दूध नहीं जहर पीता है इंडिया, मेलामाइन जहर अन्य देशों में प्रतिबंधित हमारे देश में उपयोगी कैसे?


दूध जैसी चीज में मेलामाइन जैसा घातक रसायन. हद ही हो गई बच्चों तक के जीवन के साथ खिलबाड़? जो रसायन अन्य देशों में प्रतिबंधित होते हैं वे हमारे भारत में उपयोगी होते हैं, हरित क्रांति के कारण रसायनो का उपयोग बढ़ा और रसायनों से मौत होना शुरू हुआ, जबकि इसके पहले अन्न के अभाव में मौत होती थी. इसी प्रकार श्वेत क्रांति के नाम पर जहरीला दूध मिलने लगा. अब पिंक क्रांति यानी मांस निर्यात के कारण जहरीला मांस दिया जा रहा है. आबादी के कारण मांग और प्रदाय का अंतर को पूरा करने घृणित कारोबार जारी है.



डॉक्टर अरविन्द प्रेमचंद जैन भोपाल 

विज्ञान अभिशाप भी है और वरदान भी, पर वर्तमान में हम इसका दुरूपयोग अधिक करके श्रष्टि का नुकसान करने के लिए कटिबद्ध हैं और जब तक मानव स्वयं मौत के मुँह में नहीं समाया जायेगा तब तक इसका उपयोग जारी रहेगा. जो रसायन किसी भी रूप में मानव के खाद्य में उपयोगी नहीं है, उसका उपयोग हमारे वैज्ञानिक और जानकार दुरूपयोग करके रुग्ण नस्ल बनाने में योगदान दे रहे हैं. 

मेलामाइन का इस्तेमाल खाद्य पदार्थों में किये जाने की सूचना के बीच संयुक्त राष्ट्र की खाद्य मानक इकाई कोडेक्स एलमेन्टेरियस कमीशन ने शिशुओं के लिए तैयार किए जाने वाले मिल्क पाउडर और अन्य आहार में तथा पशुओं के आहार में मेलामाइन के उपयोग को लेकर नये दिशा-निर्देश जारी किए हैं, हालांकि कोई भी देश इन दिशा निर्देशों को लागू करने के लिए कानूनी रूप से बाध्य नहीं होगा. 

विश्व स्वास्थ्य संगठन [डब्ल्यूएचओ] की एक नयी रिपोर्ट के अनुसार संयुक्त राष्ट्र की खाद्य मानक इकाई कोडेक्स एलमेन्टेरियस कमीशन के नये दिशा निर्देशों के अनुसार शिशुओं के लिए तैयार किए जाने वाले मिल्क पाउडर में मेलामाइन की मात्रा प्रतिकिलो में एक मिलीग्राम और अन्य आहार तथा पशुओं के लिए इस रसायन की मात्रा 2.5 मिलीग्राम प्रति किलो से अधिक नहीं होनी चाहिये.

संदूषित पदार्थ पर बनी कोडेक्स समिति के अध्यक्ष मार्टजिन वेइजटेंस ने इस संबंध में कहा कि मेलामाइन का अधिकतम स्तर निर्धारित करने से सरकार को कम मात्रा में अपरिहार्य मेलामाइन का इस्तेमाल और जानबूझ कर की गयी मिलावट के बीच अंतर समक्षने में मदद मिलेगी और इससे अंतरराष्ट्रीय व्यापार में अनावश्यक बाधा पैदा किये बिना जन स्वास्थ्य को सुरक्षित किया जा सकेगा. उन्होंने कहा कि हालांकि कोई भी देश इन नये दिशा निर्देशों को लागू करने के लिए कानूनी रूप से बाध्य नहीं होगा. 

मेलामाइन एक प्रकार का रासायनिक पदार्थ है जिसका इस्तेमाल प्लास्टिक बनाने सहित औद्योगिक प्रक्रिया में किया जाता है. इसका इस्तेमाल क्राकरी बनाने, केन कोटिंग और निशान लगाने आदि में भी होता है. न चाहते हुए भी इसके कुछ अंश भोजन के साथ हमारे शरीर में चले जाते हैं जो हमारे स्वास्थ्य के लिए हानिकारक होते हैं. गैलेक्सी कैंसर संस्थान के प्रमुख डा. अरुण गोयल ने बताया कि हमारे यहां मेलामाइन का इस्तेमाल क्राकरी आदि के बनाने में किया जाता है और मेलामाइन क्राकरी में जब हम भोजन करते हैं तो न चाहते हुए भी इसके कुछ अंश हमारे शरीर में चले जाते हैं.

