जब पास में खड़ा आदमी अचानक हमला न कर बैठे



''... और इन्हीं बाहियात Trolls के आधार पर दूसरों के लिए अपनी अवधारणाएं बनाते रहे तो आपको यह लगने लगेगा कि पता नहीं कब पास में खड़ा आदमी अचानक हमला कर बैठे. यह संभावना भी है. और इनमें उलझने से हमारी जानें ही जाएंगी, हमारे घर ही जलेंगे, यहां तक कि पुलिस भी हमें ही धुनेगी.''
- सीमा राय द्विवेदी

हिंदुओं को लग रहा है कि आने वाले कुछ वर्षों में भारत मुस्लिम राष्ट्र बन जाएगा और भारत में औरंगजेब शासन आ जाएगा.

मुस्लिमों को लग रहा है कि RSS कुछ ही दिनों में ISIS जैसा खूंखार संगठन बन जाएगा और आतंकवाद का रंग भगवा हो जाएगा.

दलितों को लग रहा कि जल्द ही नई संविधान सभा गठित होने वाली है जिसमें मनुस्मृति के नियमों को लागू किया जाना है और उनके विकास में रिवर्स गियर लग जाएगा जो उन्हें सीधे उत्तर वैदिक काल में ले जाएगा.

ये सभी Perceptions कहाँ से उपजे? क्या वास्तव में हमारे आसपास ऐसे हालात पनप रहें हैं या कुछ और??

अगर हम ईमानदारी से विश्लेषण करें तो पाएंगे कि असल में ये सारी अवधारणाएं whatsapp और Facebook पर अंधाधुंध फैलाए जा रहे उन्मादी Trolls का नतीजा हैं ये Trolls लंबे लंबे messages, भड़काऊ photos और तमाम videos की शक्ल में बहुतायत प्रचलित हैं.

अगर हम सोशल मीडिया की छद्म दुनिया से निकलकर अपने आसपास लोगों को देखें तो यकीनन एक सौहार्दपूर्ण भारत नज़र आएगा..

लेकिन अगर हम अभी भी नहीं चेते और इन्हीं बाहियात Trolls के आधार पर दूसरों के लिए अपनी अवधारणाएं बनाते रहे तो आपको यह लगने लगेगा कि पता नहीं कब पास में खड़ा आदमी अचानक हमला कर बैठे. यह संभावना भी है. और इनमें उलझने से हमारी जानें ही जाएंगी, हमारे घर ही जलेंगे, यहां तक कि पुलिस भी हमें ही धुनेगी.....

सावधान रहें, उन्माद और नफरत फैलाने वाली कोई भी पोस्ट न करें, न शेयर करें. 

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News Digital India 18

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