मिलिए नवनियुक्त मंत्री "उडीसा के मोदी" से, रहते हैं झोपडी में


प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की केबिनेट में वैसे तो एक से एक धुरंधर लोग शामिल हुए हैं, मगर सबको समान रूप से आदर देते हुए जिस विशेष व्यक्तित्व की मैं बात करने जा रहा हूँ वो हैं प्रताप चंद्र सारंगी। जो बालासोर उड़ीसा से भारतीय जनता पार्टी के नवनिर्वाचित सांसद हैं। इन्हे "उड़ीसा का मोदी" भी कहा जाता है।
सरीन लखविंदर / आकाश नागर 

श्री प्रताप चंद सारंगी को राज्यमंत्री का प्रभार मिला है। यह असली आर्थिक रूप से पिछड़े हैं, जिनके मन में दिखावटी सांसदों की तरह जरा भी दिखावा नहीं है। उन्होंने बीजू जनता दल (BJD) के रविंद्र कुमार जैना को एक लाख से ज्यादा वोटों से हराया। 2014 में जैना ने सारंगी को हराया था, लेकिन इस बार यह शख्स संसद पहुंचने में कायमाब रहा। 



श्री प्रताप चंद सारंगी 542 सांसदों में सबसे गरीब आर्थिक रुप से कमजोर सांसद हैं। जिनके पास मोबाइल नहीं है। झोपडी में निवास है। ग्राम पंचायत के हैंडपंप पर स्नान करते हैं। इन्होंने पूरा प्रचार सायकिल से किया। इनकी सकल संपत्ति सवा लाख रुपये है। सारंगी के सांसद चुने जाने के बाद सोशल मीडिया पर उनकी जबरदस्त चर्चा है। खासतौर पर ट्विटर पर उनकी तस्वीरें वायरल हो रही हैं। 



और ज्यादा जानिए इनके बारे में
प्रताप चंद्र सारंगी का जन्म ओडिशा के एक बेहद गरीब परिवार में हुआ। वे शुरू से धार्मिक प्रवृत्ति के थे और साधु बनना चाहते थे। नीलगिरी के फकीर मोहन कॉलेज से ग्रेजुएशन करने के बाद वे साधु बनने के लिए रामकृष्ण मठ चले गए। वहां लोगों को पता चला कि उनकी मां विधवा हैं और परिवार में कोई नहीं है तो सलाह दी कि वे घर जाएं और मां की सेवा करें।

सारंगी ने शादी नहीं की और अपना पूरा जीवन जनसेवा में लगा दिया है। ये एक छोटे से घर में रहते हैं और साइकिल पर चलते हैं। इनके पास सम्पत्ति के नाम पर कुछ नहीं है। परिवार में माताजी थीं, जिनका बीते साल निधन हो चुका है।

संसदीय क्षेत्र में सारंगी की पहचान ऐसे शख्स के रूप में हैं, जो धर्म और आस्था से जुड़ा है और निःस्वार्थ भाव से लोगों की भलाई के लिए काम करता है। ये बच्चों को पढ़ाते हैं और उन्हें जीवन में आगे बढ़ने की प्रेरणा देते हैं।





प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी सारंगी से बहुत प्रभावित हैं। मोदी जब भी ओडिशा आते हैं, उनसे जरूर मिलते हैं। मोदी की पहल के बाद ही सारंगी ने राजनीति में कदम रखा। इससे पहले वे 2004 और 2009 में नीलगिरी विधानसभा से विधायक रह चुके हैं। 2014 के लोकसभा चुनाव में जरूर हार मिली, लेकिन इस बार दिल्ली पहुंचने में कामयाब रहे।

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