जनप्रतिनिधियों की अनदेखी से कलोनी में बाढ़ जैसे हालात


नगर की कालोनियों में नगरपालिका के जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों की अनदेखी की वजह से बारिश के दिनों में कम बारिश होने पर भी बाढ़ जैसी स्थिति दिखने लगती है और छोटे बच्चों को भी घुटने से भरे पानी से होकर स्कूल जाने मजबूर हैं, जबकि यहां पर बने मकानों से नगर पालिका कर भी वसूल रही है, लेकिन सुविधाओं के नाम पर कालोनीवासियों को सिर्फ ठेंगा ही मिल है. वहीं अगर बात की जाए तो जनप्रतिनिधियों के द्वारा चुनाव के समय यहां पर पहुंच लोगों को मतदाता सूची में जुड़वाकर सिर्फ वोट पाने तक कि लालसा रहती है, उसके बाद यहां की समस्याओं से नगरपालिका अध्यक्ष और अधिकारियों को कुछ लेना देना नही होता, भले ही वह कितनी स्थितियों में रहें. 
नारायण मिश्रा की रिपोर्ट 

सिहोरा / खितौला के बीच वार्ड नं 12 में बनी कलोनी में बारिश के दिनों पानी भरने से यहां के निवासियों सहित नौनिहाल स्कूली बच्चों को भारी मुसीबतों का सामना करते हुए रास्ते पर भरे घुटने से पानी से होकर स्कूल या अपनी जरूरतों के लिए निकलना पड़ रहा है, लेकिन नगर पालिका अध्यक्ष सहित कोई पार्षद या जनप्रतिनिधि समस्या को जानने के बाद भी विगत कई वर्षों से न तो सड़क, नाली बनबा पाया है और न ही कोई कारगर इंतजाम कर पाए हैं, जिसका खामियाजा कालोनी वासी भर रहे हैं. 

ज्ञात हो कि लगभग सभी मकानों के डायवर्शन हो चुके हैं. वहीं नगरपालिका के द्वारा बीते सालों में जिन वार्डों में नाली पहले से थी उन्ही को तोड़कर पुनः निर्माण कराया गया और कुछ रंगमंच आदि के ही निर्माण हुए हैं, जबकि सिहोरा नगर विकास के नाम पर अधूरा ही रहा है, जिसमे नगर पालिका का कभी ध्यान नही गया. वहीं इसी वर्ष नगर में पेयजल की कुछ वार्डो में भीषण समस्या थी.

पहले भी हुआ है विरोध
वार्ड नं 12 की इस कलोनी की बात की जाए तो चुनाव के समय भी यहां के रहने वाले लोगों ने बैनर लगाकर "रोड नही, तो वोट नही" की बात बोलकर विरोध किया था, जिसके बाद भी नगर पालिका के प्रतिनिधियों के कान में जूं तक नही रेंगी है, जिसकी वजह से हालात जस के तस बने हुए हैं.

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