जहरीले बयानों से नैया पार की उम्मीद, धौंस-धपट देने के मामले में इनके दिन अभी गए ही कहाँ?




इनके अच्छे दिन कब आयेंगे, आयेंगे, नहीं आयेंगे, यह तो यही जानें लेकिन इतना अवश्य है कि धौंस-धपट देने के मामले में इनके दिन अभी गए ही कहाँ हैं. हम बात कर रहे हैं मध्यप्रदेश के EX CM shivraj singh chauhan की. असल में आज के नेताओं को लगता है कि जहरीले बयान ही उनकी या उनकी पार्टी का नैया पार लगा सकते हैं.


चुनाव आयोग के डंडे के बाद भी नेताओं की जुबां फिसल रही है. छोटा हो या बड़ा नेता हर किसी को लगता है कि विवादित बोल के जरिए ही लहलहाती हुई चुनावी फसल को काट सकता है. उसी कड़ी में शिवराज सिंह चौहान भी शामिल हो गए हैं. 

शिवराज सिंह अब मध्य प्रदेश के सीएम नहीं हैं, बल्कि वो पूर्व सीएम हैं और साथ ही अब BJP में बड़े पद राष्ट्रीय उपाध्यक्ष के पद पर हैं. आम तौर लोग उन्हें शालीन बोल बोले जाने के लिए जानते हैं, लेकिन यह चुनावी मौसम है, सो गरमी में उनके बयान से जो तपिश निकली, उसमें पश्चिम बंगाल की सीएम ममता बनर्जी तो झुलसी हीं, इसके साथ कमलनाथ भी झुलस गए. उनके बयान की गरमी में कलेक्टर साहब भी झुलसते नजर आए. अब ये जानना जरूरी है कि शिवराज सिंह चौहान ने ऐसा क्या कहा. 


शिवराज सिंह चौहान ने ममता बनर्जी के बारे में कहा कि वो बंगाल में उन्हें उतरने नहीं दे रही थीं. अब कुछ उसी तरह की भूमिका में मध्य प्रदेश के सीएम कमल नाथ दादा आ गए हैं. इसके बाद जो कुछ कहा वो किसी राजनेता के मुंह से शायद शोभा नहीं देता है. वो कहते हैं 'ये पिट्ठू कलेक्टर सुन ले रे, हमारे दिन भी जल्दी आएंगे तब तेरा क्या होगा?' बताया जा रहा है कि शाम पांच बजे के बाद कलेक्टर साहब ने उनके हेलीकॉप्टर को उमरेठ में उतरने की इजाजत नहीं दी थी. 

दरअसल विवादित बोल वाले नेताओं की कतार में शिवराज सिंह अकेले नहीं हैं. पार्टियों के झंडे का रंग कुछ भी हो, नेताओं की कद और काठी कुछ भी हो लेकिन जुबां हर एक नेता की करीब करीब एक जैसी है. चुनावी फसल काटने की जुगत में नेताओं को लगता है कि शायद जहरीले बयान ही उनकी या उनकी पार्टी का नैया पार लगा सकते हैं. 






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