स्टाकिंग,एकअत्यंत घिनौना अपराध, प्रताड़ित महिलाएं आत्महत्या तक को मजबूर





महिलाओं के प्रति होने वाले अपराधों में स्टाकिंग, वास्तविक पटल एवं आभासी पटल दोनो पर, एक गंभीर एवं मानसिक स्तर पर प्रभावित करने वाला अत्यंत ही घिनौना अपराध है जिसके परिणामस्वरूप कई बार प्रताड़ित व्यक्ति (मुख्यतः महिलाएं) आत्महत्या तक का प्रयास कर लेता है। 




गौतमबुद्ध नगर से देवेंद्र प्रताप

सी कोई व्यवस्था या कोई तंत्र स्थापित करना असम्भव है, जिसमें अपराध पर पूर्ण रूप से नियंत्रण किया जा सके, अतः अपराध से बचाव में सावधानी एवं सुरक्षा महत्वपूर्ण स्थान रखते हैं। महिलाओं के प्रति होने वाले अपराधों में स्टाकिंग, वास्तविक पटल एवं आभासी पटल दोनो पर, एक गंभीर एवं मानसिक स्तर पर प्रभावित करने वाला अत्यंत ही घिनौना अपराध है जिसके परिणामस्वरूप कई बार प्रताड़ित व्यक्ति (मुख्यतः महिलाएं) आत्महत्या तक का प्रयास कर लेता है। इस संदर्भ में हमे यह जानना अत्यंत आवश्यक हो जाता है कि कानून में इस अपराध की सजा के सम्बन्ध में क्या प्रावधान रखे गए हैं एवं अगर हमे कोई स्टॉक कर रहा है तो हमे व्यक्तिगत स्तर पर क्या सावधानी एवं उपाय करने चाहिए।



साइबर वर्ल्ड में बढ़ती असुरक्षा और साइबर अपराधों द्वारा पहुंचने वाली मानसिक प्रताड़ना भी अत्यंत ही गंभीर विषय है। अतः यह आवश्यक हो जाता है कि हम यह जाने कि कानून किस प्रकार के कृत्यों को अपराधों की श्रेणी में रखता है, तथा इस प्रकार के अपराध के लिए क्या सज़ा है। आज इस पोस्ट के माध्यम से बताना चाहूंगा कि स्टाकिंग अर्थात किसी का लगातार पीछा कर प्रताड़ित करने के अपराध को कानून किस प्रकार परिभाषित करता है तथा सज़ा के क्या प्रावधान हैं।

सेक्शन 354D भारतीय दण्ड संहिता 1860 स्टाकिंग 
कोई भी पुरुष जो कि किसी महिला का पीछा करता है और संपर्क करता है, या महिला के बार बार अनिच्छा जताने पर भी व्यक्तिगत संवाद या संपर्क स्थापित करने के उद्देश्य से संपर्क करता है या महिला द्वारा प्रयोग में लाये जा रहे सोशल मीडिया पेजेज, इंटरनेट, ईमेल या अन्य किसी भी प्रकार के एलेक्ट्रोनिक संवाद माध्यम को मॉनिटर करता है, वह स्टाकिंग करने का अपराधी माना जाता है।

अगर अभियुक्त यह सिद्ध कर पाता है कि इस प्रकार का व्यवहार वह अपराध पर नज़र रखने और उससे बचाव के उद्देश्य से कर रहा है और इसे यह जिम्मेदारी सरकारी तंत्र द्वारा सौंपी गई है या वह यह व्यवहार किसी व्यक्ति के आदेशानुसार किसी संवैधानिक नियम के अनुरूप कर रहा है उपरोक्त परिस्थितयो में इस प्रकार का व्यवहार उचित एवं न्यायसंगत माना जायेगा। (इस धारा के अंतर्गत स्वयं को निरपराधी सिद्ध करने का उत्तरदायित्व पूर्णतः अभियुक्त पर होता है)

कोई भी पुरुष जो इस प्रकार के अपराध में लिप्त पाया जाता है उसे प्रथम बार अपराधी साबित होने पर अधिकतम 3 वर्ष के कैद और साथ में फाइन की सजाऔर दूसरी या अधिक बार संलग्न पाये जाने की स्थिति में अधिकतम 5 वर्ष तक की सजा के साथ फाइन का प्रावधान है।

कानून में सजा का प्रावधान अपराध घटित होने के पश्चात की प्रक्रिया है, परंतु अपराध घटित हो जाने के दुष्प्रभाव सामाजिक एवं मानसिक स्तर पर अपनी छाप छोड़ जाते हैं जिससे उभर पाना अत्यंत ही कठिन एवं दीर्घकालिक है। 



अगर आपको प्रतीत होता है कि कोई आप पर लगातार नज़र बनाये हुए है, आपका पीछा करता है, आपके पल पल के क्रियाकलापो को वह देख रहा है तो तुरन्त अपने करीबी एवं परिवार के विश्वसनीय सदस्यों को त इस प्रकार की किसी घटना या व्यवहार से अवगत कराएं, ताकि वक़्त रहते बचाव किया जा सके।

टेक्नोलॉजी और सोशल नेटवर्क के बढ़ते प्रयोग ने स्टाकिंग को अधिक आसान एवं अधिक नुकसानदेह भी बना दिया है। आप अपने पल पल का स्टेटस अपडेट जब सोशल मीडिया पर करते हैं, आप अपनी कोई तस्वीर पोस्ट करते है, आप अपने परिवार के सदस्यों की जानकारी सार्वजनिक करते हैं तो वह प्रत्येक व्यक्ति, जिसे थोड़ी बहुत भी इंटरनेट और सोशल मीडिया प्लेटफार्म की जानकारी है, को सुगमता से उपलब्ध हो जाती है। इन दिनों मोबाइल फ़ोन पर ही सरलता से चलाये जा सकने वाले फ़ोटो एडिटिंग एप्प्स भी उपलब्ध है अतः आपकी तस्वीरों को आसानी से कोई भी अपराधी मॉर्फ़ कर सकता है। वह आपके साथ की गई साधारण सी दिखने वाली चैट में भी एडिटिंग के द्वारा आसानी से हेर फेर कर सकता है। अतः सावधानी बरतें एवं उन्ही व्यक्तियों को अपने साथ जोड़े जिन पर आप विश्वास कर सकें, साथ ही ख्याल रखे कि जोड़ने वाले व्यक्ति की इतनी जानकारी तो आप अवश्य रखें कि वह किस जगह से सम्बंध रखता है, ताकि उसके मन में एक भय इस संदर्भ में भी बना रहे।

अपराघी अक्सर इस बात का फायदा उठाते है कि आप शर्म में या किसी अपराधबोध में या भय में किसी को उसके इस आपराधिक कृत्य के बारे में नही बताएंगे, और वह अपराध करते रहते हैं, परंतु ऐसा नही है परिवार एवं सच्चे मित्र सदैव आपका प्रथम सुरक्षा चक्र होते हैं एवं सबसे मजबूत भी अतः ऐसे किसी व्यवहार की संभावना पर भी तुरंत अपने परिवार एवं सबसे करीबी विश्वसनीय मित्रों को सूचित करें, बिना किसी भय के, वह आपके सबसे बड़े शुभचिंतक है, वही आपको सही मायनों में सशक्त करते हैं।

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1 comments:

  1. आज के सायबर वर्ल्ड में ऐसी सजगपूर्ण आलेख की सख्त जरूरत है।बहुत ही सार्थक व ज्ञानवर्धक आलेख।

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