कांग्रेस विधायक आरिफ मसूद के Bhopal Jail DG वाले बयान पर TI समर ने पूछा 'क्या फिर दोहराना चाहते हो ग़दर?'




''लोकतंत्र ने आरिफ मसूद को माननीय विधायक आरिफ मसूद जी बनाया है. और इनके बोल हैं मुख्यमंत्री निर्णय लें या मैं खुद देख लूंगा. अर्थात सीधी धमकी. याद रहे यह भोपाल है, यहां अब लिली टाकीज कांड दुबारा नहीं हो सकेगा, किन्तु क्या आगामी दिनों में भोपाल टकराहट की चिनगारियाँ देखने को तैयार रहे? यह सवाल उठाया है टीआई चौधरी मदन मोहन 'समर' ने. हाल में उनकी कांग्रेस विधायक आरिफ मसूद के Bhopal Jail DG वाले बयान पर 'क्या फिर दोहराना चाहते हो ग़दर?' पोस्ट सोशल मीडिया पर चर्चा में हैं.'' 



टीआई चौधरी मदन मोहन 'समर' पुलिस की सेवा में होने के साथ साथ एक अच्छे कवि भी हैं. वह ओजस्वी कविताओं के लिए प्रसिद्द हैं. पुलिस महकमे के अलावा भी उनका नाम किसी परिचय का मोहताज नहीं है. हाल में टीआई चौधरी मदन मोहन 'समर' ने कांग्रेस विधायक आरिफ मसूद के Bhopal Jail DG वाले बयान का वीडियो शेयर करते हुए सख्त लहजे में पोस्ट डाली है. इसमें पूछा गया है 'क्या फिर दोहराना चाहते हो ग़दर?' 

यह लिखा उन्होंने, देखें पोस्ट - 
''यह वीडियो देखें। यह विधायक श्री आरिफ मसूद जी हैं। जी हां विधायक श्री आरिफ मसूद जी। मध्य प्रदेश विधानसभा में भोपाल मध्य विधानसभा क्षेत्र से निर्वाचित विधायक श्री आरिफ मसूद जी। यह मुख्यमंत्री कमलनाथ को धमकी देते हैं कि डीजी जेल श्री संजय चौधरी को हटाओ नहीं तो मैं खुद देख लूंगा। खुद देख लूंगा से क्या तातपर्य है? वही न जो गदर फ़िल्म पर प्रतिबंध लगाने के लिए इन्होंने कहा था और दिग्विजय जी ने प्रतिबन्ध नहीं लगाया था तो इन्होंने खुद देख लिया था। खुद ही देखा था भोपाल में दंगा करवा कर, जी इन्होंने खुद ही देखा था लिली टाकीज को जला कर और इन्होंने खुद ही देखा था वर्दीधारी पुलिस पर अपने अनुयायियों के साथ हमला करके।''


डीजी जेल से सम्बन्ध कैसे खराब हुए?

आगे उन्होंने लिखा है ''एक विधायक किसी दरोगा, टीआई, डिप्टी, एसपी य आईजी को हटाने की बात करे तो माना जाता है कि विधायक महोदय के इनसे सम्बन्ध खराब हो गए होंगे। ये विधायक का हस्तक्षेप नहीं मान रहे होंगे। लेकिन डीजी जेल से सम्बन्ध कैसे खराब हुए? जेल में विधायक का क्या हस्तक्षेप? यह विचारणीय प्रश्न है। भोपाल जेल में अनेक खतरनाक कैदी हैं।वे कौन हैं यह सब जानते हैं। आखिर विधायक उन कैदियों के सरपरस्त बनने का मौका क्यों छोड़े। क्या सुविधा चाहिए उन्हें, क्या बाहरी सामग्री भेजना चाहते है ये विधायक जी जेल के भीतर।''

लोकतंत्र ने आरिफ मसूद को माननीय विधायक आरिफ मसूद जी बनाया
उन्होंने लोकतंत्र की ताकत पर मत रखते हुए आगे लिखा है ''लोकतंत्र ने आरिफ मसूद को माननीय विधायक आरिफ मसूद जी बनाया है। और इनके बोल हैं मुख्यमंत्री निर्णय लें य मैं खुद देख लूंगा। अर्थात सीधी धमकी। याद रहे यह भोपाल है यहां अब लिली टाकीज कांड दुबारा नहीं हो सकेगा। किन्तु क्या आगामी दिनों में भोपाल टकराहट की चिनगारियाँ देखने को तैयार रहे?''



उल्लेखनीय है मध्‍य प्रदेश में कांग्रेस विधायक आरिफ मसूद ने कल बुधवार को राज्‍य के जेल डीजी संजय चौधरी से चल रहे उनके विवाद पर बोलते हुए मुख्‍यमंत्री कमलनाथ से साफ तौर पर दो टूक शब्‍दों में कहा कि 'मुख्‍यमंत्री जेल डीजी हो हटाएं. अगर उन्‍होंने ऐसा नहीं किया तो मैं खुद उन्‍हें देख लूंगा.' इस का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ. 

बताया जा रहा है असल कांग्रेस विधायक आरिफ मसूद जेल में बंद खूंखार आतंकियों और कैदियों को बाहरी खाद्य सामग्री दिलवाना चाहते थे. जेल डीजी संजय चौधरी जेल में बाहरी खाद्य सामग्री नहीं देने पर अड़े थे. सिमी एनकाउंटर के बाद से जेल मैनुअल में बदलाव के तहत कैदियों को बाहरी खाद्य सामग्री देना बंद कर दिया गया है.


एक परिचय : चौधरी मदन मोहन 'समर'

टीआई चौधरी मदन मोहन 'समर' पुलिस की सेवा में वर्तमान में भौंरी पुलिस ट्रेनिंग स्कूल में तैनात हैं. हालांकि चौधरी मदन मोहन 'समर' किसी परिचय के मोहताज नहीं हैं फिर भी कोई नहीं जानते हों उनके लिए एक परिचय. उनकी एक यह प्रोफ़ाइल फोटो उनका काफी अच्छा परिचय दे देती है. खुद ही देख लीजिये- 

''विवाद का क्या... अब इस पर भी विवाद ... यह प्रोफ़ाइल फोटो वर्ष 2013 से मेरी प्रोफ़ाइल फोटो है, जब मैं बैतूल में कोतवाल था। यह बच्ची "कंचू" दुर्दांत आपराधिक समुदाय परदियों की है, जिनके डेरे में जाना कैसा होता है, इन्हें जानने वाले ही जानते हैं। तब एक अबोध धूलसनी वस्त्रहीन बच्ची को फ्रॉक पहना कर गोदी में लेकर फोटो खिंचवाना क्या अपराध है? इस बच्ची को क्या यह मालूम है कि यह पारदी है या पुजारी? आपत्ति है कुछ मित्रों को कि पुलिस ने अपराधी समुदाय की बच्ची को गोद में क्यों उठाया है। तीन दिन से एक व्हाट्सएप ग्रुप पर यह चल रहा है। अब बताओ आप कौन सी पुलिस चाहते हो। किस संवेदनशीलता की बात की जाए इस समाज से।
लेकिन कोई बात नहीं। यह सब तो होता ही है...'' 





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