जहरीली हवा और सोता शहर




मध्यप्रदेश की राजधानी को ताल-तलैयों और शैल-शिखरों का शहर कहा जाता है, लेकिन एक रिपोर्ट ने न केवल चौंकाया है, अपितु चेतावनी भी दी है कि संभल जाओ, नहीं तो यहां भी फॉग के स्थान पर स्मॉग ही दिखाई देगा और यह शहर रहने लायक नहीं बचेगा। असल में सोमवार को भोपाल देश में 11वां सर्वाधिक प्रदूषित शहर रहा है, जबकि अभी तक तो हम यही मानकर चल रहे थे कि यह शहर पूरी तरह से सुरक्षित है। अब यह मिथक भी टूटता दिख रहा है।   



संजय सक्सेना         

जी हां, सोमवार को भोपाल देश में 11वां सर्वाधिक प्रदूषित शहर रहा। और यहां एम्बिएंट एयर क् वालिटी इंडेक्स 241 पर पहुंच गया है, जबकि सांस लेने योग्य शुद्ध हवा के लिए इसे 50 से कम होना चाहिए। खबर के अनुसार सोमवार को दिनभर सड़कों पर चलने वाले लोग सांस लेने के तकलीफ और थकावट महसूस करते रहे। बच्चों, बुजुर्गों और अस्थमेटिक एलर्जी से पीडि़त लोगों को बेचैनी का अहसास हुआ। 


केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की देशभर के 200 शहरों की निगरानी रिपोर्ट के अनुसार दिल्ली-एनसीआर, हावड़ा और पश्चिमी उत्तर प्रदेश, लखनऊ, मेरठ, मुरादाबाद के बाद भोपाल देश में सर्वाधिक प्रदूषित शहर रहा। सोमवार को भोपाल के प्रदूषण का स्तर मध्यप्रदेश में मंडीदीप, देवास और रतलाम के औद्योगिक इलाकों से भी अधिक दर्ज हुआ।

कहा जा रहा है कि इस मौजूदा प्रदूषण का बहुत बड़ा कारण शहर के ऊपर पिछले 48 घंटे से छाए कम ऊंचाई वाले बादल हैं, जो न तो पानी बरसा रहे हैं, ना ही शहरभर में निकलने वाले धुएं को आसमान में फैलने दे रहे हैं। हवा की गति थमी हुई है, इस कारण बीते दो दिन से हमारा शहर अस्थाई रूप से प्राकृतिक गैस चैंबर बन गया है। रविवार सुबह से ही एम्बिएंट एयर क्वालिटी इंडेक्स बढऩे से हवा का प्रदूषण बढऩे लगा था, रविवार-सोमवार की दरम्यानी रात 2 बजे के बाद एयर क्वालिटी इंडेक्स 200 पार हो गया था, इसके बाद से ही यह लगातार इससे अधिक बना हुआ है। अभी तो शहर के आसमान पर बादल छाये हुए हैं, तो यह हाल बन गया है, लेकिन यदि हम नहीं संभले तो हमारे इस शहर का हाल भी दिल्ली जैसा ही हो जााएगा।

भोपाल अपनी प्राकृ़तिक सुंदरता के लिए जाना जाता है। ताल-तलैयों का शहर रहा है, लेकिन आधे से अधिक तालाब तो हम लील चुके हैं। उन्हें खत्म करते जा रहे हैं। बड़ा तालाब, जिसके नाम पर कहावत ही बन गई थी-ताल तो भोपाल ताल बाकी सब तलैयां.., लेकिन वह आधा भी नहीं बचा है। तालाब के अंदर ही मेडिकल कालेज और दर्जनों अस्पताल बना लिए गए और शासन-प्रशासन न केवल मूक दर्शक बना रहा, अपितु उनका संरक्षक ही बना हुआ है। जंगलों को तेजी से खत्म करते हुए कांक्रीट के जंगल बनाए जा रहे हैं। पहाडिय़ों पर लगातार विस्फोट और निर्माण हो रहे हैं। पुनर्घनत्वीकरण और स्मार्ट शहर के नाम पर इसकी प्राकृतिक सुंदरता को उजाड़ कर इसे नर्क बनाया जा रहा है। यह तमगा नहीं है, विडम्बना है। चुनौती है, चेतावनी है। सरकार और स्थानीय प्रशासन में भी लगता है धृतराष्ट्र बैठ गए हैं, जिन्हें पैसे के सामने कुछ नहीं दिखाई दे रहा है। और यहां के लोग हैं कि नींद से जाग ही नहीं पा रहे हैं। 


सबसे बड़ी कमजोरी यहां के सुप्त और उदासीन नागरिक ही हैं, जिसके कारण यह शहर प्रदूषित शहरों की कतार में जा खड़ा हो गया है। शहर का विकास जिस तेजी से हो रहा है, उससे अधिक तेजी से यहां प्रदूषण बढ़ रहा है। धूल का हाल तो यह है कि यह शहर ही जर्दा, पर्दा और गर्दा का कहा जाता है। इसके आगे एक शब्द और है, जिसका उल्लेख करना ठीक नहीं, लेकिन लगता है, यहां रहने वालों के लिए वह शब्द उचित ही है। खैर..। अभी भी समय है। हमें पर्यावरण की सुरक्षा को लेकर कुछ करना होगा। दिल्ली की तर्ज पर आड ईवन की नौबत न आए, इसलिए वाहनों पर भी नियंत्रण करना होगा। पहाडिय़ों पर तो सबसे अधिक सरकारी भवन ही बनाए गए हैं और बनाए जा रहे हैं। अब पहाडिय़ों और जंगलों पर सरकार थोड़ा रहम करे। सबसे पहले तो इस पर ही रोक लगाना होगी। एक नहीं, अनेक सख्त कदम उठाने होंगे, तब जाकर यह शहर रहने लायक बचेगा। सबसे आवश्यक तो शहर के नागरिकों में चेतना जागृत होना ही है।

हम उस दिल्ली का अनुसरण करते दिख रहे हैं, जहां की हवा दिवाली से पहले बेहद खतरनाक होनेवाली है। पिछले 2 दिनों में पंजाब और हरियाणा में खेतों में पराली जलाने की घटनाओं में तेजी से इजाफा हुआ है। दिवाली के बाद इसमें और ज्यादा बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है। अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा के सैटलाइट डेटा के अनुसार पिछले 2 दिनों में पराली जलाने की घटनाएं कुछ दिन पहले के मुकाबले दोगुनी हो गई हैं। वहां की हवा रहने लायक नहीं बची है। आए दिन स्मॉग छा जाता है। लोगों में बीमारियां बढ़ रही हैं। अस्थमा तो अब आम हो गया है। यही हाल भोपाल का न हो, इसके लिए जागना होगा। हम जिन जन प्रतिनिधियों को आंख बंद करके चुन रहे हैं, वही हमारी आंखों में धूल झोक रहे हैं। काश हम अब भी समझ जाएं।




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