कर्जमाफी पर आरोप प्रत्यारोप के बाद उठ रहे ये सवाल, FIR बनती है, पता तो चले कौन डाल रहा है असली किसानों के हकों पर डाका?


कहीं ऐसा तो नहीं एक के बाद दुसरी गलती करते चले गए, मामला फंसा तो सांठ-गाँठ कर आवेदन बदलवा दिया. FIR अवश्य हो, ताकि 'दूध का दूध, पानी का पानी' हो जाए. अन्यथा सांडण की लड़ाई में बागड़ का कुचला जाना तय है..


भोपाल से 
डॉ. अरविन्द जैन 

मध्यप्रदेश में इन दिनों किसान कर्जमाफी का मुद्दा जोरों पर है. पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने आरोप लगाया कि कर्ज माफी नहीं हुई, किसानों के साथ धोखा किया गया तो कमलनाथ सरकार ने शिवराज के भाई का ही नाम उछाल दिया कि ये लो आपके भाई की भी कर्जमाफी हुई. अब तो माफ़ करो महाराज, लेकिन नहीं. इस पर भी मामला शांत नहीं हुआ शिवराज फिर बोले जब आवेदन ही नहीं किया तो कर्जमाफी कैसे हो गई? तो कमलनाथ सरकार ने शिवराज के भाई का आवेदन मीडिया में बाँट दिया. लेकिन अब भाई रोहित सिंह सामने आकर कह रहे हैं कि मैने कोई आवेदन नहीं किया. कांग्रेस के पास जो आवेदन है, वो कूटरचित है. बनाने वाले के खिलाफ FIR होनी चाहिए. 


भाजपा नेताओं ने गुरूवार को मुख्यमंत्री कमलनाथ के निवास पर जाकर पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के भाई रोहित सिंह को ही प्रस्तुत कर दिया. रोहित चौहान के साथ मुख्यमंत्री आवास पर पहुंचे भाजपा नेताओं ने कहा कि सरकार और कांग्रेस की जालसाजी का पर्दाफाश करने वे सब यहां आए है. कांग्रेस, किसानों की कर्जमाफी को लेकर किसानों को धोखा तो दे ही रही है, साथ ही साथ राजनैतिक टुच्चागिरी करने में भी कोई कसर नहीं छोड़ रही है, क्योंकि जिस रोहित चौहान का कर्जमाफ करने की बात कांग्रेस द्वारा की जा रही है, उन रोहित चौहान ने आज संभाग आयुक्त, आईजी, कलेक्टर, एसपी और थाना प्रभारी को आवेदन देकर कूटरचित दस्तावेज बनाने वालों के विरूद्ध अपराध दर्ज करने के लिए कहा है. 


इस अवसर पर रोहित चौहान का कहना रहा कि 'मैं आयकर दाता हूं, कर्जमाफी आवेदन कर ही नहीं सकता. श्री चौहान ने कहा कि सीहोर जिले के बुधनी गांव में उनकी कृषि भूमि है, लेकिन इसके साथ-साथ वे व्यवसाय भी करते हैं. वे करदाता हैं, इसलिए उन्हें यह भली-भांति ज्ञान है कि करदाता कर्जमाफी के दायरे में नहीं आते. इसलिए उन्होंने किसी प्रकार का आवेदन सरकार को नहीं किया है. साथ ही उन्होंने कहा कांग्रेस कार्यालय में मेरा जो आवेदन दिखाया है, वह पूरी तरह फर्जी है. इसमें हस्ताक्षर हिन्दी में हैं, जबकि वह अंग्रेजी में करते हैं. श्री रोहित ने जालसाजी करने वाले लोगों के विरूद्ध आपराधिक प्रकरण दर्ज कर कठोर कार्यवाही करने का निवेदन किया है.


अब तक एक दुसरे पर आरोप प्रत्यारोप चल रहे थे, लेकिन अब मामला सीरियस हो गया है. मामले में एक साथ कई सवाल भी पैदा हो गए हैं - 

आखिर पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के भाई रोहित चौहान का आवेदन उन्होंने नहीं दिया तो किसने यह आवेदन दे दिया? 

