BJP को दलित वोट तो चाहिए, लेकिन दलित नेता नहीं, गूंगा-बहरा बने रहो -उदित राज



टिकट कटने के बाद बीजेपी सांसद उदित राज ने न केवल नाराजगी जाहिर की थी, बल्कि सोशल मीडिया ट्विटर से चोकीदार भी हटा लिया था. बाद में बीजेपी के कुछ नेताओं ने उन्हें मनाया भी. तब एक बार फिर चोकीदार बन गए, लेकिन रास नहीं आया और अंततः जैसा कि लगभग तय माना जा रहा था कांग्रेस ज्वाइन कर लिए.  

पिछले 24 घंटे से जारी सियासी घटनाक्रमों के बीच बुधवार सुबह उन्होंने कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी से मुलाकात की. महासचिव केसी वेणुगोपाल, दिल्ली कांग्रेस अध्यक्ष शीला दीक्षित और प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला की उपस्थिति में कांग्रेस में शामिल होने की औपचारिकता पूरी करने के बाद उदित राज ने भाजपा पर खूब निशाना साधा. उन्होंने कहा कि भाजपा को दलित वोट तो चाहिए, लेकिन दलित नेता नहीं. उन्होंने कहा भाजपा में रहना है तो गूंगा-बहरा बने रहना पड़ता है. 

यह खोला बड़ा राज रामनाथ कोविंद टिकट चाहते थे, लेकिन नहीं दिया, चुप रहे तो उन्हें राष्ट्रपति बना दिया
उन्होंने स्वीकार किया कि भाजपा टिकट देती तो चुनाव लड़ता. टिकट कटने की वजह यह है कि दो अप्रैल 2018 को जब दलित सड़कों पर आए, तो मैंने समर्थन किया. उन्होंने कहा कि 2014 में रामनाथ कोविंद मेरे पास आए थे. कहा कि मेरा कुछ कराइए. वह भी टिकट चाहते थे, लेकिन नहीं दिया. वह चुप रहे तो उन्हें राष्ट्रपति बना दिया गया. हो सकता है, मैं चुप रहता तो मुझे भी पीएम बना देते. लेकिन मैं गूंगा-बहरा बन कर नहीं रह सकता. 

इससे पहले उन्होंने अपने ट्विटर एकाउंट पर लिखा कि अगर मुझे पहले बता दिया गया होता तो इतना कष्ट ना होता. पार्टी को इतना कष्ट क्यों करना पड़ा कि नामांकन के आखिरी दिन एक बजे नाम की घोषणा करनी पड़ी. पहले कह देते तो मुझे कोई तकलीफ नहीं होती. किराएदार हूं, बात मान लेना पड़ता.

चौकीदार से डॉक्टर और फिर चौकीदार बने थे उदित
उत्तर-पश्चिमी दिल्ली से टिकट कटने के बाद भाजपा नेता और सांसद उदित राज ने पहले चौकीदारी छोड़ी, उसके बाद वापस भी ले ली. मतलब ये कि भाजपा से उम्मीदवारी खारिज हो जाने के बाद पहले उन्होंने अपने ट्विटर परिचय में चौकीदार डॉ. उदित राज से 'चौकीदार' शब्द हटाकर डॉ. उदित राज कर दिया. लेकिन कुछ ही घंटे के बाद 'चौकीदार' शब्द वापस जुड़ गया. माना जा रहा है कि, भाजपा से कोई आश्वासन मिलने के बाद उन्होंने ये फैसला किया होगा. उत्तर-पश्चिमी दिल्ली से उनका टिकट काटकर गायक हंस राज हंस को उम्मीदवार बनाया गया है. 

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