Hotel Rajhans Ritz राजधानी भोपाल की होटलों में परोसा जा रहा बासी खाना, खाद्य विभाग को अपने हिस्सा की फ़िक्र, 'फीडबैक बुक' तक नहीं देखते?



प्रतीक फोटो by google 

अगर आप बाहर के खाना खाने के शौकीन हैं तो जरा सावधान रहें, क्योंकि जो खाना खाकर आप अपनी भूख शांत करने जा रहे हैं, कहीं वही खाना 
आपको अस्पताल न पहुंचा दें. 



छोटे शहरों में क्या हाल होगा जब राजधानी जैसी जगह पर ये हाल है. बात हो रही है खाद्य विभाग की. वह सो रहा है या जानबूझ कर ले दे के सोने का नाटक कर रहा है. होटलों में बासी और बेकार खाद्य सामग्री धड़ल्ले से परोसी जा रही है. लोग बीमार हो रहे हैं. खासकर गर्मियों के मौसम में संभल कर ही बाहर खाएं और जितना संभव हो सके बाहर खाने से बचें. 

जब ज्यादा कोई बात होती है तो यदा कदा जांच अभियान चलता है. सेम्पल लिए जाते हैं, लेकिन जांच क्या हुई, उसका बाद में कोई पता नहीं चलता. सब लेन देन से मामले सुलझा लिये जाते हैं शायद. यही कारण है कि ज्यादातर होटल रेस्टोरेंट वाले उपभोक्ताओं की शिकायतों को गंभीरता से नहीं लेते. सवाल है कि जिस खाद्य विभाग को लोगों की सेहत से खिलबाड़ करने वालों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करने की जिम्मेदारी सौंपी गई है आखिरकार वह धृतराष्ट्र क्यों बना हुआ है? ताजा मामला मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल से सामने आया है. 

मामला आईएसबीटी स्थित होटल राजहंस रिट्ज का बताया जाता है जहाँ एक उपभोक्ता ने खराब खाने की शिकायत अन्य लोगों सहित मैनेजर से की, किन्तु शिकायत को कोई तबज्जो नहीं दी गई. उपभोक्ता ने इस बात का ज़िक्र फीडबैक बुक में भी किया, किन्तु कोई फर्क नहीं पड़ा, क्योंकि वह अच्छी तरह जानते हैं फीडबैक बुक में लिखने से क्या होता है, खाद्य विभाग वाले तो अपना हिस्सा लेने आते हैं, फीडबैक बुक में क्या लिखा देखने नहीं? 

उपभोक्ता श्री रविन्द्र नोदी ने मामले को सोशल मीडिया पर Bhopal City Information Portal-Bhopal.info पेज पर पोस्ट किया है. पोस्ट इस प्रकार है- 
आज दिनांक 07.06.2019 को रात्रि 9.00 बजे मैं अपने परिवार सहित आईएसबीटी स्थित होटल राजहंस रिट्ज में खाना खाने गया. हमने खाने की 9 थाली आर्डर की. खाना खाते में हमने महसूस किया कि पनीर की सब्जी खराब हो चुकी है. शायद वह सुबह की बनी हुई होगी इस कारण उसमें बुसने जैसा स्वाद आने लगा था एवं बास भी आने लगी थी. इस बात की शिकायत मैंने वहां तीन अन्य लोगों सहित उनके मैनेजर से भी की किन्तु उन्होंने हमारी शिकायत को कोई तबज्जो नहीं दी न ही सब्जी को बदलने का कष्ट किया. इस बात का ज़िक्र हमने उनकी फीडबैक बुक में भी किया किन्तु उन्हें कोई फर्क नहीं.

भोपाल की इतनी पुरानी एवं प्रतिष्ठित होटल का इतना लापरवाही पूर्ण रवैया तथा ग्राहकों के स्वास्थ्य से इस तरह का खिलवाड़ करना वास्तव में निन्दनीय है. इस कारण यह पोस्ट सभी भोपाल वासियों की जानकारी में लाना जरूरी है.

प्रतिक्रिया में लोगों की राय है कि खाद्य विभाग सो रहा है या जानबूझ कर ले दे के सोने का नाटक कर रहा है. होटलों में बासी और बेकार खाद्य सामग्री धड़ल्ले से परोसी जा रही है. लोग बीमार हो रहे हैं. खासकर गर्मियों के मौसम में संभल कर ही बाहर खाएं और जितना संभव हो सके बाहर खाने से बचें. 



देखिये और क्या लिख रहे हैं यूजर्स -

Дятїѕт Ядјц गर्मी के मौसम में , सब्जी की ग्रेवी बेकार हो जाती है, इसलिए इन दिनों तो सोच समझ कर खाना खाना चाहिए , बुसी सब्जी, उसी को खिलाना चाहिए था  गलती की आपने..

DrDeepak Kumar Tripathi ईद के दिन मेरे साथ भी ICH कोलार रोड में ऐसा ही हुआ. और अचरज की बात ये है कि मैंने FSSAI के टोल फ्री में बात की वो फिजूल निकली. चोर चोर मौसरे भाई..

