इन कामगारों से असहिष्णु न हों, तू-तड़ाक न करें, इससे आपकी अमीरी पर कोई संकट नहीं आयेगा


रिक्शा चालक, घर में काम करने वाले माली, पुताई वाले, बर्तन सफ़ाई के लिए आने वाली बच्चियाँ/महिलाएँ, आपके खाने का ऑर्डर पूरा करने आधे घंटे के भीतर शहर के ट्रैफ़िक, आँधी-बारिश, कड़कती धूप की मौजूदगी में आप तक सामान पहुँचाने वाले डिलीवरी बॉयज़, और ऎसे अन्य कामगारों से मैंने अधिकतर सम्पन्न (केवल धन से) लोगों को छोटी-छोटी बात पर असहिष्णु होते, तू-तड़ाक करते देखा, सुना है. पैसा काटने की धमकी देना तो बहुत आम बात है. आश्चर्य ऎसे लोग ही मज़दूर दिवस पर फेसबुक पोस्ट डालने का मानव धर्म कभी नहीं भूलते. दिखावा करने से बेहतर है कि उन लोगों के साथ इंसान की तरह पेश आएँ. ऎसा करने से आपकी अमीरी पर कोई संकट नहीं आयेगा. 



रचना त्यागी 

मैंने अधिकतर सम्पन्न (केवल धन से) लोगों को छोटी-छोटी बात पर इनके साथ असहिष्णु होते, तू-तड़ाक करते देखा, सुना है. पैसा काटने की धमकी देना तो बहुत आम बात है. आश्चर्य ऎसे लोग ही 1 मई को मज़दूर दिवस की बधाई देने में सबसे आगे दिखे. ये लोग मज़दूर दिवस पर फेसबुक पोस्ट डालने का मानव धर्म कभी नहीं भूलते.  

पूर्ण कुशल और अर्ध कुशल कामगार किसी न किसी संस्था से जुड़े लोग होते हैं, जिनके ज़रिए उन्हें काम पर भेजा जाता है. किसी शिकायत या विवाद का निबटारा भी कामगार की ओर से वह संस्था ही करती है और उनके वेतन का भी. इसलिए ऎसे कामगारों के साथ शोषण तुलनात्मक रूप से कम होता है. वहाँ विनम्र बने रहना आपकी मजबूरी होती है, क्योंकि आपको अपना जीवन सरलता से चलाने के लिए घर, दफ़्तर में उनकी ज़रुरत है. 

इसके विपरीत अकुशल कामगार-रिक्शा चालक, घर में काम करने वाले माली, पुताई वाले, बर्तन सफ़ाई के लिए आने वाली बच्चियाँ/महिलाएँ, आपके खाने का ऑर्डर पूरा करने के आधे घंटे के भीतर शहर के ट्रैफ़िक, आँधी-बारिश, कड़कती धूप की मौजूदगी में आप तक सामान पहुँचाने वाले डिलीवरी बॉयज़, और ऎसे अन्य कामगारों का शोषण बहुत आम बात है.

मैंने अधिकतर सम्पन्न (केवल धन से) लोगों को छोटी-छोटी बात पर इनके साथ असहिष्णु होते, तू-तड़ाक करते देखा, सुना है. पैसा काटने की धमकी देना तो बहुत आम बात है. आश्चर्य ऎसे लोग ही 1 मई को मज़दूर दिवस की बधाई देने में सबसे आगे दिखे. ये लोग मज़दूर दिवस पर फेसबुक पोस्ट डालने का मानव धर्म कभी नहीं भूलते. 

ऐसे लोगों से मैं कहना चाहूंगी यहाँ दिखावा करने से बेहतर है कि उन लोगों के साथ इंसान की तरह पेश आएँ. ऎसा करने से आपकी अमीरी पर कोई संकट नहीं आयेगा. बल्कि यहाँ पोस्ट डालना उतना ज़रूरी नहीं, जितना इनके साथ मानवीय होना है. ये सब कामगार फ़ेसबुकीय सहानुभूति के नहीं, वास्तविक समानता और आदर के हक़दार हैं, क्योंकि भीख माँगने की बजाय स्वाभिमान से जीने की इच्छा रखते हुए मेहनत का रास्ता चुनते हैं. उनकी उसी पूँजी, उसी स्वाभिमान को बात-बात में आप कितनी बेशर्मी से रौंद डालते हैं! दिखावे की दुनिया से बाहर आकर इंसान बनिये जनाब..

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