सजा कम करने के घिघियाता रहा नारायण, महिला भक्त के साथ रेप केस में कोर्ट ने सुनाई उम्रकैद की सजा, एक लाख का जुर्माना भी


रेप जैसा घृणित अपराध करने वाला नारायण सांई सजा कम करने के लिए घिघिया रहा था, मगर कोर्ट नहीं पसीजा. पसीजता भी क्यों? आईपीसी के धारा 376 (बलात्कार), 377 (अप्राकृतिक दुराचार), 323 (हमला), 506-2 (आपराधिक धमकी) और 120-ख (षडयंत्र) के तहत महिला भक्त के साथ रेप के मामले में दोषी पाये गए नारायण साईं को उम्रकैद की सजा सुना दी गई है. 

गुजरात के सूरत में अपर सत्र न्यायाधीश पीएस गढ़वी ने आज नारायण साईं को उम्रकैद और एक लाख रुपये के जुर्माने की सजा का एलान किया. सूरत की एक अदालत ने 26 अप्रैल को उसे दोषी ठहराया था और 30 अप्रैल को सजा सुनाने का एलान किया था. नारायण साईं रेप के मामले में जोधपुर जेल में बंद आसाराम के बेटे हैं.

साल 2002 में लगे आरोपों के मुताबिक, नारायण साईं ने सूरत के जहांगीरपुरा आश्रम में अनुयायी के साथ रेप किया और बार-बार 2004 तक छेड़छाड़ करते हुए अपने साथियों की मदद से पीड़िता को जान से मारने की धमकी दी. 6 अक्टूबर 2013 को पीड़िता ने इस मामले में सूरत में एफआईआर दर्ज करवाई थी. साल 2013 में आसाराम की गिरफ्तारी के बाद सूरत की दो बहनों ने 2013 में पुलिस में दर्ज अपनी शिकायत में आरोप लगाया था कि आसाराम बापू और नारायण सांई ने उनका यौन उत्पीड़न किया था.

इनमें से एक बड़ी बहन ने आरोप लगाया कि जब वह उसके अहमदाबाद के आश्रम में रह रही थी तो 1997 से 2006 के बीच आसाराम ने उसके साथ बलात्कार किया. छोटी बहन ने आरोप लगाया था कि सूरत के जहांगीपुरा इलाके में बने आश्रम में 2002 से 2005 के बीच रहने के दौरान नारायण सांई ने उसके साथ कई बार दुष्कर्म किया.

तब पुलिस ने आरोपी नारायण साईं, गंगा, जमुना, हनुमान और अन्य 7 लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की. 4 दिसंबर 2013 को नारायण साईं हनुमान और ड्राइवर हरियाणा के कुरुक्षेत्र के पास गिरफ्तार किया गया. तब से नारायण साईं जेल में ही है. सूरत सेशन कोर्ट के जज पीएस गढ़वी ने 19 अप्रैल को इस केस की सुनवाई के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया था और 26 अप्रैल को उसे दोषी ठहराया था.

कोर्ट ने शुक्रवार को उसके अलावा तीन महिलाओं सहित चार सहयोगियों को भी दोषी ठहराया था. 47 वर्षीय नारायण सांई 2013 से ही लाजपोर जेल में बंद है. नारायण सांई को आईपीसी के धारा 376 (बलात्कार), 377 (अप्राकृतिक दुराचार), 323 (हमला), 506-2 (आपराधिक धमकी) और 120-ख(षडयंत्र) के तहत दोषी पाया गया था. इस मामले में कुल 11 अभियुक्त थे और इनमें से छह को बरी कर दिया गया है.
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News Digital India 18

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