लोकसभा ख़ास बातें, खुद के दम पर बहुमत खो देने वाली पहली सरकार बनी मोदी सरकार



''विपक्षी पार्टी के पास कम से कम कुल सीटों की 10 फ़ीसदी संख्या होनी चाहिए, यानि 55 सीटें. 2014 के आम चुनाव में मुख्य विपक्षी पार्टी कांग्रेस को सिर्फ़ 44 सीटें ही मिल पाई थीं. इस प्रकार से मोदी सरकार में विपक्ष ही नहीं था. भाजपा ने 282 सीटों के साथ बहुमत पाया था, लेकिन समय निकलते भारतीय जनता पार्टी के 268 सदस्य ही लोकसभा में रह गए, लेकिन फिर भी गठबंधन वाले राजनीतिक दलों के सहयोग से बीजेपी की सरकार सुरक्षित रही. इस प्रकार मोदी सरकार अपने कार्यकाल में ही खुद के दम पर बहुमत खो देने वाली ऐसी पहली सरकार भी बनी.''  



 

संविधान के मुताबिक़ लोकसभा सीटों की अधिकतम संख्या 552 हो सकती है. फ़िलहाल लोकसभा सीटों की संख्या 545 है, जिनमें से सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में 543 सीटों के लिए आम चुनाव होते हैं. इनके अलावा अगर राष्ट्रपति को लगता है कि एंग्लो-इंडियन समुदाय के लोगों का लोकसभा में प्रतिनिधित्व काफ़ी नहीं है तो वह दो लोगों को नामांकित भी कर सकते हैं.


कुल सीटों में से 131 लोकसभा सीटें रिज़र्व होती हैं. इन 131 में अनुसूचित जाति के लिए 84 और अनुसूचित जनजाति के लिए 47 सीटें रिज़र्व हैं. यानी इन सीटों पर कोई अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के उम्मीदवार ही चुनाव लड़ सकते हैं.


किसी भी पार्टी को बहुमत के लिए कम से कम 272 सीटें चाहिए होती हैं. अगर बहुमत से कुछ सीटें कम भी पड़ जाएं तो दूसरे दलों के साथ गठबंधन करके भी सरकार बनाई जा सकती है. राजनीतिक दलों का गठबंधन चुनाव से पहले भी हो सकता है और नतीजों के बाद भी. लोकसभा में विपक्ष के नेता का पद लेने के लिए विपक्षी पार्टी के पास कम से कम कुल सीटों की 10 फ़ीसदी संख्या होनी चाहिए, यानि 55 सीटें. 2014 के आम चुनाव में मुख्य विपक्षी पार्टी कांग्रेस को सिर्फ़ 44 सीटें ही मिल पाई थीं. इस प्रकार से मोदी सरकार में विपक्ष ही नहीं था. इसके बाबजूद खुद के दम पर बहुमत खो देने वाली ऐसी पहली सरकार भी बनी.  


भाजपा ने 2014 में 282 सीटों के साथ बहुमत पाया था, लेकिन समय निकलते भारतीय जनता पार्टी के 268 सदस्य ही लोकसभा में रह गए. कुछ सीटों को बीजेपी ने उपचुनाव में गंवा दिया. पार्टी के कुछ लोकसभा सदस्यों ने जैसे बीएस येदियुरप्पा और बी श्रीरामुल्लू ने विधानसभा चुनाव लड़ने के लिए लोकसभा से इस्तीफ़ा दे दिया था. लेकिन फिर भी गठबंधन वाले राजनीतिक दलों के सहयोग से बीजेपी की सरकार सुरक्षित रही. 





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