बड़ा फैसला, नगरीय निकाय चुनावों में पार्षदों का चुनाव राजनीतिक दलों के टिकट पर नहीं


मध्यप्रदेश के नगरीय निकाय चुनावों में पार्षदों का चुनाव राजनीतिक दलों के टिकट पर नहीं होंगे। यानि पार्षदी का चुनाव लड़ने वालों को अब किसी राजनीतिक दल से टिकट हासिल करने की होड़ से फिलहाल मुक्ति मिल गई है। 

मजेदार बात यह है कि कमलनाथ सरकार के इस निर्णय से ऐसे नेताओं के सामने घोर संकट खड़ा हो गया है जो अपने अपने दलों के आकाओं की मेहरबानी से टिकट हथियाने मे सफल हो जाते थे। चूंकि टिकट हासिल करने के बाद ऐनकेन प्रकारेण पार्टी के सिंबल पर चुनाव भी जीत जाते थे तथा बड़े नेता होने का दंभ भरते थे। जाहिर तौर पर जुगाढ़मेंट मे माहिर नेताओं की बात करें तो सभी दलों मे और बड़ी तादाद में ऐसे जुगाढ़ू नेताओं को कमलनाथ सरकार के इस निर्णय से बड़ी निराशा हाथ लगी है।

जानकारी के मुताबिक इसी तरह से प्रदेश के नगर निगमों के महापौर अथवा नगर पालिकाओं के अध्यक्षों का चुनाव भी अब सीधे जनता से नहीं होंगे। बल्कि अब पार्षद ही महापौर/अध्यक्ष का चुनाव कर सकेंगे। गौरतलब है कि प्रदेश के निकायों के चुने हुए प्रतिनिधियों के कार्यकाल दिसंबर से पहले समाप्त हो जायेंगे, जबकि म.प्र. सरकार के रूख के मुताबिक दिसंबर से पहले प्रदेश के नगरीय निकायों के चुनाव की दूर दूर तक कोई संभावना नहीं दिखाई दे रही है। यद्यपि चुनाव कब तक संपन्न हो पायेंगे, इसको लेकर अभी तक सरकार की ओर से किसी तरह की आधिकारिक घोषणा तो नहीं की जा सकी है। परंतु कयास लगाये जा रहे हैं कि आगामी साल मे अप्रैल से पहले कमलनाथ सरकार किसी भी सूरत में प्रदेश में स्थानीय निकायों के चुनाव कराने की स्थिति में सक्षम नहीं देखी जा रही है। लिहाजा कमलनाथ सरकार यदि किसी तरह से टिकी रही तो प्रदेश मे 15 अप्रैल से 15 मई के बीच स्थानीय निकायों के चुनावों की उम्मीद की जा सकती है।
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News Digital India 18

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