तक हो एक दूसरे के भावों को पहले आदर दे और जो भी आवश्यकताएं होती हैं वो समय पर होती हैं और वे आपसी तालमेल से संभव होता हैं. आर्थिक तंगी के कारण विवाद होते हैं पर आपकी बचत से ही आप मनोकूल सुविधाएँ प्राप्त कर सकेंगे. 

पारिवारिक जीवन में बिना कारण के विवाद का होना सामान्य बात होती है और यह विवाद व्यक्तिगत रूप से कई दिनों तक चलता है, जिस कारण नकारात्मक वातावरण परिवार में बनने से जीवन दुखद बन जाता है, जिसमें दोनों का योगदान महत्वपूर्ण होता है, इससे बचना चाहिए. 




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