गांवों में ही रोजगार पैदा कर रोका जाए पलायन


''हमारा देश गांवों का देश है और अस्सी फीसदी आबादी गांवों में निवास करती है बस जरूरत इस बात की है कि सरकारें कृषि समर्थक नीति बनाकर उसका ईमानदारी से अनुसरण करें। गांवों में ही रोजगार पैदा किए जाएं। किसानों को फसलों के लाभकारी और उचित मूल्य मिलें।''

- सुरेन्द्र रघुवंशी

अपने गाँव गनिहारी की यात्रा और वहां खेतों पर भ्रमण करते हुए ग्राम्य प्राकृतिक सौन्दर्य की छटा मन को प्रफुल्लित कर देती है। गाँव प्रदूषण से पूरी तरह मुक्त हैं और वहां का प्राकृतिक सौंदर्य हमारी जीवनी शक्ति को मजबूती देता है। हमारा देश गांवों का देश है और अस्सी फीसदी आबादी गांवों में निवास करती है बस जरूरत इस बात की है कि सरकारें कृषि समर्थक नीति बनाकर उसका ईमानदारी से अनुसरण करें।


गांवों में ही रोजगार पैदा किए जाएं। किसानों को फसलों के लाभकारी और उचित मूल्य मिलें। वहां का इन्सफ्रास्ट्रक्चर शहरों की तरह विकसित किया जाए। इससे पलायन भी रुकेगा और गाँव भी वीरान होने से बचे रहेंगे। पर्यावरण संतुलन और विकास तो तोहफ़े में मिलेगा ही।



यहां खेतों में फसलों की मनमोहक हरीतिमा ग्रामयश्री का साक्षात प्रगटीकरण है। वहीं गाँव की मृदा और वनस्पति सम्पदा की जुगलबन्दी संगीत की स्वरलहरियों की तरह ध्वनित होती है।


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