Ashish Nagar इसकी कंप्लेंट खाद्य विभाग में कीजिये शायद कोई मिली भगत न हो होवे तो कोई एक्शन लिया जाए, ताकि आगे से ये सब परेशानी से आम जनता को निजात मिल सके.

Aamir Ahmed Khadya vibhag v Mota pesa khata h har bade chhote restoration se .... Sare choor h

Nadeem Khan Aksar aise kisse Rajhans me sunne ko mil rahe hain, isiliye ab jaana chodh diya

Samarth Nigam Hme rajhans ka bycot krna hoga..

Kunwar MP Singh सभी होटल बासी खाना ही देते हैं, जो रात को बच जाता है उनको गर्म करके देते हैं, इससे खाने का स्वाद बदल जाता है. आप 1 पाव पनीर बाजार से 70 रुपये में लेकर पूरे परिवार के बढ़िया पनीर सब्जी बना सकते हैं. 

Anil Soni गर्मी में होटलों में पनीर की सब्जी खाना ही नही चाहिये.

Shailesh Jain जितना दूध उत्पादन है उससे ज्यादा दूध और दूध के उत्पाद बाजार में बिक रहे है पनीर नकली भी हो सकता है.

Govind Goyal GB  होटल में खाना avoid करना चाहिए. 

Abhilash Abhilash होटल रेस्टोरेंट के किचन को सीसी टीवी के माध्यम से होटल में अलग अलग स्थानों पर दिखाना आवश्यक करना चाहिए। पब्लिक देखे भोजन किस तरह से बनाया जा रहा है.

Vijay Nigam बिल्कुल सही कहा आपने. होटल चल पड़ा है और हम जैसे लोगो ने ही पैसे दे के खाना खा खा के इन्हें प्रसिध्द भी किया है,। पर सच मे अब इनका रवैय्या बहुत घमंडी और लापरवाह हो गया है.। सारा स्टाफ ही इतराता फिरता है। कड़ी शिकायत होनी चाहिए. हमे आगे से ऐसे खाने को पैक करा के बिल सहित उचित फोरम पर देना चाहिए।

क्या है नियम ? 
दो लाख रूपये जुर्माना व कैद भी हो सकती है
हर जिले में खाद्य व सुरक्षा अधिकारियों की नियुक्ति की गई है. इन अधिकारियों का काम होटलों, रैस्टोरैंट व रेहड़ी आदि खाद्य पदार्थ विक्रय करने वाले संस्थानों में जांचकर सैंपल लेना होता है. सैंपलों की जांच विभाग की लैबोरेट्री में की जाती है. शिकायतों पर खाद्य पदार्थ सुरक्षा अधिकारी जांच कर सकते हैं, फिर खुद ही संज्ञान लेकर कार्रवाई की जा सकती है. जांच में यदि खाद्य पदार्थ में सामान्य मिलावट या सेहत के लिए हानिकारक होने पर दो हजार से 2 लाख जुर्माना हो सकता है. इस खाद्य पदार्थ में सेहत का नुकसान होने पर एफआईआर और कोर्ट में केस तक दर्ज किया जा सकता है. यह अलग बात है कि ऐसा होता हुआ बहुत कम देखने में आता है. 



त्यौहारी सीजन भर में होती है सैंपलिंग
खाद्य विभाग की तरफ से त्यौहारी सीजन में ही कुछ होटल-मिठाई की दुकानों में खाने-पीने की चीजों की जांच की जाती है. ऐसे पदार्थों का सैंपल लेकर जांच के लिए भेजा जाता है. दीवाली और होली के आसपास ही मिलावटी मिठाइयां और अन्य खाने-पीने की चीजों का लेकर जांच के साथ सैंपल लेते हैं. कई मामलों में देखा गया है कि खाद्य पदार्थ और मिठाइयों के सैंपल की जांच रिपोर्ट त्यौहारी सीजन खत्म होने के बाद ही आती है. ऐसे में आम आदमी कभी जान भी नहीं पाता कि सैंपल की जांच का क्या हुआ या उस पर किसी प्रकार की कोई कार्यवाही हुई भी या नहीं? 

कोई जांच, कोई कार्यवाही कभी सामने नहीं आती 
लोगों की सेहत से खिलबाड़ करने वालों के खिलाफ न कोई जुर्माना, न किसी प्रकार की कोई कार्रवाई सामने नहीं आती, जो कि इस बात की गवाही खुद दे रही है कि खाद्य सुरक्षा विभाग के अधिकारियों को होटलों व रैस्टोरैंट आदि से भारी चढ़ावा चढ़ता रहता है. हालांकि खाद्य विभाग का अपना तर्क है. खाद्य विभाग के अधिकारियों का तर्क है कि वे बिना शिकायत के अगर किसी होटल या रैस्टोरैंट आदि पर जांच करने के लिए पहुंचते हैं तो वे शिकायत कर देते हैं कि उन्हें तंग किया जा रहा है. ऐसे में आम उपभोक्ता को ही जागरूक होना होगा. 





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