उजली खबर, राजपूत परिवार के व्यक्ति ने दलित दूल्हे को दी अपनी घोड़ी, आगे रह कर निकलवाई बारात


ऊंची जाति के लोगों द्वारा दलित समाज के व्यक्ति को घोड़े पर बारात निकालना अखरता रहा है. अक्सर इस तरह की घटनाएं सामने आती रहती हैं. ये घटनाएं गुजरात, राजस्थान ही नहीं देश भर से मिलती रहती हैं. हाल में गुजरात के साबरकांठा के प्रांतिज तहसील का मामला ही ले लें, यहाँ दलित समाज के व्यक्ति को घोड़े पर बारात निकालने को रोकने के लिए सड़कों पर यज्ञ और हवन तक किए गए. इसके बाद वहां हिंसा भड़की. पुलिस को लाठीचार्ज करना पड़ा, लेकिन अब गुजरात से ही एक नई खबर उजाले की आ रही है.  

गुजरात के भावनगर जिले की गारियाधार तहसील के वेलावदर गांव में गारियाधार के दलित युवक की बारात निकालने के लिए चिन्तित दूल्हे के पिता को गांव के काठी क्षत्रिय राजपूत समाज के व्यक्ति ने मदद करते हुए न केवल अपनी घोड़ी उपलब्ध करवाई, बल्कि, बारात के दौरान सुरक्षा भी मुहैया करवाई.

गारियाधार निवासी जिग्नेश डी. वणजारा की बारात लेकर वेलावदर पहुंचे. दिनेश अंजारिया ने फोन पर दिगराजसिंह गोहिल से बातचीत की. उन्होंने कहा कि वे गारियाधार से बारात लेकर वेलावदर पहुंच रहे हैं. वेलावदर गांव में राजपूतों के 150, पटेलों के 200 व दलितों के मात्र 10 घर हैं.
दिनेश के अनुसार गांव में राजपूतों को विवाह की जानकारी देने पर आगे बढ़कर अपनी घोड़ी उपलब्ध करवाई और विवाह समारोह में भी साथ रहे. डी.जे. की धुन पर नाचते-गाते बारात निकाली गई. बताया जा रहा है इस गांव में पूर्व में भी दलित दूल्हों की बारात निकली जा चुकी है. 

दिगराजसिंह ने लोगों से अपील की है कि किसी की बारात रोककर परेशान ना किया जाए. सभी वर्गो से कहना चाहता हुं कि हम सब हिंदु हैं और जितना हक हमें घोड़ी पर चढ़ने का है, उतना हमारे दलित समाज के लोगों का भी है, तो प्लीज उनके साथ ऐसा ना करे और अगर कोई ऐसा करे तो उसे रोकें. हमें दलित समाज के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़े होना चाहिए. 

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