ये कैसे अगड़े, कुर्सी पर बैठकर खाने पर देवभूमि में दलित की हत्या



''ये तो हद हो गई, शादी समारोह में शामिल दलित युवक जितेंद्र को सिर्फ इसलिए मौत के घाट उतार दिया गया, क्योंकि उसने अगड़ों के आगे बैठकर खाना खा लिया था..''



आकाश नागर   

मेरा देश बदल रहा है, हम बदल रहे हैं, हम सब एक हैं, लेकिन ये बात झूठी सी लगती है जब एक युवक को सिर्फ इस बात के चलते बेहरहमी से पीटा जाता है कि उसने सवर्णों के सामने कुर्सी पर बैठ कर खाना खाने की हिम्मत की.

घटना 9 दिन पुरानी है 26 अप्रेल की है, जब जितेंद्र दास नामक एक व्यक्ति अपने ही समुदाय की एक शादी में खाना खा रहा था कि तभी वहां पर कुछ उच्च जाति के लोग आए. जब उन्होंने जितेंद को कुर्सी पर बैठ कर खाना खाते देखा तो गुस्से से उन्होंने पहले उसकी कुर्सी पर लात मारी और फिर उसके बाद उसकी पिटाई करनी शुरू कर दी. उनका कहना था कि हमारे सामने आखिर एक दलित की हिम्मत कैसे हुई कि वो कुर्सी पर बैठ कर खाना खा सके. 

जितेंद्र की इतनी पिटाई की गई कि उसको देहरादून के इंद्रेश अस्पताल में भर्ती करवाया गया जहां 9 दिन के इलाज के बाद 5 मई को उसकी मौत हो गई. समाज को हिला देने वाला ये मामला उत्तराखंड के टिहरी गढ़वाल जिले का है.

27 साल का दलित युवक जितेंद्र अपने रिश्तेदार की शादी में शामिल होने 26 अप्रैल को श्रीकोट गांव गया था. श्रीकोट गांव, टिहरी गढ़वाल जिले के नैनबाग तहसील के अंतर्गत आता है. इसी गांव की शादी में समाज के वर्गभेद को दर्शाने वाली यह घटना घटी. 

नैनबाग टिहरी के जितेंद्र दास को सवर्णों के साथ खाना खाना इतना महंगा पड़ गया कि उसे सवर्णो ने जात-पात के भेदभाव के चलते इतनी बेरहमी से मारा कि अस्पताल में इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई. ये दुःखद खबर सुनते ही हंसते खेलते परिवार में मातम छा गया. घटना के 9 दिन बाद 5 मई को दलित जितेंद्र ने देहरादून के एक अस्पताल में दम तोड़ दिया.
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News Digital India 18

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