जनप्रतिनिधि की संवेदनहीनता या सियासत?


एक जनप्रतिनिधि वह होता है, जो अन्याय के विरुद्ध खड़ा होता है और न्याय के लिए लड़ाई लड़ता है, लेकिन दादरी विधानसभा क्षेत्र में उल्टा हो रहा है. क्षेत्र के जनप्रतिनिधि मास्टर तेजपाल नागर अपनी संवेदनहीनता के लिए जाने जाते हैं. कचैड़ा गांव में जो कल हुआ उसे संवेदनहीनता कहे या सियासत? 




आकाश नागर 

दादरी विधानसभा क्षेत्र में चारों ओर भाजपा विधायक तेजपाल नागर के उस कदम की निंदा हो रही है, जिसमें वह रात के अंधेरे में बादलपुर थाने में दुरियाई गाँव के उन आरोपियों से मिले, जिन पर कचैड़ा के बेकसूर लोगों पर गोलियां चलाने के आरोप हैं. क्या यह एक जनप्रतिनिधि को ऐसा करना चाहिए कि वह उन आरोपियों से मिले, जो निहत्थे लोगों पर गोली चलाने के आरोपी हैं? और जो बेचारे राजनीति का शिकार होकर गोलियां खाकर आज गंभीर अवस्था में हॉस्पिटल में जिंदगी और मौत के बीच जी रहे हैं, उनको देखने तक की फुर्सत विधायक तेजपाल नागर के पास नही है?


कहा जाता है कि एक मास्टर के अंदर भावनात्मक दिल होता है. जो संवेदनाओं से भरपूर होता है, लेकिन यह मास्टर तेजपाल नागर हैं, जो हास्पिटल के आईसीयू में एडमिट गाँव के युवाओं को 26 घंटे बीत जाने के बाद भी देखने नही गये. समझ में नही आता कि वह आज ऐसा क्यों कर रहे हैं कि जो कोई सुन रहा है, वही उन पर थू-थू कर रहा है. कचैडा और दुरियाई गाँव के दरमिया महज 400 मीटर का दायरा है. लेकिन आज दुरियाई गाँव सियासत के जाल में इस कदर जकड गया है कि दोनो गाँवो के लोगो के बीच हजारो मील की दुरी पैदा हो गयी है. 

आज हर कोई जानता है कि भाजपा नेताओं ने उनके मन में राजनीतिक द्वेष भाव पैदा कर कचैडा के लोगो पर अपना निशाना साधने का कुचक्र चला है. वह भाजपा नेता जिनको गाँव के लोगों ने सात माह पूर्व ही बहिष्कृत कर दिया था. उनकी गाँव में एंट्री बंद कर दी थी. गाँव में एंट्री नॉट एलाऊड के बोर्ड तक टंग गये थे. आज कचैडा और दुरियाई गाँव के लोगो को आपस में भिडाकर वह अपनी अपनी राजनीतिक रोटिया सेक रहे हैं. 

शायद वह जानते नही हैं कि जाने-अनजाने कितनी बडी भूल कर रहे हैं. 
क्षेत्र में कहा जा रहा है भाजपा नेता कचैडा और दुरियाई के लोगों को राजनीति के भ्रम जाल में फसाने से पहले एक बार दोनों गांव के इतिहास को जरूर जांच लें. आज से करीब साढे 450 वर्ष पूर्व कचैड़ा के पूर्वजो ने ही अपनी जमीन का आधा हिस्सा उस ब्राह्मण को दिया था, जिसको बुलाकर पास में दुरियाई गाँव बसाया गया था. बाद में उस ब्राह्मण ने अपने एक जजमान जाट को बुला लिया था. आज जो दुरियाई गाँव बसा है वह कचैडा की जमीन पर बसा है. कचैडा गाँव का एहसान वह कभी नही भूल सकते हैं. 

