देखना कहीं कुछ गलत न हो जाये, होशंगाबाद अधिकारी विवाद, अच्छा काम करने वाला अधिकारी हर किसी को रास नहीं आता




यह हैं होशंगाबाद कलेक्टर, जिन्होंने अवैध रेत खनन की पिछले 15 सालों में जितनी कार्यवाही नहीं हुईं, उतनी चंद महीने में कर डालीं. क्या यही वह कारण है कि कलेक्टर-एसडीएम मामले को तूल दिया गया. एक बात तो हमेशा ही देखने में आती रही है और बहुत साफ है कि अच्छा काम करने वाला अधिकारी हर किसी को रास नहीं आता. कोई भी कार्यवाही करने के पहले यह अवश्य देखा जाना चाहिए कि कहीं इस मामले को तूल देने के पीछे भी ऐसी ही कोई साज़िश तो नहीं.   
मुकेश अवस्थी / बलभद्र मिश्रा 

अवैध रेत खनन को लेकर होशंगाबाद कलेक्टर शीलेंद्र ने जो कार्यवाही की है, उसमें एक जानकारी के अनुसार अभी तक दो करोड़ से अधिक का राजस्व सरकार के ख़ाते में गया है, वही लगभग चार सौ करोड़ की पेनाल्टी अवैध रेत खनन करने वालों के ख़िलाफ़ लगाई गई है. क्षेत्र में चर्चाओं के अनुसार बस यही एक बात अवैध रेत माफ़िया और कुछ सफ़ेदपोश लोगों को रास नहीं आई. आती भी कैसे करोड़ों का जो नुकसान हो रहा था.



क्षेत्र में आम चर्चा है कि चूँकि शीलेंद्र सिंह के रहते यह पैनाल्टी हट नहीं सकती, अवैध रेत परिवहन करने वाले सौ से अधिक ज़ब्त ट्रक छूट नहीं सकते, तो एसडीएम और कलेक्टर के बीच कार्यशैली को लेकर हुए विवाद को बढ़ा-चढ़ा कर रेत का विवाद बता डाला गया.

मामले में सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि जो दो अलग अलग पार्टियों के नेता एक दूसरे को पानी पीकर पीकर कोसते नहीं थकते, गाली बकते रहते हैं, वे एक होकर चाहते है कि शीलेंद्र सिंह को होशंगाबाद से हटा दिया जाए. हालाँकि पूरे मामले में मुख्यमंत्री को फ़ैसला लेना है, लेकिन यह बहुत जरूरी है कि यह अवश्य देखा जाना चाहिए कि कहीं कोई सुनियोजित ढंग से साज़िश तो नहीं है.

देखना है कि पूरे मामले में सरकार क्या फ़ैसला लेती है, लेकिन एक बात तो हमेशा ही देखने में आती रही है और बहुत साफ है कि अच्छा काम करने वाला अधिकारी हर किसी को रास नहीं आता.





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