जांच किया, रिपोर्ट आगे बढ़ाई और कहानी ख़त्म, फिर सब कुछ पहले जैसा, फिर किसी एक नई दुर्घटना का इन्तजार..




''गए थे कैरियर बनाने, लेकिन जान बचाने चौथी मंजिल से कूदना पड़ा, फिर भी नहीं बच सकी देश के होनहार 19 युवाओं की जान. गुजरात के सूरत में फिर उठीं लपटें. तक्षशिला कोचिंग की अत्यंत दुःखद घटना.. विनम्र श्रद्धांजलि.. 
इसी के साथ खबर, बात केवल गुजरात की ही नहीं, देश भर के ऐसे संस्थानों की. निश्चित रूप से सुरक्षा अनुमतियों में गड़बड़ी होती है. शासन-प्रशासन सुरक्षा को लेकर गंभीर नहीं देखा जाता. दुष्परिणाम सबके सामने है और यह कोई पहली घटना भी नहीं है और इसे आखिरी घटना भी नहीं कहा जा सकता.'' 
- चित्रांश    



देख लीजिये युवा पत्रकार श्री रोशन नेमा जी ने चेता ही दिया है, फिर न कहना 'किसी ने कभी बताया ही नहीं...' 

देश भर के साथ मध्यप्रदेश के भोपाल की ही बात करें तो एम.पी. नगर ही देख लें. बड़े बड़े कॉम्प्लेक्स में किस भी छोटे फ्लोर पर भट्टियां चल रही हैं. आईएसबीटी के पास छोटे प्लॉट्स पर बहुमंजिला इमारतें खड़ी की जाकर कोचिंग होटल्स चलाये जा रहे हैं. कहा जा सकता है सरकार स्थानीय प्रशासन कतई गंभीर नहीं है. जैसे लगता हो ऐसी किसी दुर्घटना का इन्तजार कर रहा हो. 

भोपाल शहर की बहुमंजिला इमारतों में आग से सुरक्षा, बचाव के पर्याप्त बंदोबस्त नहीं हैं. यह खुलासा नगर निगम द्वारा की गई जांच में हो चुका है, बाबजूद इसके कोई कार्यवाही सुधार के लिए नहीं की जा रही. सवाल उठता है क्या सिर्फ जांच करने का काम है या उसमें आवश्यक सुधार का? या यह कहें कि जांच का मकसद, भ्रष्टाचार जो था, वह पूरा हो गया? या यह कहें कि फिर किसी एक और दुर्घटना का इन्तजार किया जा रहा है? 


पिछले दिनों दिसंबर 18 में बैरागढ़ के शॉपिंग कॉम्प्लेक्स में भीषण आग लगी, जिसमें करोड़ों का नुकसान हुआ. पड़ताल में पता चला कि कॉम्प्लेक्स में आग बुझाने के बंदोबस्त नहीं थे. आग बुझाने पहुंचे अमले को यहां पर्याप्त स्पेस नहीं होने से दिक्कतों का सामना करना पड़ा था. नगर निगम ने जांच किया, जाँच रिपोर्ट आगे बढ़ाई और कहानी यहीं ख़त्म. सब कुछ फिर पहले जैसा सामान्य. फिर किसी एक और दुर्घटना का इन्तजार..





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