कमलनाथ सरकार सुरक्षित, बीजेपी अध्यक्ष ने कहा 'फ्लोर टेस्ट' की बात नहीं की



लोकसभा चुनाव के एग्जिट पोल आने के तत्काल बाद नेता प्रतिपक्ष गोपाल भार्गव द्वारा विधानसभा का विशेष सत्र बुलाने राज्यपाल को पत्र लिखने और बाद में कमलनाथ सरकार के 'फ्लोर टेस्ट' की बात की थी. मुख्यमंत्री कमलनाथ ने भी कहा हम 'फ्लोर टेस्ट' के लिए तैयार हैं. लेकिन अब बीजेपी ही इससे पलट गई है. पार्टी के प्रदेशाध्यक्ष राकेश सिंह ने इस बारे में सफाई दी है कि भार्गव ने सत्र बुलाने को पत्र लिखा था, उसका फ्लोर टेस्ट से कोई लेना देना नहीं है.  



असल में यह सब भाजपा अध्यक्ष अमित शाह के नाराज हो जाने के कारण हुआ है. बताया जा रहा है भाजपा हाईकमान का मानना है कि मध्यप्रदेश की इस हलचल से केंद्र में एनडीए की सरकार बनाने की कोशिशें प्रभावित हुईं हैं. इसी के साथ फिलहाल कमलनाथ सरकार सुरक्षित हो गई है. भाजपा हाईकमान द्वारा भाजपा नेताओं के इस तरह की बयानबाजी पर पाबंदी लगा दी गई है. 

राज्यपाल को लिखे पत्र में ये कहा
नेता प्रतिपक्ष ने राज्यपाल से पत्र में कहा कि राज्य के कई ऐसे मुद्दे हैं, जिन पर तत्काल चर्चा की जानी चाहिए, ऐसी स्थिति में विशेष सत्र बुलाना उचित होगा. प्रदेश में कई ज्वलंत समस्याएं हैं. पेयजल संकट गंभीर हो गया है. कानून व्यवस्था की स्थिति खराब होती जा रही है. किसानों से गेहूं एवं चने की फसलों का उपार्जन तथा भुगतान नहीं हो पा रहा है. प्रदेश में कर्जमाफी के संबंध में स्थिति स्पष्ट नहीं है और किसान भ्रमित हैं. प्रदेश सरकार ने संबल एवं अन्य लोकप्रिय योजनाओं पर रोक लगा रखी है, जिसके चलते प्रदेश के लोगों को उनका लाभ नहीं मिल पा रहा है. नेता प्रतिपक्ष ने लिखा है कि फरवरी में दो दिन का लघु सत्र बुलाया गया था, लेकिन उसमें इन विषयों पर चर्चा नहीं हो सकी थी. उन्होंने आग्रह किया है कि लोक महत्व के इन विषयों की तात्कालिकता को देखते हुए विशेष सत्र के लिए मुख्यमंत्री को निर्देशित करें. सत्र बुलाने की मांग में जल्दबाजी के सवाल पर भार्गव ने कहा कि यदि लोकसभा चुनाव के परिणाम कांग्रेस के प्रतिकूल आते हैं तों हम सभी का कर्तव्य है कि समय रहते उसका परीक्षण कराया जाए.

10 कांग्रेसी विधायक उनके संपर्क में
नेता प्रतिपक्ष के पत्र की भाषा तो सत्र बुलाए जाने तक सीमित थी, लेकिन उन्होंने मीडिया में जो अलग-अलग बयान दिए, उसका संदेश यही था कि भाजपा मप्र में कमलनाथ सरकार गिराना चाहती है. इसी वजह से हाईकमान नाराज हुआ. बाद में बयानों में केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने भी कहा कि 10 कांग्रेसी विधायक उनके संपर्क में हैं. इसके बाद कमलनाथ सरकार के संकट में आ जाने की खबरें शुरू हो गईं. 


हॉर्स ट्रेडिंग की कोशिशें
यहाँ तक कि हॉर्स ट्रेडिंग की कोशिशें भी की जाने लगी थीं. मुख्यमंत्री कमलनाथ ने कहा कि मुझे अपने विधायकों पर पूरा भरोसा है. कमलनाथ ने यह भी कहा कि दस विधायकों ने उन्हें बताया है कि फोन के जरिए प्रलोभन देकर उन्हें तोड़ने की कोशिश की जा रही है. लेकिन हमें अपने विधायकों पर पूरा विश्वास है और विपक्ष अपने मंसूबों पर सफल नही होगा. कमलनाथ ने आज मंगलवार को सभी मंत्री और विधायकों के साथ बैठक कर चुनाव पर चर्चा की. बैठक में कांग्रेस सरकार के मंत्री, विधायकों के साथ सरकार को समर्थन दे रहे निर्दलीय चारों विधायक भी शामिल हुए थे. 

शाह की नाराजगी की वजह ये है
राष्ट्रीय संगठन महामंत्री रामलाल ने प्रदेश संगठन से पूछताछ की कि क्या भार्गव ने बयान देने से पहले उन्हें भरोसे में लिया था. पार्टी की नाराजगी की वजह ये है कि हाईकमान इन दिनों केंद्र में नई सरकार के गठन की कवायद कर रहा है. ऐसे समय में एक प्रदेश सरकार को अस्थिर करने वाले बयान से पार्टी को असहज परिस्थितियों का सामना करना पड़ा है. 
  
भाजपा के प्रदेशाध्यक्ष राकेश सिंह ने कहा कि कांग्रेस खुद ही डरी हुई है. कांग्रेस के नेता अनर्गल बातें कर रहे हैं. भाजपा ने कहीं भी फ्लोर टेस्ट की बात नहीं कही है. नेता प्रतिपक्ष गोपाल भार्गव ने जो पत्र लिखा है, उसमें सिर्फ सत्र बुलाने का आग्रह किया गया है पर इस बात को कांग्रेस ने सरकार गिराने का रंग देकर उन लोगों को साधने की कोशिश की है, जिनके बारे में कहा जा रहा था कि ये कभी भी कांग्रेस सरकार को छोड़ सकते हैं. 




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