ख़फ़ा हूँ ज़िंदगी तुझसे, पर



खफ़ा हूँ जिंदगी तुझसे, पर इतनी नहीं हूँ
बिखरी नहीं हूँ पर थोड़ी सिमट गई हूं मैं

उड़ा ले  चला था मगरूर झोंका हवा का ज़िन्दगी
दौर दर्द का चलता पर, बिखरी नही हूं मैं...

बेशक  तन्हा थी सफर में तुम बिन 
लड़खड़ाई ज़रूर पर थमी  नहीं हूँ मैं.. 

बदलते देखा है, लोगों को वक्त बेवक्त
पर वक्त के साथ, आज भी बदली नहीं हूँ मैं... 

ख़फ़ा  हूँ ज़िन्दगी तुझसे,पर इतनी नहीं हूँ 
दर्द की राहों में बेशक मुश्किल है मंज़िल का पता #स्वरा

चल रही है  धड़कनें मगर हारी नहीं हूँ मैं.. 
ख़फ़ा हूँ ज़िन्दगी तुझसे,पर इतनी नहीं हूँ 

संभाला  अक्सर हर दर्द हर  ठोकर पर खुद को
बेशक थकी हूँ पर घबराई नही हूँ मैं.. 

ख़फ़ा  हूँ ज़िंदगी तुझसे, पर इतनी नहीं हूँ.. 
ख्वाहिशों की पगडंडियों  पर  खड़े होते रहेंगे

बेशक सपनों के महल ख़्वाब देखती हूँ 
पर सोई नहीं हूँ मैं.. 

रख ज़िंदादिली तू हरदम  अपने में ए दिल
 खुद में अंगार  हूँ पर ज़लज़ला नहीं हूं मैं.. 

खफ़ा हूँ ज़िंदगी तुझसे,पर इतनी नहीं हूँ..

- सुरेखा अग्रवाल 'स्वरा'

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