लंबे समय तक इसका इस्तेमाल करने से यह स्वास्थ्य के लिए खतरा बन सकता है. इससे मुख्य रूप से मूत्राशय क्षतिग्रस्त हो जाता है और कभी-कभी मूत्राशय कैंसर होने का खतरा भी हो जाता है. केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया शिशुओं के लिए तैयार किए जाने वाले मिल्क पाउडर और अन्य आहारों में मेलामाइन मिलाये जाने के बारे में वैसे अभी तक कोई भी शिकायत नहीं मिली है अगर कोई शिकायत आती है तो उसकी पूरी जांच की जायेगी. 

मेलामाइन सफेद क्रिस्टल के रूप में आने वाला एक कैमिकल है. इसका इस्तेमाल प्लास्टिक, बर्तन बनाने और व्हाइट बोर्ड वगैरा बनाने में किया जाता है. इससे खासतौर पर किडनी की दिक्कत पैदा होती है. सन 2008 में चीन के मेलामाइन मिले मिल्क पाउडर के चलते कई बच्चों की मौत हो गई थी.

कितना खतरनाक है यह
विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्लूएचओ) का कहना है कि मेलामाइन का सीधा इंसानों पर तो प्रयोग नहीं किया गया मगर हां जानवरों का इसका परीक्षण किया गया है. उन नतीजों के आधार पर यह अंदाजा लगा सकते हैं कि इंसानों को इससे क्या नुकसान होता है. मेलामाइन बॉडी में जाने के बाद क्रिस्टल की शक्ल ले सकता है, जिसके चलते किडनी और मूत्राश्य में पथरी का खतरा पैदा होता है. ये छोटे छोटे क्रिस्टल किडनी की ट्यूब को बंद कर सकते हैं, जिसके चलते पेशाब बनना ही बंद हो सकता है और किडनी फेल हो सकती है. कुछ मामलों में मौत भी हो सकती है.

2008 का चीनी दूध कांड
सन 2008 में चीन में बनने वाले बच्चों के मिल्क पाउडर में मेलामाइन की मिलावट सामने आई थी. दूध में ज्यादा प्रोटीन दिखाने की मंशा से इसे पाउडर में मिलाया गया था. इस कांड से करीब तीन लाख बच्चे प्रभावित हुए थे और किडनी में पथरी व किडनी के फेल हो जाने के चलते कुछ बच्चों की मौत तक हो गई थी. दरअसल 16 जुलाई 2008 को यह बात तब सामने आई जब चीन के एक प्रांत में 16 बच्चों में लगभग एक ही समय पर किडनी में पथरी पता चली. इसके चलते चीन के दूध पाउडर पर रोक लगा दी गई थी. मिल्क प्रोडक्ट्स में मेलामाइन की मिलावट की खबर सामने आने के बाद चॉकलेट बनाने वाली कंपनी कैडबरी ने चीन में उसकी फैक्ट्रियों में बनी चॉकलेट को बाजार से वापस मंगा लिया था.

2007 पालतू जानवरों की मौत
चीन से आने वाले व्हीट ग्लूटेन और चावल के प्रोटीन में मेलामाइन पाया गया. दरअसल इन चीजों से अमेरिका में पालतू जानवरों के लिए खाना तैयार किया जाता था. इस खाने को खाकर बड़ी संख्या में कुत्ते और बिल्लियों की मौत हो गई. उनकी मौत की वजह थी किडनी का फेल होना.

जो रसायन अन्य देशों में प्रतिबंधित होते हैं वे हमारे भारत में उपयोगी होते हैं, हरित क्रांति के कारण रसायनो का उपयोग बढ़ा और रसायनों से मौत होना शुरू हुआ, जबकि इसके पहले अन्न के अभाव में मौत होती थी. इसी प्रकार श्वेत क्रांति के नाम पर जहरीला दूध मिलने लगा. अब पिंक क्रांति यानी मांस निर्यात के कारण जहरीला मांस दिया जा रहा है. आबादी के कारण मांग और प्रदाय का अंतर को पूरा करने घृणित कारोबार जारी है. 

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