छापे राजनीतिक द्वेष से मारे जा रहे, कांग्रेस कर रही एक बड़ी चूक





''माना कि छापे राजनीतिक द्वेष से मारे जा रहे हैं, पर आपके पास से माल कैसे निकल रहा है? और जो निकल रहा है वह ठीक है क्या? या यह कहें कि बस यही राजनीति है कि अपनी जेब, अरे नहीं तिजोरियां भरे जाओ. हम समझते हैं ऐसे में जब लोकसभा चुनाव सर पर हैं कांग्रेस एक बड़ी चूक कर रही है.'' 

चित्रांश / राकेश तिवारी  



कहा जा रहा है लोकसभा चुनाव से ठीक पहले आयकर विभाग ने छापेमारी करके मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री कमलनाथ की मुश्किलें बढ़ा दी हैं, लेकिन खुद मुख्यमंत्री कमलनाथ मामले की पूरी जानकारी हो जाने के बाद अभी तक चुप रह कर और अपने ओएसडी प्रवीण कक्कड़ सहित अन्य का बचाव करते दिख रहे हैं असल में उनकी मुश्किलें इससे बढ़ने वाली है. जो काम देर सबेर करना पड़ेगा, बेहतर होता मुख्यमंत्री यह कदम तत्काल उठाते. 


क्यों एक आरटीआई एक्टिविस्ट अजय दुबे को निर्वाचन आयोग में शिकायत करना पड़ रही है? 

कल शनिवार रात करीब 3 बजे कमलनाथ के ओएसडी के घर IT का छापा पड़ा. छापे के बारे में लोगों को सुबह पता चला, जब उनके इंदौर स्थ‍ित घर के बाहर अधिकारियों की काफी भीड़ देखी गई. मुख्यमंत्री कमलनाथ के ओएसडी प्रवीण कक्कड़ पर आय से अधिक संपत्त‍ि का मामला बताया जा रहा है. छापेमारी की कार्रवाई अभी भी जारी है. सूत्रों के अनुसार करीब 300 अधिकारियों की टीम देश भर के 50 ठिकानों पर छापेमारी कर रही है. इनमें से सीएम कमलनाथ के ओएसडी के अलावा उनके भांजे रातुल पुरी, अमीरा ग्रुप और मोजेर बेयर पर भी छापे मारे गए हैं. प्रदेश में भोपाल, इंदौर के अलावा गोवा और दिल्ली में भी छापेमार कार्रवाई की गई है. मुख्यमंत्री कमलनाथ के भांजे रातुल पुरी मनी लॉन्ड्रिंग मामले में घिरे हुए हैं. कमलनाथ के मुख्यमंत्री बनते ही भूपेंद्र गुप्ता ओएसडी बने थे, लेकिन कुछ ही समय बाद उन्हें हटाकर प्रवीण कक्कड़ को बना दिया गया था.


आयकर विभाग की इस कार्रवाई के बाद बीजेपी हमलावर हो गई है. बीजेपी के महासचिव कैलाश विजयवर्गीय ने ट्वीट कर कांग्रेस पर निशाना साधा है. उन्होंने लिखा है 'इससे एक बात तो साफ़ हो गई कि जो चोर है उसे ही चौकीदार से शिकायत है.'

इधर कांग्रेस सम्बंधित के खिलाफ बजाय कोई कार्यवाही करने पद से हटाने के बचाब करती दिख रही है, इससे एक प्रकार से मुख्यमंत्री कमलनाथ खुद ही अपनी मुश्किलें बढ़ाते दिख रहे हैं. जो काम देर सबेर करना पड़ेगा. बेहतर होता मुख्यमंत्री यह कदम तत्काल उठाते. ओएसडी प्रवीण कक्कड़ को पद से हटाने क्यों एक आरटीआई एक्टिविस्ट अजय दुबे को निर्वाचन आयोग में शिकायत करना पड़ रही है?



इधर बीजेपी के आरोपों का मध्यप्रदेश कांग्रेस मीडिया विभाग की अध्यक्षा शोभा ओझा ने पलटवार किया है. उन्होंने मुख्यमंत्री कमलनाथ के करीबियों पर की गई आयकर विभाग की कार्रवाई को, तीन राज्यों में मिली करारी हार से उत्पन्न प्रधानमंत्री मोदी की बौखलाहट करार दिया है.

उन्होंने कहा है कि 'चुनाव के ठीक पहले कांग्रेस पार्टी की छवि खराब करने और राजनीतिक दबाव बनाने का यह असफल प्रयास है. अभी तीन दिन पहले जब अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री पेमा खांडू के काफिले की चेकिंग के दौरान 1.80 करोड़ रुपये मिले और जिसकी प्रामाणिक शिकायत कांग्रेस पार्टी ने की. तब क्यों जांच एजेंसियों और चुनाव आयोग ने उस पर कोई कार्रवाई नहीं की, जबकि कांग्रेस पार्टी ने सीधा शक जाहिर किया था कि वह पैसा वहां दूसरे दिन होने वाली "चोर चौकीदार" की रैली के लिए इस्तेमाल होने वाला था.'

शोभा ओझा का कहना है कि 'यदि ये छापे राजनीतिक द्वेष से नहीं मारे जा रहे हैं तो फिर अमित शाह, जय शाह, येदियुरप्पा, शिवराज सिंह चौहान, रमन सिंह के घर छापे क्यों नहीं मारे जा रहे. जिनके नाम कई बड़े भ्रष्टाचारों में सामने आए हैं. यही भाजपा का दोहरा चरित्र है, जिसको पूरा देश देख रहा है और आने वाले चुनावों में करारा जवाब देगा.'

अब लोग सवाल कर रहे हैं कि आपके यह कहने की यह कोई बात नहीं है, देश तो सब देख ही रहा है. बात तो यह है कि यदि अमित शाह, जय शाह, येदियुरप्पा, शिवराज सिंह चौहान, रमन सिंह के घर छापे मारे जायें और वहां से भी माल निकल आये तो क्या इससे आपका आपराध कम या ख़त्म हो जाता है?

लोग सवाल कर रहे हैं कि माना कि छापे राजनीतिक द्वेष से मारे जा रहे हैं, पर आपके पास से माल कैसे निकल रहा है? और जो निकल रहा है वह ठीक है क्या? या यह कहें कि बस यही राजनीति है कि अपनी जेब, अरे नहीं तिजोरियां भरे जाओ. हम समझते हैं ऐसे में जब लोकसभा चुनाव सर पर हैं कांग्रेस एक बड़ी चूक कर रही है.




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