सीवर सफाई में कुछ लाखों की मशीनों से परहेज़, 'स्वच्छ भारत अभियान' केवल मंत्रियों, नेताओं, अधिकारियों के लिए बना फोटो सेशन




इस बच्चे ने शवगृह में लाश पर से चादर खिसकाई और करुण आवाज में कहा 'पापा' और फफक पड़ा. फिर बेसुध होकर गिर पड़ा. उसने कहा 'पापा उठो' पर उसे कहाँ यह पता था कि पापा अब कभी नहीं उठेंगे. 

बीते शुक्रवार को दिल्ली के एक सीवर को बिना मास्क के साफ करते हुए उसका पिता 'शव' में बदल गया. उसे हमेशा के लिए अकेला छोड़कर. घर में केवल एकमात्र वही कमाने वाला था. 

अरबों रुपयों का बजट 'स्वच्छ भारत अभियान' में मात्र सड़क पर झाड़ू लगाकर खर्च करने वाला ये देश, सीवर सफाई में कुछ लाखों की मशीनों से परहेज़ कर रहा है. 

यही कहा जाएगा आज 'स्वच्छ भारत अभियान' केवल मंत्रियों, नेताओं, अधिकारियों के लिए फोटो सेशन भर रह गया है. धरातल से कोई मतलब नहीं है इसका. 

हम सभी इस बच्चे के आंसुओं का बोझ कैसे उठाएंगे. कल तक तो हम सभी इस बात को भूल भी जायेंगे. दिल को झकझोर देती है यह घटना. आवाज आती है काश देश की गद्दी पर बैठे लोग गरीबॉन की हालत समझ पाते..... काश... एक आंदोलन हो गरीबों के लिये?

HT के संवाददाता का ट्वीट है कि इस परिवार की हालत यह है कि शव की अंतिम क्रिया के लिए भी इनके पास पैसे तक नहीं थे. 



खबर सोशल मीडिया यूजर श्री अनुराग त्यागी जी की फेसबुक वाल से 



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