तुम हो पल पल मेरे साथ


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सुनो,
ये कदम बढ़ ही गये है
तुम्हारी ओर..
अब यहाँ से मेरा लौटना असंभव है.
एक दिन बादलों की ओट से ताकती बिजली
धम्म से आ गिरी थी मेरे आँगन में
और मेरा बना बनाया रेगिस्तान
पल में ही समेटकर ले गई थी अपने साथ..!
तुमने मुस्कुराकर देखा और
बूँदों का सैलाब उमड़ आया मुझ में
लोगों को कैसे समझाती मैं कि
आँसू का एक अर्थ कृतज्ञता भी होता है..!
न जाने वो कौन सा देश था ?
जहाँ मैं बो आई थी कुछ कंवारे सपने..!
और यह रंगबिरंगी तितलियां क्यूँ लहराने लगी है मेरी आँखों में ?
मेरे मन का मेघधनु भी तो
अब ब्रम्ह वृत्त बनकर फैल गया है
जीवन में.
रंगों के बीच बेरंगी दुनिया की कल्पना भी
अब मैं नहीं कर सकती
जीवन के सभी रंगों को समेटे तुम
केवल मुस्कुरा रहे हो ..केवल मुस्कुरा रहे हो..
तुम्हारी यही मुस्कुराहट ही
मुझे प्रोत्साहित करती है मुस्कुराने के लिये..!
मैं बहुत ही आश्वस्त हूँ कि अब तुम हो ..
तुम हो..पल पल मेरे साथ..!
- भावना भट्ट     




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1 comments:

  1. आपकी आभारी हूँ आदरणीय संपादक जी

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