ज़िन्दगी के अनेक रंग


ज़िन्दगी 
तेरे अनेक रंग देखे
अपने अनेक रंगों से 
तू कभी लुभाती है 
कभी रुलाती है.

सुनते थे,
कि संसार एक मायाजाल है,
परन्तु 'मायाजाल' का 
तात्पर्य समझ नहीं पाती थी.

बढ़ती आयु के साथ-साथ 
बहुत कुछ समझ आने लगा है,
शब्दों के अर्थ बदल जाते हैं,
छोटी-छोटी बातों में 
हम ख़ुशियाँ ढूँढने लगते हैं.
ख़ुशियों के रंग और 
ढंग भी तो बदल जाते हैं.
ऐ ज़िन्दगी

जब तक तेरे अर्थ 
समझ आने लगते हैं,
बहुत देर हो जाती है..
- उषा कस्तूरिया 



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