विदा हो जाओ बच्चो


रहनुमाओं की चिंताओं में तुम शामिल नहीं हो
उन्हें कोई फ़र्क नहीं पड़ता तुम्हारे होने न होने से





सुरेन्द्र रघुवंशी, अशोकनगर

च्चों ! तुम बीमारी से मरो या भुखमरी से
सुविधाविहीन अस्पतालों में अपर्याप्त उपचार से मरो
मरो कुपोषण से कंकाल बनकर
अथवा महामारी में मर जाओ 
बड़ी तादात में एक साथ
तुम ज़िंदा रहो या मत रहो
रहनुमाओं की चिंताओं में तुम शामिल नहीं हो
उन्हें कोई फ़र्क नहीं पड़ता तुम्हारे होने न होने से

तुम्हारे मर जाने से गिर नहीं जाएगी
पूर्ण बहुमत की सशक्त सरकार
मंत्रियों के बंगलों के फूल मुर्झा नहीं जाएंगे
उनके चार चांद की चमक में नहीं आ जायेगी कोई कमी

तुम्हारे पालकों को पता होना चाहिए
बंगलों और छप्परों में पैदा होने वाले बच्चों में फ़र्क 
व्यवस्था के खेत में खरपतवार से ज्यादा नहीं हो तुम

इसलिए बिलखती हुई मांओं की गोद में
रोते-रोते आँखे बंद करके
इस यातना गृह से विदा हो जाओ बच्चो !
अभी समंदर को और खारा होना है

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News Digital India 18

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