बच्चे, जिनके जीवन में भी अमावस्या है, के बीच मनाई पितृमोक्ष अमावस्या



बेतवा के घाट पर ऐसे बच्चे, जिनके जीवन में भी अमावस्या ही है, पूर्णिमा का चांद नहीं, के बीच सफल शिक्षा समिति ने पितृमोक्ष अमावस्या मनाई. समिति का मानना है किसी भी हाल में बच्चे इस हालत में नहीं छोड़े जाने चाहिए. 
- दृष्टि चित्रांश 

आज पितृमोक्ष अमावस्या के अवसर पर जहाँ सब अपने घरों में कार्यक्रम रख रहे हैं. पितरों के लिए ब्राह्मणों को भोजन करा रहे हैं. वहीं विदिशा में सफल शिक्षा समिति सदस्य आज सुबह से ही बेतवा के घाट पर पहुंचे. और भिक्षावृत्ति करते बच्चों के साथ उनके बीच पितृमोक्ष अमावस्या मनाई. 


समिति के मनोज सोनी बताते हैं इनमें से अधिकतर बच्चों को पिछले तीन साल में समिति शिक्षा से जोड़ चुकी है. बाहर से आये बच्चों को जो स्कूल जाते हैं. आज ऐसे बच्चो को कॉपी पेन देकर पढ़ने के लिए प्रेरित किया. आज के इस प्रयास में चाइल्ड लाइन विदिशा की समर्पित टीम, बाल कल्याण समिति से संजीव जैन और महिला बाल विकास केंद्र से अनुज जैन प्रमुख रूप से उपस्थित थे. 

श्री सोनी का कहना है कि सार यही है कि बच्चे माता-पिता की आर्थिक स्थिति से जुड़े हुए होते हैं. माता-पिता के साथ ये भी भिक्षावृत्ति और बालश्रम में लग जाते हैं, क्योंकि जितने ज्यादा हाथ और सदस्य काम करेंगे उतना ही इनको खाने पीने का सामान मिलेगा. हमारा प्रयास यही था कि इन बच्चों के साथ निरन्तर संपर्क में रहा जाए और इन्हें इन परिस्थितियों में भी शिक्षा से जोड़ा जाए. 

श्री सोनी का कहना है कि जब तक माता-पिता के हालात नहीं बदलेंगे, कोई भी कानून बना लीजिए, स्थिति नहीं बदलने वाली. माता-पिता को अगर आप सजा देंगे, फिर बच्चों को तो भीख मांगना ही है. उन्होंने कहा है हल यही है कि ऐसे बच्चे इनके पास से हटाए जाएँ और रहवासी स्कूलों, छात्रावास में रखा जाए. सरकार ही इनकी जिम्मेदारी ले. किसी भी हाल में बच्चे इस हालत में नहीं छोड़े जाने चाहिए. 






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