ट्रैफिक नियमों का पालन के लिए चालान के साथ कुछ और बातें भी हैं, जिन पर ध्यान दिया जाना आवश्यक है



60 रूपये में ढेर सारा धुँआ देने वाली मोटरसायकिल चालान बनते ही अचानक ही ऑक्सीजन के गोले कैसे देने लगती है, ये रासायनिक क्रिया समझ के बाहर है. बड़े बड़े चालान के बाद आने वाले समय में सब लोग ट्रैफिक नियमों का पालन भी करेंगे और धीरे धीरे ये उनकी आदत में तब्दील हो जायेगा, लेकिन कुछ और बातें भी हैं, जिन पर ध्यान दिया जाना उतना ही आवश्यक है, जितना कि चालान की सोचना. 




सचिन आर पाण्डे 

ड़क पर पुलिस का पहरा बढ़ा है और आज कल चालान कट जाने का भय व्याप्त है. प्रदूषण जांच केंद्रों पर लम्बी लाईन है और लोग लाइसेंस बनवाने के लिए खड़े हैं. चलिए अच्छा है कम से कम सब व्यवस्थित हो जायेगा और थोड़ा सुधार भी देखने को मिलेगा, मुझे लगता है आने वाले समय में सब लोग ट्रैफिक नियमों का पालन भी करेंगे और धीरे धीरे ये उनकी आदत में तब्दील हो जायेगा, लेकिन कुछ और बातें भी हैं, जिन पर ध्यान दिया जाना उतना ही आवश्यक है, जितना कि चालान की सोचना. 


सबसे अच्छी बात ये है कि देश के परिवहन मंत्री को जनता के जान की फ़िक्र है और इसलिए वो बार बार कहते हैं कि हेलमेट लगा लेने से, सीट बेल्ट बांध लेने से और ट्रैफिक नियमों का पालन करने से दुर्घटना कम हो जायेगी और सड़क हादसों में कोई जान नहीं गवायेगा, लेकिन सवाल ये है कि क्या इतना करने मात्र से सब सही हो जायेगा और सड़क दुर्घटनायें कम हो जायेंगी?

कई जगहों पर सड़क की हालत इतनी खस्ता है कि यह कह पाना मुश्किल है कि सड़क में गड्डा है या गड्ढे में सड़क. और खराब सड़क की वजह से दुर्घटना होती है तो क्या उसके लिए सरकार पर उसी अनुपात  में जुर्माना नहीं लगा दिया जाना चाहिए? 

सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद भी राजमार्गो पर शराब की दुकानें खुली पड़ी है तो क्या सरकार की जिम्मेदारी नहीं बनती की उनको बन्द कराया जाये, क्योंकि दुर्घटनाओं का एक बड़ा कारण तो यह भी हैं. 

जब ओवरलोडेड ट्रक को 10 रुपये लेकर चौराहे से निकलने की अनुमति मिल जाती है, तब ख्याल नहीं आता cctv कैमरे का, चालान का, दुर्घटना का? तब फ़िक्र नहीं होती जनता की जान की और उनकी कोई परवाह नहीं होती साहेब को. 

साहब अगर इतनी ही कसक है और इतनी ही फ़िक्र है तो अपने अपने प्रोटोकॉल छोड़ दीजिए और आम इंसान की तरह हिंदुस्तान की सड़कों पर चलना शुरू करिये, तब शायद समस्या भी दिख जायेगी और समाधान भी. 

अगर जनता पर जुर्माना लगाया जा सकता है तो आप को भी अपनी जिम्मेदारी तय करनी पड़ेगी. 
सड़कों के किनारे खुले मदिरालय बन्द करने पड़ेंगे और 10 रूपये वाली वसूली भी छोड़नी पड़ेगी. इतना ही नहीं देश की सड़कों के हालात भी बदलने होंगे. 


60 रूपये में ढेर सारा धुँआ देने वाली मोटरसायकिल चालान बनते ही अचानक ही ऑक्सीजन के गोले कैसे देने लगती है, ये रासायनिक क्रिया समझ के बाहर है. 

इसके बाद एक और महत्वपूर्ण और अंतिम बात वाहन चेकिंग के नाम पर जो अभद्रता खाकी पहने बाबु लोग कर रहे हैं न, उनको अच्छी ट्रेनिंग की जरूरत है. और ये बताने की जरूरत है कि वो जनता के सेवक हैं और उसी अनुरूप व्यवहार करें, अन्यथा इस देश की जनता ने बड़ी बड़ी हुकूमत को उखाड़ फेंकने की सामर्थ्य का प्रदर्शन कई बार किया है, हो सकता है अगला नम्बर आपका हो और आप 70 साल फिर से वनवास चले जाएँ. 

ये लोकतंत्र है यहां राजा भी जनता है और सत्ता भी जनता. ध्यान रहे जो भी इनके हित के विरूद्ध काम करेगा आने वाले समय में सत्ता से बाहर कर दिया जायेगा. 




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