प्राची वर्मा, डांस नहीं आसान, यह है बालमन को बचाने और उसे उड़ने देना का एक खुला आसमान



कुछ ही देर की बात होती है, जब हम घुल-मिल जाते हैं
हमको चॉकलेट मिलती है, और हम बातों में आ जाते हैं. 
भोपाल की प्राची वर्मा डांस के जरिए दे रही बाल शोषण के खिलाफ लड़ने और इससे बचने का संदेश

हते हैं कला दुनिया में एक ऐसी भाषा है, जिसमें व्यक्ति बिना कुछ बोलकर सिर्फ अपनी कला के माध्यम से ही सब कुछ कह देता है. उसमें बात हो जब डांस की तो फिर क्या कहने, आजकल हर कोई नाच ही रहा है, कोई किसी रियलिटी शो में तो कोई अपने बॉस के अनुसार तो सार जनता सरकार के इशारों पर. इस डांस की बदौलत न जाने क्या-क्या हो रहा है. चलो अब आते है मुद्दें पर. हम बात कर रहे भोपाल शहर की प्राची वर्मा के बारे में-


इन्होंने डांस से कौउनो खिताब तो नहीं जीता, लेकिन यह खुद में ही एक उपलब्धि है, क्योंकि यह अपने डांस के माध्यम से इस समय के सबसे बड़े और संवेदनशील मुद्दे बाल शोषण जैसे मुद्दों को अपने एकल अभिनय (शोलो एक्ट) के माध्यम से एक कहानी के रूप में रखती हैं. 

यूनिसेफ से फेलोशिप कर चुकी प्राची अभी एमए कर रही हैं, लेकिन उनके बालमन में यह मुद्दा कई दिनों से कुलबुला रहा था, जिसको उन्होंने अपनी फेलोशिप के समय शब्दों में बांधकर एक एक्ट का रूप दिया और अब इसे यह भोपाल समेत कई जगह अभिनय कर लोगों को जागरूक कर रही हैं. नीचे दिए लिंक पर देख सकते हैं-

इस एक्ट में यह अपने घर-परिवार के ही किसी व्यक्ति द्वारा शोषित बच्चे के मन पर बीतने वाले दर्द को अपने डांस के माध्यम से दिखाती हैं, साथ ही लोगों को यह भी बताने का प्रयास करती हैं कि किस तरह हम न सिर्फ इस समस्या से बच सकते हैं, बल्कि समय आने पर इसका मुकाबला भी कर सकते हैं. 


एक्ट के अंत में वो एक कविता के माध्यम से बहुत ही चौकस ढंग से अपनी बात प्रस्तुत करती हैं, इस कविता की कुछ लाइन-

कुछ ही देर की बात होती है, जब हम घुल-मिल जाते हैं
हमको चॉकलेट मिलती है, और हम बातों में आ जाते हैं.
यह लोग हर कहीं हैं
जहां विश्वास है और जहां बचपन भी है,
वही खेल रहा है दिमाग से, और हम फंस जाते हैं.. 






Share on Google Plus

News Digital India 18

पाठकों के सुझाव सदा हमारे लिए महत्वपूर्ण है ..

0 comments:

Post a Comment

abc abc