उसने इन्हें मध्यप्रदेश के रास्ते दिखाये, और ये सिखा रहे लोगों को इंसानियत



कम लोग यह समझते हैं, जब आप वाहन में होते हैं तो आपके परिवार की खुशियाँ, आपकी जान उसके हाथ में होती है. बाबजूद ज्यादातर ड्रायवर को कमतर आंकते हैं, वह भी आईएएस हो तो बात और भी अलग हो जाती है, लेकिन हमेशा ऐसा नहीं होता, कुछ लोग आईएएस होते हुए इंसान भी होते हैं. इन्हीं में से एक हैं वर्तमान में आयुक्त जनसंपर्क पी नरहरि जी. 



बलभद्र मिश्रा       

युक्त जनसंपर्क पी नरहरि जी ने अपने छिंदबाड़ा प्रवास के दौरान 17 साल बाद भी न केवल अपने पहले ड्रायवर को याद रखा, बल्कि उसके घर जाकर उससे मिले भी. साथ ही और अधिक सम्मान देने उन्होंने सोशल मीडिया पर यह पोस्ट भी किया. 

पोस्ट में उन्होंने लिखा 'आज मैं आईएएस बनने पर अपने पहले ड्राइवर से उसके निवास छिंदबाड़ा में मिलने गया। उन दिनों मैं सहायक कलेक्टर छिंदवाड़ा पदस्थ था. आईएएस की मेरी यात्रा यहाँ से ही शुरू हुई. मुझे अभी भी जून 2002 याद है, जब श्री विश्वकर्मा जी पहली बार नागपुर रेलवे स्टेशन पर हमें रिसीव करने के लिए आए थे. एक साल के लिए उसने मुझे मध्यप्रदेश के रास्ते दिखाये, जिनके माध्यम से मैं अभी तक सवारी कर रहा हूँ. 
धन्यवाद विश्वकर्माजी. स्वस्थ रहें.'

सैल्यूट सर आपको भी. एक ड्रायवर को इतना मान सम्मान देने के लिए. उसने आपको मध्यप्रदेश के रास्ते दिखाये, और आप आज कई लोगों को इंसानियत क्या होती है, सिखा रहे हैं. 



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