केन्द्रीय दल ने जिले में अतिवृष्टि से प्रभावित फसलों को देखा, 70 फीसदी से अधिक फसलें अतिवृष्टि से तबाह पाई गईं




खण्डवा जिले में गत दिनों अतिवृष्टि से हुई खरीफ फसल क्षति के आकलन के लिए भारत सरकार के अधिकारियों के अंतर्विभागीय दल ने मंगलवार को पुनासा तहसील के विभिन्न ग्रामों का दौरा कर अतिवर्षा के कारण क्षतिग्रस्त हुई फसलों की जानकारी ली. केन्द्रीय दल ने जिले में अतिवृष्टि से प्रभावित फसलों को देखा, 70 फीसदी से अधिक फसलें अतिवृष्टि से तबाह पाई गईं. 
- मयंक शर्मा की रिपोर्ट

केन्द्रीय दल ने जिले में ग्राम सुलगांव, नेतनगांव, मथेला व करेली ग्रामों में खेतों में जाकर क्षतिग्रस्त फसलों को देखा. इस दौरान उपसंचालक कृषि श्री गुप्ता ने बताया कि जिले में खरीफ फसल के दौरान सोयाबीन 188168 हेक्टेयर क्षेत्र में बोई गई थी, जिसमें से अतिवर्षा के कारण 158193 हेक्टेयर क्षेत्र में फसल प्रभावित हुई. लगभग 1.12 लाख किसानों की सोयाबीन फसल अतिवर्षा के कारण क्षतिग्रस्त हुई है. इसी तरह कपास की फसल 63151 हेक्टेयर क्षेत्र में बोई गई थी, जिसमें से अतिवर्षा के कारण 58151 हेक्टेयर क्षेत्र में फसल प्रभावित हुई. लगभग 34745 किसानों की कपास फसल अतिवर्षा के कारण क्षतिग्रस्त हुई है. मक्का की फसल 34123 हेक्टेयर क्षेत्र में बोई गई थी, जिसमें से अतिवर्षा के कारण 25566 हेक्टेयर क्षेत्र में फसल प्रभावित हुई. लगभग 20411 किसानों की मक्का फसल अतिवर्षा के कारण क्षतिग्रस्त हुई है. मूंग, उड़द इत्यादि की फसल 25192 हेक्टेयर क्षेत्र में बोई गई थी, जिसमें से अतिवर्षा के कारण 13409 हेक्टेयर क्षेत्र में फसल प्रभावित हुई. लगभग 9413 किसानों की मूंग,उड़द इत्यादि फसल अतिवर्षा के कारण क्षतिग्रस्त हुई है.


केन्द्रीय दल के सदस्यों ने किसान से चर्चा कर अतिवृष्टि से प्रभावित फसलों के कारण किसानों को हुए नुकसान की जानकारी ली. इस दौरान कलेक्टर तन्वी सुन्द्रियाल, पुलिस अधीक्षक, शिवदयाल सिंह, एसडीएम पुनासा  ममता खेड़े, उप संचालक कृषि आर.एस. गुप्ता सहित विभिन्न अधिकारी मौजूद थे. 

भारत सरकार के अधिकारियों के इस अंतर्विभागीय दल में गृह विभाग भारत सरकार नई दिल्ली के संयुक्त सचिव एस.के. शाही, वित्त मंत्रालय  के व्यय विभाग के निर्देशक  अमरनाथ सिंह एवं ऊर्जा मंत्रालय  के सहायक संचालक सुमित गोयल शामिल थे. भारत सरकार के अधिकारियों ने ओंकारेश्वर ज्योर्तिलिंग मंदिर परिसर में संचालित विकास कार्यों का भी जायजा लिया.

केन्द्रीय दल के सदस्यों ने ग्राम सुलगांव में किसान लखन मालवीय के खेतों में जाकर दल ने कपास की क्षतिग्रस्त फसल देखी. यहाँ उपस्थित किसान लखन ने कहा कि वर्षा अधिक होने से उसका उत्पादन तो कम हुआ ही है, साथ ही फसल की गुणवत्ता भी खराब होने से उसे काफी नुकसान हुआ है, क्योंकि बाजार में उसकी फसल का मूल्य काफी कम मिलेगा. लखन ने बताया कि लगातार पानी बरसने से उसने जो कीटनाशक फसलों पर कीटों से रक्षा के लिए छिड़काव किया था वह बह गया, जिससे कपास की फसल में इल्ली व सफेद मक्खी तक के प्रकोप से काफी नुकसान हुआ है. लखन ने बताया कि लगभग 15-20 दिन तक लगातार वर्षा होने से कपास की फसल की जड़े सड़ गई है.

कलेक्टर श्रीमती सुन्द्रियाल ने इस दौरान  अधिकारियों को बताया कि लगातार वर्षा होने से किसानों को दो तरफा नुकसान हुआ, जहां एक और किसानों की फसल की गुणवत्ता खराब होने के कारण फसल का मूल्य उन्हें अच्छा नही मिलेगा, वही दूसरी और फसल उत्पादन की मात्रा भी काफी घट गई है.

ग्राम मथेला के किसान राजकुमार ने भारत सरकार के अधिकारियों के दल को बताया कि 2 एकड़ क्षेत्र में उसने मक्का लगाया था, जिसमें मात्र 5 से 7 क्विंटल उत्पादन होगा. जबकि इसी खेत में गत वर्ष 50 क्विंटल से अधिक उत्पादन हुआ था. किसान राजकुमार ने इस दौरान अपने सोयाबीन के खेत में भी अतिवृष्टि से हुई फसल क्षति भारत सरकार के अधिकारियों के दल को दिखाई. उप संचालक कृषि  आर.एस. गुप्ता ने इस दौरान बताया कि आर्मीवार्म के प्रकोप के कारण इस बरसात में फसलों को काफी नुकसान हुआ है. वर्षा के कारण कीटनाशक का प्रभाव शून्य रहा, इससे फसलों को काफी क्षति हुई.

ग्राम नेतनगांव में किसान राधेश्याम मालवीय के कपास के खेत में भी  दल ने जाकर फसल क्षति का जायजा लिया. राधेश्याम ने बताया कि सफेद मक्खी के प्रकोप से कपास की गुणवत्ता बिल्कुल खराब हो गई है. सफेद मक्खी से निपटने के लिए जो कीटनाशक का छिड़काव 2-3 बार किया था वह बेकार गया, क्योंकि लगातार पानी बरसने के कारण फसलों पर कीटनाशक टिक नही सका. नेतनगांव के ही श्रीराम ने वर्षा के कारण कपास में जड़ सड़न से हुए नुकसान के बारे में दल को बताया और कहा कि गत वर्ष की तुलना में इस वर्ष कपास का उत्पादन मात्र 10 प्रतिशत ही हुआ है.



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