बुरी फंसी मोदी सरकार, नागालैंड को अलग पासपोर्ट, अलग झंडे का अधिकार, यह खबर सही नहीं है


केंद्र की मोदी सरकार ने नागालैंड राज्य के लिए अलग पासपोर्ट और अलग झंडा मंजूर कर दिया है. अब हमें अपने ही देश में नागालैंड जाना है, तो पासपोर्ट जरुरी होगा. यह खबर सोशल मीडिया पर लम्बे समय से वायरल हो रही है. हाल के कश्मीर में धारा 370 के खात्मे के बाद यह खबर और तेजी से वायरल हो रही है. मोदी सरकार पर दोमुंहा काम करने की बातें की जा रही हैं, लेकिन यह सच नहीं है. देखिये फिर सच क्या है ?? 

5 जून 2019 को फेसबुक पर ‘सच सबसे आगे’ नामक एक यूजर द्वारा एक पोस्ट साझा किया गया है. पोस्ट में ‘The Live TV’ का एक वीडियो साझा किया गया है. वीडियो में दावा किया गया है कि, केंद्र की मोदी सरकार ने नागालैंड राज्य के लिए अलग पासपोर्ट और अलग झंडा मंजूर कर दिया है. अब हमें अपने ही देश में नागालैंड जाना है, तो पासपोर्ट जरुरी होगा. पोस्ट के विवरण में लिखा है कि बुरी फंसी मोदी सरकार, मोदी सरकार ने नागालैंड को दिया अलग पासपोर्ट, अलग झंडे का अधिकार.

इस पोस्ट व्दारा किया गया दावा स्पष्ट है. तो आइये जानते है इस दावे की सच्चाई. सबसे पहले हमने पोस्ट में साझा दावे को 'की वर्ड्स' बनाकर गूगल किया तो हमें जो परिणाम मिले, वह आप नीचे देख सकते है.

इस सर्च परिणाम से हमें ‘Imphal Times’ समाचार वेबसाइट द्वारा 25 जून 2019 को प्रसारित एक खबर मिली. इस खबर में कहा गया है कि, उत्तर-पूर्व के कई समाचार प्रकाशनों ने यह खबर दी है कि, भारत सरकार तथा नेशनल सोशलिस्ट कौंसिल ऑफ़ नागालैंड (NSCN-IM) के बीच शुरू शांति वार्ता ख़त्म होने की कगार पर है, क्योंकि भारत सरकार ने NSCN-IM द्वारा रखी गई सभी 8 मांगे मंजूर कर ली है, जिसमे नागालैंड के लिए अलग पासपोर्ट व अलग झंडे की मांगे शामिल है.

इसके अलावा हमें ‘e-pao’ नामक समाचार वेबसाइट पर भी इसी तरह की दूसरी खबर मिली. इस खबर में भी कहा गया है कि, उत्तर-पूर्वी राज्यों के अख़बारों में इस तरह की ख़बरें प्रकाशित हो रही है कि, भारत सरकार ने NSCN-IM द्वारा रखी गई सभी 8 मांगे मंजूर कर ली है, जिसमे नागालैंड के लिए अलग पासपोर्ट व अलग झंडे की मांगे शामिल है.

यह दोनों खबरों का एक एक शब्द समान है. दोनों ने खबर का कोई पुख्ता या आधिकारिक स्रोत नहीं लिखा है. इसके अलावा मुख्य धारा के किसी अख़बार या समाचार एजेंसी द्वारा प्रकाशित इस तरह की कोई खबर हमें नहीं मिली.

तब हमने इस खबर के पीछे की कहानी ढूंढ निकाली. अलग अलग की वर्ड्स के साथ गूगल सर्च करने से हमें पता चला कि, NSCN-IM और भारत सरकार के बीच एक ‘framework agreement’ पर 3 अगस्त 2015 को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के निवासस्थान पर हस्ताक्षर किये गए थे. पीएमओ इंडिया के यू-ट्यूब चैनल पर इसका वीडियो 3 अगस्त 2015 को अपलोड किया गया था. आप यह वीडियो नीचे  देख सकते है. 



