नया पँछी



आजकल कुछ कहा नहीं जाता 
लगता है कुछ लिखा नहीं जाता

दरमियाँ मेरे उनके मौन पलता 
बात पे बिन कहे रहा नहीं जाता

मुद्दतों का फांसला होता तो कहें 
साथ साथ कुछ कहा नहीं जाता

दुश्वारियाँ बहुत इधर-उधर होंगी  
खुलकर किसी से बोला नहीं जाता

आँगन के पेड़ पर गीत गाता रहा 
कोई नया पँछी है कहा नहीं जाता 

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News Digital India 18

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