बेपटरी सरकार को ले डूबेगी नौकरशाही, विधायक, मंत्री-अफसरों से नाराज



भाजपा भले ही मध्य प्रदेश में 8 माह पुरानी सरकार को नहीं गिराने का ऐलान कर चुकी है। इसके बावजूद ऐसा लग रहा है, सरकार बेपटरी होती जा रही है। इसमें बेलगाम हो चुकी नौकरशाही की बड़ी भूमिका है। विधायक से लेकर कमलनाथ सरकार के मंत्री तक अफसरों के खिलाफ उनकी अनदेखी करने, मनमर्जी से काम कर फैसला लेने की शिकायत कर चुके हैं।



राम मोहन चौकसे   

हकारिता मंत्री गोविंद सिंह, महिला एवं बाल विकास मंत्री इमरती देवी ने अफसरों पर खुलकर आरोप लगाए हैं। इमरती देवी नाराजगी के चलते एक एस डी एम को हटवा चुकी है। शिक्षा मंत्री प्रभु राम चौधरी अपने विभाग के अधिकारियों की मुख्यमंत्री से शिकायत कर चुके हैं। अगस्त माह के दो घटनाक्रम को देखने से पता चलता है कि मंत्रियों का अधिकारियों से तालमेल नहीं है।डबरा कृषि उपज मंडी की 25 दुकानों का किराया नहीं देने पर एस डी एम जयति सिंह ने दुकानों में ताले डलवा दिए। कुछ दुकानदारों ने किराया चुका दिया। मंत्री इमरती देवी ने दुकानदारों की शिकायत पर चेक दिलवाने की बात की। एसडीएम ब्याज सहित जुर्माना वसूल करना चाह रही थी। इसी बात पर मंत्री इमरती देवी और एस डी एम जयति सिंह में ठन गई। मंत्री ने मुख्य सचिव सुधि रंजन मोहंती से शिकायत कर दी। मुख्य सचिव ने एस डी एम को 24 घंटे में हटा दिया।

सहकारिता मंत्री डॉ गोविंद सिंह ने भिंड में आयोजित एक निजी समारोह में में कहा कि वे भाजपा के शासन काल मे अवैध उत्खनन का विरोध करते रहे। अब अपनी सरकार अवैध उत्खनन रोकने में असफल रही है। अपनी सरकार में मैं हार गया हूँ। इसके लिए जनता मुझे माफ़ करे।डॉ गोविंद सिंह ने चम्बल के आई जी डी पी गुप्ता पर आरोप लगाया कि उनके संरक्षण में अवैध उत्खनन चल रहा है। उन्होंने आईजी को अवैध खनन रोकने के निर्देश दिए थे। 

मंत्री गोविंद सिंह ने यह आरोप भी लगाया कि भिंड जिले में 90 फीसदी अवैध उत्खनन पुलिस अफसरों की शह पर हो रहा है। उन्होंने दावा किया कि भिंड और दतिया क्षेत्र में 5 से 10 करोड़ का नुकसान हो रहा है। रेत उत्खनन के लिए टी आई 50 से 60 लाख रुपये लेता है। यह पैसा ऊपर तक जाता है।

कांग्रेस के राज्यसभा सदस्य विवेक तनखा ने कहा खदानों के संचालन में पारदर्शिता जरूरी है। 80 फीसदी गिट्टी खदानों का धंधा नेताओं की गिरफ्त में हैं। नेता प्रतिपक्ष गोपाल भार्गव का आरोप है अवैध उत्खनन में रसूखदार नेताओं, पुलिस प्रशासन, खनिज विभाग, जिलों के कलेक्टर,एस पी,वरिष्ठ अधिकारी शामिल हैं। प्रतिदिन 100 करोड़ का अवैध उत्खनन हो रहा है। 

बात अवैध उत्खनन और मंत्रियों द्वारा नौकरशाही के हावी होने की शिकायत तक सीमित नहीं है। सरकार पर नौकरशाही के हावी होने का मामला तब उजागर हो गया जब प्रदेश की आई ए एस लाबी ने भोपाल और इंदौर में पुलिस कमिश्नर प्रणाली लागू ही नहीं होने दी। मुख्यमंत्री इसकी शुरुआत करने वाले थे। आईएएस एसोसिएशन ने मुख्यमंत्री से भेंट कर रोक लगवा दी। इधर आईपीएस एसोसिएशन ने भी मुख्यमंत्री से भेंट कर कमिश्नर प्रणाली लागू करने की सिफारिश की है।

नौकरशाही का सरकार पर हावी होने का सबसे बड़ा प्रमाण यह है कि भाजपा के शासन काल में 15 साल तक मलाईदार पदों पर जमे चंद आई एएस, आईपीएस सहित अन्य अधिकारी कांग्रेस की सरकार में अंगद के पांव की तरह जमे हैं। भाजपा शासनकाल में कांग्रेस इन्ही अधिकारियों पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाती थी। परिवहन, जनसंपर्क,राजधानी परियोजना,खनिज,कृषि तथा खाद्य विभाग में ऐसे अधिकारी काबिज हैं।नौकरशाही का एक और नमूना सामने आया है। भोपाल आईजी योगेश देशमुख ने बिना अनुमति प्रदर्शन करने पर बड़ा जुर्माना वसूल करने का फरमान सुना दिया है। मंत्री पीसी शर्मा, गोविंद सिंह, विधायक कुणाल चौधरी ने इस फरमान का कड़ा विरोध जताया है। दरअसल भाजपा के पूर्व विधायक सुरेंद्र सिंह ने 20 अगस्त को भोपाल में एक साथ 12 जगह सरकार के खिलाफ प्रदर्शन किया था। आई जी योगेश देशमुख ने बिना अनुमति प्रदर्शन करने तथा जरूरी काम छोड़कर कानून व्यवस्था लगाने में हुए खर्च को जोड़कर पूर्व विधायक सुरेंद्र सिंह पर 23 लाख 76 हजार रुपये का जुर्माना भरने का प्रस्ताव कलेक्टर को भिजवा दिया है। पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान सहित भाजपा के नेता जुर्माने का विरोध कर चुके हैं। 

कांग्रेस सरकार के आठ माह के कार्यकाल में नौकरशाही ने मनमानी के कई नमूने पेश किए हैं। मप्र में हुए अधिकारियों, कर्मचरियों के थोकबंद तबादले,एक ही कर्मचारी के चार माह में छह बार तबादले, सलकनपुर ट्रस्ट का अध्यक्ष नियुक्त कर निरस्त करने,जनसंपर्क विभाग की कई समितियां बनाकर चंद घंटे में निरस्त करने, धमकी के बाद कम्प्यूटर बाबा को नदी न्यास का मंत्री दर्जा प्राप्त अध्यक्ष बनाने जैसे आधा दर्जन मामले है। यह फैसले नौकरशाही के चलते लिए गए और सरकार की किरकिरी के कारण बने। बेलगाम नौकरशाही पर लगाम नहीं लगाई गई तो नौकरशाही सरकार को ले डूबेगी। 

@ लेखक मप्र के वरिष्ठ एवं शासन द्वारा अधिमान्य पत्रकार हैं.

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