रानू ने उसे गले लगा लिया, लेकिन यूजर्स नहीं छोड़ रहे, खूब कर रहे छीछालेदार


''सुख के सब साथी, दुःख में ना कोई.. जीवन आणि जानी छाया, झूंठी माया, झूंठी काया... फिर काहे को साड़ी उमरिया, पाप की गठरी ढोई...'' गीत अवश्य हम सभी ने सुना है, लेकिन उस पर ध्यान नहीं देते. 

हाल में सोशल मीडिया की ताकत से भीख मांग कर गुजारा करने वाली रानू मंडल पर भगवान् की कृपा जम कर बरसी. 'एक प्यार का नग्मा है' गीत ने रानू की जिन्दगी ही बदल कर रख दी. ऐसे में जो रानू के सगे थे, दुःख में दूर हो गए थे, वापिस लौटने लगे हैं. इन्हीं में एक उनकी अपनी बेटी भी है, हालांकि रानू ने उसे गले लगा लिया है, लेकिन समाज, सोशल मीडिया यूजर्स उन्हें नहीं छोड़ रहे. यूजर्स बेटी की खूब छीछालेदार कर रहे हैं. सुख-दुःख आते जाते रहते हैं हमें अपनों को कभी नहीं छोड़ना चाहिए. हम समझते हैं बेटी भी सोच तो अवश्य रही होगी, मन ही मन पश्चाताप भी कर रही होगी, कि उसने अपनी मां के साथ सही नहीं किया. हम भी इस बात से सीख लें, ताकि पश्चाताप में न जलना पड़े. 

यह#रानू मंडल  की बेटी है, जो 8 साल से#रानू मंडल  के साथ नहीं रहती थी, क्योंकि उसकी माँ बूढ़ी हो गई थी. वह देखने में भी अच्छी नहीं लगती थी. इस कारण से,#रानू मंडल न चाहते हुए भी रेलवे स्टेशन पर भीख माँगने और गाने के लिए मजबूर थी, लेकिन फिलहाल सोशल मीडिया की अनोखी ताकत के कारण#रानू मंडल  मशहूर हो गयी. 

अब यह देखते हुए कि#रानू मंडल मशहूर हो गई है. उसके पास बड़े बड़े ऑफ़र आ रहे हैं. उसकी बेटी अपनी माँ के पास वापिस लौट आई है. अब बेटी का अपनी माँ के प्रति प्रेम जागृत हो गया है. इसे लेकर उसी सोशल मीडिया पर बेटी की खूब छीछालेदार हो रही है. 

यूजर्स लिख रहे हैं इस तरह के बच्चों का न होना बेहतर है, जो बुरे समय में माता-पिता के साथ नहीं रहते हैं और उन्हें भीख मांगने के लिए मजबूर करते हैं. 

कोई लिख रहा है मां से नहीं पैसों से प्यार है उसको, तो कोई बागवान की तरह करना चाहिए लिख रहा है.


Share on Google Plus

News Digital India 18

पाठकों के सुझाव सदा हमारे लिए महत्वपूर्ण है ..

0 comments:

Post a Comment

abc abc