भोपाल-इंदौर एक्सप्रेस वे पर ब्रेक की जनहितैषी खबर को जनता के मीडिया सोशल मीडिया पर वह जगह नहीं मिली जो मिलना थी



एक्सप्रेस-वे की कोई आवश्यकता थी ही नहीं. हालांकि सरकार ने माली हालात का हवाला देकर इसे रोका है, लेकिन कारण कोई भी रहा हो, यह निर्णय जनता के हक़ में गया है. इस जनहितैषी खबर को जनता के मीडिया सोशल मीडिया पर वह जगह जो मिलना चाहिए थी, नहीं मिलना निराश करता है. आखिर अच्छे कार्यों के लिए सराहना तो की जानी चाहिए.   



सुनील शुक्ला    

भोपाल-इंदौर ग्रीन फील्ड एक्सप्रेस-वे प्रोजेक्ट पर भले ही खाली खजाने ने ब्रेक लगा दिया हो, लेकिन यह आम जनता की जेब हलकी होने से बच गई है. यह निर्णय कमलनाथ सरकार का एक बेहद सराहनीय निर्णय है. इस निर्णय के लिए जितनी भी सराहना की जाए कम होगी, लेकिन इस खबर को जनता के मीडिया में जैसी जगह मिलना थी, नहीं मिलना निराश करती है.    


कोई भी ऐसे काम जनता की जेब पर भारी पड़ते हैं. वास्तव में इस एक्सप्रेस-वे की कोई आवश्यकता थी ही नहीं. हालांकि सरकार ने माली हालात का हवाला देकर इसे रोका है, लेकिन कारण कोई भी रहा हो, यह निर्णय जनता के हक़ में गया है. 

सरकार का मानना है कि इस प्रोजेक्ट पर 5 हजार करोड़ से ज्यादा राशि खर्च होगी. वर्तमान में सरकार की माली हालात ऐसी नहीं है कि इतनी बड़ी राशि इस प्रोजेक्ट पर खर्च की जाए. अब सरकार वर्तमान भोपाल-इंदौर रोड को ही सिक्सलेन में बदलेगी, इस पर काफी कम खर्च आयेगा. इस निर्णय से आम जनका की खून पसीने की कमाई, एक बड़ी राशि अपव्यय होने से बच गई है.   





Share on Google Plus

News Digital India 18

पाठकों के सुझाव सदा हमारे लिए महत्वपूर्ण है ..

0 comments:

Post a Comment

abc abc