इस ‘framework agreement’ को सरकार ने गुप्त रखा है. इसके बाद 2016 में कांग्रेस ने आरोप लगाया कि, सरकार ने नागालैंड के लिए अलग पासपोर्ट व अलग झंडे की मांग को मंजूर किया है. 13 जुलाई 2016 को ‘इंडियन एक्सप्रेस’ द्वारा इस सन्दर्भ में एक खबर प्रसारित की गई थी.

30 जनवरी 2016 को ‘हिंदुस्तान टाइम्स’ द्वारा एक खबर प्रसारित की गई थी. खबर में सूत्रों के हवाले से लिखा गया है कि, जब ‘framework agreement’ को अंतिम रूप दिया जायेगा तब नागालैंड को अलग पासपोर्ट व अलग झंडा मंजूर किये जाने की सम्भावना है.

22 जून 2016 को तत्कालीन गृह राज्यमंत्री किरेन रिजीजू ने एक ट्वीट द्वारा इस बात से इंकार किया था कि, भारत सरकार ने नागालैंड के लिए अलग पासपोर्ट व अलग झंडे को मंजूरी दे दी है.
15 मार्च 2018 को राज्यसभा में डी. पी. त्रिपाठी द्वारा ‘framework agreement’ के सन्दर्भ में प्रश्न पूछा गया था. इस प्रश्न के उत्तर में तत्कालीन गृह राज्यमंत्री किरेन रिजीजू ने कहा था कि, अभी इस करार के डिटेल्स जारी नहीं किये जा सकते. PIB द्वारा एक प्रेस रिलीज़ में इसकी जानकारी दी गई थी.

19 जुलाई 2019 को ‘द हिन्दू’ द्वारा एक खबर प्रसारित की गई. इस खबर में कहा गया है कि, सरकार ने ‘framework agreement’ के बारे में संसदीय समिति को जानकारी दी है. इस जानकारी में कहा गया है कि, नागा समूह की अलग संस्कृति व पहचान बनाये रखने के लिए नागालैंड को विशेष दर्जा देने पर सहमती हुई है. लेकिन अलग पासपोर्ट या अलग झंडे जैसे किसी प्रावधान का जिक्र इस खबर में नहीं है.

हमने लोकसभा की वेबसाइट पर चेक किया कि, क्या नागालैंड के सन्दर्भ में कोई सुधार विधेयक पेश किया जाने वाला है, लेकिन हमें ऐसे किसी विधेयक के बारे में जानकारी नहीं मिली.
अतः इस संशोधन से यह बात स्पष्ट होती है कि, भारत सरकार द्वारा नागालैंड को अलग पासपोर्ट या अलग झंडा मंजूर किये जाने सम्बन्धी कोई जानकारी पब्लिक डोमेन में उपलब्ध नहीं है. यह खबर सोशल मीडिया पर 2016 से चल रही है, और लोकसभा के चुनाव ख़त्म होने पर उसे और हवा दी जा रही है. 2016 में इस खबर का संज्ञान लेकर सरकार की तरफ से तत्कालीन गृह राज्यमंत्री किरेन रिजीजू ने इस बात से इंकार किया था. मुख्यधारा की मीडिया ने यह ख़बरें तो दी है कि, नागालैंड को अलग पासपोर्ट व अलग झंडा मंजूर किया जा सकता है, लेकिन अभी तक इस मुद्दे पर कोई निर्णय नहीं हुआ है, क्योंकि ‘framework agreement’ को अंतिम रूप दिया जाना अभी बाकि है. इसलिए, उपरोक्त वीडियो में किया गया दावा गलत है.

जांच का परिणाम : इस संशोधन से यह स्पष्ट होता है कि, उपरोक्त पोस्ट के वीडियो में किया गया दावा कि मोदी सरकार ने नागालैंड को दिया अलग पासपोर्ट, अलग झंडे का अधिकार. सरासर गलत है. सरकार द्वारा अभी तक ऐसी कोई घोषणा नहीं की गई है. 

मूल पोस्ट यहाँ देखें – ‘सच सबसे आगे’  

विश्वसनीय जागरूक नागरिक श्री सतेन्द्रनाथ श्रीवास्तव की फेसबुक वाल से प्राप्त जानकारी के बाद by  https://www.factcrescendo.com 

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