आवेदन गाँव में ही लिए गए थे. आवेदन ग्राम के सचिव और नोडल पटवारी ले रहे थे. जो ग्राम कि हर किसान को व्यक्तिगत पहचानते हैं, ऐसे में यह कैसे हो सकता है कि वे पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के भाई रोहित चौहान का आवेदन किसी और से प्राप्त कर लें? 

सवाल यह भी कि 
यदि यह मामला इतने ऊपर तक नहीं उठता तो रोहित सिंह को अपनी कर्ज माफी का कभी पता ही नहीं चलता क्या? 

और जब किसानों की कर्जमाफी की सारी जानकारी ऑनलाइन दर्ज है. पोर्टल पर आवेदन दर्ज होने के साथ ही आवेदक के पास मैसेज जाता है. फिर यह कैसे हो सकता है कि कर्ज माफी हो गई, का उनके पास कोई मैसेज तक नहीं आया हो, फिर उन्होंने तब से अब तक क्यों नहीं बताया?

..और चाचा निरंजन सिंह की बात क्यों नहीं? 
इसी के साथ एक यह बात भी BJP ने शिवराज सिंह के किसान भाई रोहित सिंह को तो पेश कर दिया, लेकिन चाचा निरंजन सिंह को क्यों नहीं? चाचा निरंजन सिंह का कर्ज भी माफ कर दिया गया है, उस पर भी स्थिति सामने आना चाहिए या नहीं? 

अब यह न कहना कि लक्ष्मी किसे बुरी लगती है? सो चुप रहा. 
यह देखा जाना चाहिए कि फर्जी आवेदन से कर्जा माफ़ हो गया, तो उसकी सूचना उन्हें कब मिली? और नहीं मिली तो क्यों नहीं मिली? जब इस बात का हर पल का SMS किसान के पास जाना था? या क्या अब तक वह चुप्पी साध कर पैसा हजम करने का सोच रहे थे?  अब यह न कहना कि लक्ष्मी किसे बुरी लगती है? सो चुप रहा. 

सांडण की लड़ाई में बागड़ का कुचला जाना तय     
कहीं ऐसा तो नहीं कि एक के बाद दुसरी गलती करते चले गए और अब जब मामला फंसता दिखा तो कहीं सांठ-गाँठ कर आवेदन बदलवा दिया गया. अब ऐसे में FIR अवश्य होनी चाहिए, जालसाजी करने वाले लोगों के विरूद्ध आपराधिक प्रकरण दर्ज कर कठोर कार्यवाही होना ही चाहिए, अन्यथा इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता कि सांडण की लड़ाई में बागड़ का कुचला जाना तय है. मामले का पटाक्षेप कर्ज माफी योजना में लगे ग्राम सचिव, नोडल अधिकारी पटवारी पर गाज गिरा कर ही होगा.  

BJPविधायक कमल पटेल की पत्नी ने भी लिया कर्ज़माफी का फायदा    
कांग्रेस ने न केवल दस्तावेज़ जारी कर दावा किया कि ये शिवराज के भाई रोहित सिंह और दूसरे रिश्तेदारों के कर्जमाफी के दस्तावेज़ हैं, बल्कि शिवराज के रिश्तेदारों के खाते में किसान कर्ज़माफ़ी की राशि की भी जानकारी भी सार्वजनिक कर दी. कांग्रेस सरकार का कहना है शिवराज के रिश्तेदारों ने आयकरदाता होने के बाद भी योजना का गलत तरीके से फायदा लिया, तो इसकी जांच होगी. कांग्रेस ने शिवराज पर लगातार कर्जमाफी के मुद्दे पर झूठ बोलने का आरोप लगाया है. वहीं जानकारी मिल रही है शिवराज के रिश्तेदारों के साथ ही बीजेपी विधायक कमल पटेल की पत्नि ने भी कर्ज़माफी का फायदा लिया है. कुल मिला कर कहा जा सकता है कि कर्ज माफी में असली किसान भले मर रहा हो, नकली किसान लाभ ले रहे हैं. और ऊपर से सीनाजोरी भी की जा रही है. 

इसलिए FIR अवश्य होनी चाहिए, आखिर यह पता तो चले कि किसान कर्ज माफी के जरिये असली किसानों के नाम पर, उनके हकों पर डाका कौन डाल रहा है? 

Share on Google Plus

News Digital India 18

पाठकों के सुझाव सदा हमारे लिए महत्वपूर्ण है ..

0 comments:

Post a Comment

abc abc