लोग कह रहे हैं विधायक जी मत भूलिए कि वोटो की राजनीति पाँच साल में आती है, लेकिन इस फसल को काटने में असफल रहने पर किसान पर जुल्म नही ढहाए जाते हैं. सर्वविदित है कि 2017 में भाजपा प्रत्याशी मास्टर तेजपाल नागर को कचैडा को लोगो ने बहुमत से वोट देकर जिताया था, जबकि इससे पूर्व 2014 में डाँ महेश शर्मा को सबसे अधिक वोट देकर लोकसभा में पहुंचाया था. लेकिन जब कचैड़ा के किसानों पर वेब सिटी आफत बनकर बरसी और 63 किसानों को अपनी फसलो को बर्बाद करने से रोकने के विरोध में जबरन जेल में ठूंस दिया गया तो भाजपा के विधायक और सांसद दोनों ने इनको न्याय दिलाना तक मुनासिब नहीं समझा. 

कई बार गांव के लोग विधायक तेजपाल नागर और सांसद डॉ महेश शर्मा के दर पर दरबदर हुए. लेकिन हर बार खाली हाथ लौटे. जैसे प्रदेश और देश में भाजपा की सरकार है. डबल इंजन की सरकार होते हुए अगर आप दोनों जन प्रतिनिधि चाहते तो कचैडा गांव के किसानों को न्याय जरूर मिलता. लेकिन विधायक और सांसद ने कचैड़ा के किसानों की बजाय एक धनपति, बाहुबली बिल्डर (वेवसिटी) का साथ देना मुनासिब समझा. 

अब लोग कह रहे हैं कि कहीं आपकी फितरत में ही कचैड़ा के खिलाफ रहे लोगों को उकसाने का काम तो नहीं. बताया आजाता है पहले कचैड़ा के खिलाफ वेव सिटी के गुंडों को उकसाते रहे हैं.  और अब जब कचैड़ा के बेकसूर युवाओं पर दुरियाई में गोलियां चलाई जा रही हैं, सरियों से रॉड से उनके सिर फाड़े जा रहे हैं. उनके हाथ पैर तोडे जा रहे हैं. उनको सरेआम गोलियों का शिकार बनाया जा रहा है, तो विधायक तेजपाल नागर उनके गम में शरीक होने के बजाय उनके घाव पर मरहम लगाने की बजाय आरोपियों के साथ बादलपुर थाने में रात के अंधेरे में गलबैयाँ कर रहे हैं? विधायक जी यह कैसा इंसाफ कर रहे हो? मत भूलिए कि ऊपर वाले की लाठी में आवाज नहीं होती है..

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1 comments:

  1. Jab aapke gaon k kisano ne Jamin ko bech diya wave city wale builder ko to wo kis liye fasal lagayi. Ab aap apni Jamin ka sauda kar chuke ho to kaise aap uske upar apna Adhikar jata sakte ho sir. Jisne kharidi hai Jamin usne paise diye hai uske. Jab aapne paise le liye to Baar Baar kis liye mukar ke ladai chidwa re ho. Is baat ko aap apne gaon walo ko samjhate kyu nahi. Jo bik gya wo aapka nhi rha aur Jo aapka nhi rha uspar aapka koi Adhikar nhi. Baad mein sarkar ko Doshi therana uchit nhi hai Nagar ji. Aap bhi apni jamin par kisi aur ko malikana haq nhi jatane doge phir chahe aapko kuch bhi karna pade. Aise hi koi aur bhi apni Jamin apko nhi dega chahe usko kuch bhi karna pade. Aapne Jamin bechi, iska paisa liya to ab Baar Baar us Jamin par apna Adhikar jatana band kar dijiye. Aise aap apne bhole bhale gaon walo ko bhadka trh hai aur apna ullu sidha kar rhe hai.
    Aur dusri baat Kachera walo ne is ladai mein kitne hi Nirdosh logo ke Naam FIR karwayi hai ye bhi pata kare ki jehmat uthaye aap. Is apsi ladai ko siyasi rang dene ki koshish na kare. Duriyai aur Kachera ke log bhaiyo ki tarah hai, aur bhaiyo m ladai ho hi jati hai isko siyasi rang dekar aap bhole bhalr logo ke bich m darar paisa kar rhe hai. Ye katai sobhniye nhi hai Nagar ji.

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