उत्तराखंड की बेटी कर रही भांग की खेती का कारोबार



अभी तक सिर्फ नशे के लिए इस्तेमाल होने वाला भांग कितना उपयोगी हो सकता है, ये आप नम्रता से समझ सकते हैं, तभी तो दिल्ली में रहकर आर्किटेक्ट की पढ़ाई के बाद नम्रता वापस गाँव लौट आयीं और भांग के कई तरह उत्पाद बनाने का स्टार्टअप शुरू कर दिया।



आकाश नागर 

त्तराखंड के पौड़ी गढ़वाल जिले के यमकेश्वर ब्लॉक के कंडवाल गाँव की रहने वाली नम्रता ने हेम्प एग्रोवेंचर्स स्टार्टअप्स शुरू किया है। इसमें उनका साथ दिया उनके पति गौरव दीक्षित और भाई दीपक कंडवाल ने। वे भांग के के बीजों और रेशे से दैनिक उपयोग की वस्तुएं तैयार कर रहे हैं। नम्रता बताती हैं, "भांग का पूरा पौधा बहुपयोगी होता है। इसके बीजों से निकलने वाले तेल से औषधियां बनती हैं। इसके अलावा इससे बहुत सारे उपयोगी सामान भी बनते हैं।"


नम्रता बताती हैं, "हम कागज के लिए पेड़ों को काटते हैं, जबकि भांग चार महीने की फसल होती। चार महीने की इस फसल में आपको इतना फाइबर मिल जाता है, जो हम जंगलों में कई साल पुराने पेड़ों से मिलता है। ये उससे काफी ज्यादा बेहतर भी है। इसके तने से एक बिल्डिंग मटेरियल बनता है, और ये कोई नया इनोवेशन भी नहीं है, ये हमारे यहां पुराने समय होता रहा है। अजंता और एलोरा की गुफाओं में इसी से बना प्लास्टर उपयोग हुआ है। और जो दौलताबाद का किला है, वहां पर भी इसका इस्तेमाल हुआ है। यही नहीं फ्रांस तो इससे बना एक पांच सौ साल पुराना एक पुल भी है।"



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