आखिर भगवा रंग में रंगने को क्यों मजबूर हो रहे नरेंद्र भाटी?




पश्चिम उत्तर प्रदेश के गुर्जर समाज में महेंद्र भाटी के बाद अगर किसी नेता की गिनती होती है तो वह नरेंद्र भाटी ही है. नरेंद्र भाटी, महेंद्र भाटी के काफी करीबी रहे हैं तथा गुर्जरों की राजधानी दादरी में समाजवादी पार्टी के सबसे वरिष्ठ नेता माने जाते हैं, लेकिन आज वह अपनी ही पार्टी में बेगाने कर दिए गए हैं. ऐसे समय में जब लोकतंत्र का महापर्व चल रहा है और सभी नेता अपने अपने घरों से निकलकर क्षेत्र में जनता के बीच वोट मांगने के लिए जुटे हुए हैं तो नरेंद्र भाटी घर में ही बैठने को मजबूर है. आखिर क्यों? 



आकाश नागर 

त्तर प्रदेश के पूर्व कैबिनेट मंत्री और सिकंदराबाद से तीन बार विधायक रहे तथा वर्तमान में विधान परिषद सदस्य नरेंद्र भाटी का अपने घर में यू कैद हो जाना हर किसी को अटपटा लग रहा होगा. लेकिन यह समाजवादी पार्टी की ही उदासीनता कही जा सकती है कि भाटी आज पार्टी के कोई स्टार प्रचारक नहीं है. जबकि उनके बाद पार्टी में शामिल हुए उनसे काफी जूनियर नेताओं को पार्टी ने स्टार प्रचारक बना रखा हैं. जिसके चलते वह किसी चुनाव प्रचार में नहीं जा रहे हैं. 


भाटी का मजबूत पक्ष यह है कि वह समाजवादी पार्टी के जनक मुलायम सिंह यादव के बहुत करीबी रहे हैं और शिवपाल यादव के खास माने जाते हैं. पार्टी के राष्टीय अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश सिंह यादव के कैंप में अपनी दमदार उपस्थिति दर्ज नहीं करा पाना उनका कमजोर पक्ष माना जाता है. शायद यही वजह रही कि अखिलेश यादव ने उनको आज दोयम दर्जे का नेता बना कर रख दिया है. चुनावों में भाटी को कोई जिम्मेदारी न सौपना इसे सिद्ध करता है. होना तो यह चाहिए था कि अखिलेश यादव उन्हें उनके राजनीतिक अनुभव को देखते हुए तथा उनकी परिपक्वता का फायदा उठाते और पार्टी का स्टार प्रचारक बनाते. लेकिन ऐसा हुआ नहीं. 

2014 के लोकसभा चुनाव में जिस समाजवादी पार्टी ने नरेंद्र भाटी को अपनी पार्टी का गौतम बुध नगर से उम्मीदवार बनाया था और वह दुसरे नंबर पर रहे थे , आज वह कहीं नहीं दिख रहे. ऐसे में अपनी पॉल्टिकली डेड होने का डर नरेंद्र भाटी को सता रहा है. जिसके कारण वह भाजपा में जाने को मजबूर हो रहे हैं. हालांकि कल बड़े जोर से चर्चा थी कि वह केन्द्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह के समक्ष ककोड - झाझर रैली में भाजपा में जाने की औपचारिकताएं पूर्ण करेंगे. लेकिन ऐन वक्त पर उन्होंने अपने कदम पीछे कर लिए. 

सूत्र इसका कारण बताते है कि वह अगर भारतीय जनता पार्टी में शामिल होंगे तो मुख्यमंत्री आदित्यनाथ योगी के समक्ष. क्योंकि उन्हें उत्तर प्रदेश की राजनीति करनी है. अब देखना यह है कि वह कब भाजपा की जॉइनिंग कर रहे हैं. हालांकि सूत्र यह भी कह रहे हैं कि उनके जितने भी समर्थक हैं, उन्हें भाजपा के पक्ष में माहौल बनाने के निर्देश उनके द्वारा दिए जा चुके हैं. 

बहरहाल, वह भाजपा का प्रचार अभी से करने लग गए हैं. इस तरह देखा जाए तो भाटी की तरफ से समर्थको को भगवा रंग में रंगा जा चुका है. बस अब औपचारिकताए ही बाकी है. जनता के सामने उनका साईकिल की सवारी से उतरकर कमल का फूल थामना राजनीतिक सियासत का नया अध्याय माना जाएगा.



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