कहानी पारिजात की



एक राजकुमारी थी, जो
सूर्य देव पर मोहित थी।

पाना चाहती थी आफताब को,
बन रानी सूर्य नगरी की।

पर सूर्य देव को इस से इनकार हुआ।
सह ना पायी तिरस्कार को और 
आत्म दाह किया।

जहाँ दफन थी राजकुमारी
उस कब्र पर एक नन्हा सा

फूल खिला, नाम पारिजात हुआ।
पारिजात, प्रेम का जो गवाह हुआ।

हो गोधूलि तब खिल जाता है
रात रानी बन कर आंगन
उपवन को महकाता है।

रजनी जब ढल जाये
और प्रेमी जब सामने आ जाये।

उस से पहले ही विरह अग्नि में
खुद ही तप जाता है।

हो सूर्य उदय उस से पूर्व ही
अश्रू रूप में अपनी 
शाखाओं से गिर जाता है।

है चमत्कारी वरदान ये
उपचार में उपयोगी है।

शिव का है प्रिय पुष्प
और कृष्ण को भी प्रिय ये।

चंदन सी है शीतलता जिसमें 
खुशबू आलीशान है।

रात की रानी कहो या पारिजात
हार सिंगार गुणों की खान है।।

अहमदाबाद, गुजरात   

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