बेरोजगारी के चिंताजनक आंकड़े


किसानों को पेंशन का क्या औचित्य है, यह तो नहीं पूछा जा सकता, लेकिन यह जरूर पूछा जा सकता है कि युवाओं को बेरोजगारी भत्ता देने की योजना क्यों लागू नहीं की जा रही है? जब सबको पैसा ही बांटना है तो बेरोजगार क्यों वंचित हैं?



संजय सक्सेना 

चुनाव में बेरोजगारी को मुद्दा बनाने का प्रयास किया गया था, लेकिन राष्ट्रवाद पर कोई हावी नहीं हो पाया। अब नई सरकार बन चुकी है, तो फिर से ऐसे मुद्दे सामने आने लगे हैं, जो सीधे जनता से जुड़े हैं। चुनाव में तो भाजपा चिल्लाती रही कि हमने देश की आर्थिक स्थिति सुधारी है, लेकिन कल जब आंकड़े आए तो आंखें खुली रह गईं। देश में न केवल विकास दर गिरी, अपितु हमारा आर्थिक ढांचा पूरा बिगड़ गया है। बेरोजगारी का प्रतिशत भी ऊपर जा रहा है, जो काफी चिंता की बात है। 

भारत की मार्च तिमाही की जीडीपी 5.8 प्रतिशत पर आ गई है। शुक्रवार को जो सरकारी आंकड़े जारी हुए हैं, उनके अनुसार जनवरी से मार्च की जीडीपी पिछले पांच साल में सबसे कम है। यही नहीं इस रिपोर्ट में माना गया है कि बेरोजगारी की दर 6.1 प्रतिशत हो गई है। शहरों में बेरोजग़ारी की दर 7.8 प्रतिशत है. जबकि गांवों में 5.3 प्रतिशत है। यह औसत आंकड़ा है लेकिन अलग-अलग देखने पर स्थिति भयावह नजऱ आती है। गांवों में जो बेरोजग़ारी है उसका हमें अंदाज़ा भी नहीं है। ये और बात है कि बेरोजग़ारी मुद्दा नहीं है फिर भी चूंकि रिपोर्ट में लिखा है तो जिक्र ज़रूरी हो जाता है। 

बेरोजग़ारी का आंकड़ा औसत रूप में तो 6.1 लगता है मगर रिपोर्ट का डिटेल देखने पर स्थिति और भयंकर नजऱ आती है। 2011-12 में गांवों में 15 से 29 साल के युवाओं में बेरोजग़ारी 5 प्रतिशत थी. 2017-18 में गांवों में लड़कों के बीच बेरोजग़ारी बढ़कर 17.4 प्रतिशत हो गई। 2011-12 में गांवों में 15 से 29 साल की लड़कियों में बेरोजग़ारी 4.8 प्रतिशत थी. 2017-18 में बेरोजग़ारी बढ़कर 13.6 प्रतिशत हो गई। इसी तरह अगर आप शहरों में लड़के और लड़कियों में बेरोजग़ारी की दर देखेंगे तो तस्वीर विस्फोटक नजऱ आएगी। शहरी युवाओं में बेरोजग़ारी की दर 2004-04 और 2011-12 में 7.5 और 8.8 प्रतिशत के बीच रही है। 2017-18 में 18.7 प्रतिशत बेरोजग़ारी की दर हो गई। 2004-5, 2011-12 के बीच शहरी लड़कियों में बेरोजग़ारी दर 13.1 और 14.9 प्रतिशत के बीच होती थी. 2017-18 में ये बेरोजग़ारी की दर 27.2 प्रतिशत हो गई है। दिसबंर में जो रिपोर्ट जारी होनी थी और नहीं हुई उसमें यह बात थी कि 45 साल में सबसे अधिक बेरोजग़ारी दर है। अगर हमारे पास वह पैमाना न भी हो तो भी शहरों में औसत बेरोजग़ारी की दर 7.8 प्रतिशत काफी है।

एक बार फिर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सहित कई मंत्रियों ने अपना कार्यभार संभाल लिया और काम भी शुरू कर दिया। कैबिनेट की पहली बैठक में कुछ महत्वपूर्ण फैसले लिए गए. जीडीपी और बेरोजग़ारी के खराब आंकड़ों के बीच सरकार के आज के फैसले बता रहे हैं कि सरकार का जोर खर्च पर चला गया है। जिस तरह से व्यापारियों और किसानों को पेंशन देने के वादे पर फैसला हुआ है, पीएम किसान योजना का विस्तार हुआ है, उससे लगता है कि सरकार लोगों के हाथ में पैसा देकर खर्च की क्षमता बढ़ाना चाह रही है। लेकिन बेरोजगारी दूर करने का मुद्दा इसमें शामिल ही नहीं था। उम्मीद की जानी चाहिए कि देश के नए मानव संसाधन मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक अपनी किताब सफलता के अचूक मंत्र का इस्तमाल करते हुए मानव संसाधन मंत्रालय को बदल देंगे। 

नए शिक्षण संस्थान, शिक्षा पद्धति में बदलाव और अन्य ऐसे अनेक कदम उठाए जा सकते हैं, जिनसे एक ओर हमें कुशल युवाओं की फौज मिले, तो दूसरी ओर रोजगार के साधन भी बढ़ें। किसानों को हर तरह की सुविधाओं के साथ ही अब सरकार दो हजार रुपए महीने भी दे रही है, किसानों को पेंशन भी दी जाएगी। अब किसानों को पेंशन का क्या औचित्य है, यह तो नहीं पूछा जा सकता, लेकिन यह जरूर पूछा जा सकता है कि युवाओं को बेरोजगारी भत्ता देने की योजना क्यों लागू नहीं की जा रही है? जब सबको पैसा ही बांटना है तो बेरोजगार क्यों वंचित हैं? उनका तो हक है। 

एक मित्र का कहना था कि सरकार पैसा उनको बांटती है, जो वोट बैंक बनते हैं। यानि गरीब और किसान सरकार का वोट बैंक है और सबसे ज्यादा पिस रहा मध्यम वर्ग...? और बेरोजगार युवा...? काश! ये भी स्वयं को वोट बैंक बनकर सरकार को दिखा पाते। शायद, सरकार या राजनीतिक दल सौदेबाजी में अधिक भरोसा करते हैं। वोट दो, पैसे लो। तो वोट 
के बदले रोजगार क्यों नहीं? क्यों वोट के बदले व्यापार नहीं बढ़ पा रहा? शेयर बाजार तो आसमान की ओर जा रहा है, लेकिन छोटे व्यापारी? आत्महत्या की कगार पर। इस क्षेत्र में भी गंभीर बेरोजगारी और आर्थिक संकट का दौर है, जो हो सकता है आंकड़ों में न हो, लेकिन इनकी आत्महत्या के आंकड़े बढ़ते जा रहे हैं, जिनकी रिपोर्टें ही बदल दी जाती हैं, ताकि सरकार खुशफहमी में ही रहे।

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