बनारस के दूसरे कबीर बिस्मिल्‍लाह खान, उन्हें पता था कि पिया की पाती आ गयी है


बनारस में अमिताभ बच्‍चन देखा, रानी मुखरजी देखा, एश्‍वरया देखा, मनमोहन देखा, प्रणव मुखरजी देखा, सोनिया देखा, राहुल देखा, मोदी देखा, जाने कितने बड़े बड़े सूरमा देखा, लेकिन बनारस के दूसरे कबीर बिस्मिल्‍लाह खान की बात कुछ जुदा थी. 




शरद दीक्षित  

क बार बनारस के दूसरे कबीर बिस्मिल्‍लाह खान के जन्मदिन पर जी न्यूज के बनारस के तत्कालीन संवाददाता कवरेज के दौरान कह बैठे कि उस्ताद जरा शहनाई मुंह से लगा लीजिए विजुअलवा बन जाये. उस्ताद छत पर पत्रकारों की मछली मंडी से गरमाये थे. कहा एक करोड़ है. सुर आता है. फिर मुंह बिचका कर चिढ़ाते हुये बोले... अईईईईईईईयाईईईईई... शहनाई बजवायेगे. 

पत्रकारो ने पूछा कि विश्वनाथ मंदिर में शहनाई बजाते थे आप. याद आती है. कहा आज भी मंदिर की तरफ मुंह करके बजा लेता हूं. 2006 में आज ही के दिन भोर में उनका शरीर छूटा था. निधन से चंद घंटों पहले मिले पंडित विकास महाराज ने बताया था कि वो 'जागि परि मैं तो पिया के जगाये' गुनगुना रहे थे. उन्हें पता था कि पिया की पाती आ गयी है. देह पिंजर खाली होने वाला है. उनके निधन पर सहारा समय पर लाइव के लिए पंहुचे पंडित छ्न्नूलाल मिश्र ने कहा. के राजेश. हमरे मरै पे अतना दिखावल जाई. मेरी किस्मत थी कि उस्ताद के चरणों में बैठकर तस्वीर खिंचाने को मिली. 

मेरे दिल में मरहूम फकीर के लिए बहुत श्रद्धा है. मुझे वो नहीं पहचानते थे, पर याद करता हूं तो लगता है कि कोई अजीज मुझे छोड़कर चला गया. उस्ताद को 13 वीं पुण्यतिथि पर नमन.


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