शाह भोपाल को लेकर गंभीर, कार्यकर्ता बता रहे 'अंडर करेन्ट', लेकिन ऊपर वालों का कहना 'थोड़ा दिखे भी तो'




''जितना समझा था, उतनी दमदार नहीं निकलीं प्रज्ञा, लेकिन इसका यह कतई मतलब नहीं कि बीजेपी चुप बैठ जायेगी. पार्टी अध्यक्ष ने भोपाल के चुनाव को गंभीरता से लिया है. उन्होंने भोपाल को अपनी प्रतिष्ठा का प्रश्न बना लिया है. और बनाएं भी क्यों न, क्योंकि यदि भोपाल ही हार गए तो..'' 
- राकेश तिवारी 

इसी बात को लेकर बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह ने अब अपनी पूरी ताकत भोपाल पर झौंक दी है. अब उन्होंने अपने सबसे विश्वस्त सेनापति भाजपा के वरिष्ठ नेता एवं गुजरात प्रभारी ओपी माथुर को भोपाल भेजा है. 


जानकारी के अनुसार ओपी माथुर 10 मई तक भोपाल में ही रहेंगे.  उन्हें पूरी ताकत लगाने के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने निर्देश दिए हैं. उनके अलावा राष्ट्रीय महामंत्री डॉ. अनिल जैन और प्रदेशाध्यक्ष राकेश सिंह ने भी भोपाल में साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर के प्रचार का फीडबैक लिया और सारे मंडलों की बैठक ली है. इस दौरान बड़े रोड शो की भी तैयारी की जा रही है.  

असल में भाजपा ने साध्वी प्रज्ञा को प्रत्याशी ये सोचकर बनाया था कि उनके होने से वोटों का ध्रुवीकरण होगा और पार्टी आसानी से जीत जाएगी, लेकिन मतदान की तारीख नजदीक आने के बावजूद पार्टी वोटों का ध्रुवीकरण कराने में सफल नहीं रही. बड़ी समस्या यह है कि भाजपा के जमीनी कार्यकर्ताओं ने प्रज्ञा ठाकुर को अस्वीकार कर दिया. हालांकि कार्यकर्ता बता अवश्य रहे हैं, कहा जा रहा है कि 'अंडर करेन्ट' है, लेकिन ऊपर वालों का कहना है 'थोड़ा दिखे भी तो'. 




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