झुर्रियों से बेपनाह इश्क कीजिए जनाब, समय से पहले बूढ़ा देखने की इतनी जल्दी क्यों?



''आजकल देख रही हूँ यह old face app कुछ ज़्यादा ही लोकप्रिय हो रहा है और लोग दहशत में. समझ नहीं आ रहा कि आखिर खुद को उम्र से पहले बूढ़ा देखने की जल्दी क्यों? और देखने के बाद इतनी दहशत क्यों?''

यह बुढापा दिखाने वाले app से क्यों डरना? जिंदगी के चार पड़ाव हैं और चारों अपनी अपनी जगह अलग, सही हैं. इंसान की मासूमियत अल्हड़ता हो या उसका गम्भीर लबादा ओढ़े यौवन. बड़ी छोटी परेशानियों से जूझता उसका समय, परिस्थितियों से लड़ आगे बढ़ती उम्र, जो  झुर्रियों में अलग ही अनुभव देकर हमें बहुत कुछ सिखा जाती है. उम्र हर पड़ाव पर एक नया सबक सिखा जाती है. फिर उससे कैसा ख़ौफ़. जिसे आना है वह अपने नियत समय पर दस्तक जरूर देगा हम चाहें या न चाहें. बस एक आग्रह जितने भी पल हैं खुलकर मुस्कुराकर खुश होकर जियें. जाना तो है ही एक दिन, यह शाश्वत औऱ अकाट्य सत्य है.

उम्र की मासूमियत से यौवन के मनभावन श्रृंगार और जोश से औऱ चेहरे पर उम्र के साथ पड़ी झुर्रियों से बेपनाह इश्क कीजिए. अपने आप से प्यार कीजिए तभी समझ सकेंगे आप इश्क है क्या? स्त्री पुरुष के प्रेम को इश्क समझने की भुल न करे. वह किसी से भी कभी भी किसी भी  उम्र में हो सकता है. वह फिर मानसिक हो या भौतिक.  

कल से मेरा बेटा मुझसे एक गहन सवाल कर रहा है कि माँ यह प्यार क्या होता है औऱ अगर यह होता भी है तो क्यों है? जवाब नहीं था मेरे पास, क्योंकि वह अभी उम्र के उस पड़ाव पर है, जहाँ उसे कुछ भी समझाओ नहीं समझ पाएगा. अनुभ कुछ भी नही है. अभी हम ही उसकी दुनियाँ हैं. यारी दोस्ती पढ़ाई से फुर्सत पा कर वह हमारे पास ही पहुँचता है. सीमित दुनिया. 

खैर हम आप जिस भी पड़ाव पर हैं, वह बेशक सीखने का तो नहीं पर अनुभवों को बांटने के कगार का है तो बस वही बाँटते रहें. इस महामूर्ख app के चक्कर में न पड़ें. कुछ चीजें साथ नहीं देतीं, एक एक कर सब छूट जाते हैं, साथ रहते हैं तो उम्र और उसके अनुभव. 

जब भी पिछला  दौर याद करें अपने घर के सबसे विश्वास पात्र जगह पर जाइए. एक सच्चा दोस्त जिसे हम आईना कहते हैं, मुस्कुराता हुआ मिलेगा, जो आपको आपकी बाल्यावस्था से लेकर जहां आप खड़े हो वहाँ तक की सच्ची तस्वीर दिखलाएगा, जो आप आंतरिक रूप से हैं, वह भी औऱ दिखावे के कुत्रिम व्यक्तित्व ओढा हुआ लबादा भी. क्या देखा? 

मुझे तो उम्र की महीन लकीरों के साथ बालों में चांदी भी दिखाई दे रही है. साथ में एक निश्चित निश्छल मुस्कान भी, जो किसी  से भी नहीं डरती. 
यह भी उम्र का ही दिया हुआ तोहफ़ा है कि अब मैं किसी से नही डरती.

सुबह उठें तो मुस्कुराकर उठें और उस परमपिता को धन्यवाद दें कि आपके साथ आपके हमकदम हमसफ़र औऱ आपके अपने संगी साथी सकुशल हैं. 
आज है, तो उम्र है और जब तक उम्र है, तब तक हम हैं. 

अंत में एक गीत
जीवन चलने का नाम 
चलते रहो सुबह शाम
अरे रेरे रे उस बुढ़ापे वाले app को मारिए न गोली..

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News Digital India 18

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